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Basti News: मनोरमा की सफाई का मुद्दा गरमाया, प्रशासन को दिया अल्टीमेटम, सहयोग नहीं तो आंदोलन
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झुंगीनाथ मंदिर के पास मनोरमा नदी की सफाई करते लोग। संवाद
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बस्ती। मनोरमा नदी के सिल्ट सफाई का मुद्दा अब जोर पकड़ लिया है। सफाई अभियान में कूदे सामाजिक कार्यकर्ता एवं भाजपा नेता चंद्रमणि पांडेय सुदामा ने दूसरे दिन बुधवार को प्रशासन को ज्ञापन देकर रविवार तक का समय दिया है।
चेताया कि यदि इस अवधि में जिला प्रशासन ने मनोरमा की सफाई मुहिम में सहयोग नहीं किया तो जनांदोलन खड़ा होगा। लेकिन, प्रशासन की चुप्पी अभी टूटी नहीं है।
भाजपा नेता चंद्रमणि का कहना है कि वह वर्ष 2014 से अनवरत मनोरमा के सरंक्षण की आवाज उठा रहे हैं। इसके लिए कई बार धरना प्रदर्शन और ज्ञापन भी दिए हैं।
हाल ही में प्रशासन और चंद्रमणि पांडेय के बीच समझौता हुआ था। तय हुआ था कि मनोरमा के सफाई अभियान में सिंचाई विभाग, मनरेगा एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का योगदान सुनिश्चित किया जाएगा। इसी बीच हर्रैया के विधायक अजय सिंह ने कह दिया कि सिल्ट सफाई के लिए तैयार प्रस्ताव के पास हुए बगैर नदी को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता है। इसके बाद प्रशासन पीछे हट गया।
उधर भाजपा नेता चंद्रमणि ने दूसरे दिन भी सफाई का कार्य जारी रखा। क्षेत्रीय लोगों और समर्थकों के साथ पंडूलघाट के निकट झुंगीनाथ मंदिर के पास बृहस्पतिवार को भी वह नदी में कूद पड़े। वहां नदी की गहराई अधिक होने के कारण तैराकों को भी उतारा गया। जिन्होंने नदी में तैर कर जलकुंभी निकाली।
इसके बाद बांस और फट्टियों के सहारे लोगों से उसे नदी से बाहर किया। सफाई के दौरान नदी में घुसने से आम लोगों के पैरों में शीशे आदि लगने से घाव भी हो जा रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रशासन या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मनोरमा को स्वच्छ बनाने में कोई महत्वपूर्ण योगदान नहीं कर रहा है। जनसहयोग से नदी की सफाई की जा रही है। हम लोग सफाई करते समय पैरों में शीशा आदि चुभने से घायल हो जा रहे हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से भी प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किया है। कहीं- कहीं नदी ज्यादा गहरी है। सफाई करते समय हादसों से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी प्रशासन की चुप्पी बनी हुई है। अब हम लोगों के पास आंदोलन ही एक रास्ता बचा हुआ हैं।
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चेताया कि यदि इस अवधि में जिला प्रशासन ने मनोरमा की सफाई मुहिम में सहयोग नहीं किया तो जनांदोलन खड़ा होगा। लेकिन, प्रशासन की चुप्पी अभी टूटी नहीं है।
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भाजपा नेता चंद्रमणि का कहना है कि वह वर्ष 2014 से अनवरत मनोरमा के सरंक्षण की आवाज उठा रहे हैं। इसके लिए कई बार धरना प्रदर्शन और ज्ञापन भी दिए हैं।
हाल ही में प्रशासन और चंद्रमणि पांडेय के बीच समझौता हुआ था। तय हुआ था कि मनोरमा के सफाई अभियान में सिंचाई विभाग, मनरेगा एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का योगदान सुनिश्चित किया जाएगा। इसी बीच हर्रैया के विधायक अजय सिंह ने कह दिया कि सिल्ट सफाई के लिए तैयार प्रस्ताव के पास हुए बगैर नदी को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता है। इसके बाद प्रशासन पीछे हट गया।
उधर भाजपा नेता चंद्रमणि ने दूसरे दिन भी सफाई का कार्य जारी रखा। क्षेत्रीय लोगों और समर्थकों के साथ पंडूलघाट के निकट झुंगीनाथ मंदिर के पास बृहस्पतिवार को भी वह नदी में कूद पड़े। वहां नदी की गहराई अधिक होने के कारण तैराकों को भी उतारा गया। जिन्होंने नदी में तैर कर जलकुंभी निकाली।
इसके बाद बांस और फट्टियों के सहारे लोगों से उसे नदी से बाहर किया। सफाई के दौरान नदी में घुसने से आम लोगों के पैरों में शीशे आदि लगने से घाव भी हो जा रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रशासन या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मनोरमा को स्वच्छ बनाने में कोई महत्वपूर्ण योगदान नहीं कर रहा है। जनसहयोग से नदी की सफाई की जा रही है। हम लोग सफाई करते समय पैरों में शीशा आदि चुभने से घायल हो जा रहे हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से भी प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किया है। कहीं- कहीं नदी ज्यादा गहरी है। सफाई करते समय हादसों से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी प्रशासन की चुप्पी बनी हुई है। अब हम लोगों के पास आंदोलन ही एक रास्ता बचा हुआ हैं।