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Bhadohi News: सरहद के गांवों का दर्द, न सड़क, न पानी, न सुनवाई
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प्रयागराज से सटे कुढ़वा गांव में रास्ते पर जलजमाव। संवाद
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ज्ञानपुर। जिले के सीमावर्ती गांवों तक पहुंचते-पहुंचते विकास की लौ धीमी पड़ जाती है। मुख्यालय से दूर होने का दंश ये गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहकर चुकाते हैं। जिले की सीमाएं मिर्जापुर, जौनपुर, प्रयागराज और वाराणसी से मिलती हैं, लेकिन सुदूर क्षेत्रों के इन गांवों में कहीं सिर्फ 300 मीटर सड़क नहीं बन पा रही है तो कहीं बिजली कनेक्शन की स्थिति खराब है। किसी गांव में पेयजल की समस्या है तो कहीं स्कूल बदहाली का सामना कर रहे हैं। जिले में कुल 546 ग्राम पंचायतें हैं। हमारी टीम ने शनिवार को अलग-अलग जिलों की सीमाओं से जुड़े गांवों की हकीकत देखी, जहां कई समस्याएं सामने आईं। भदोही के उत्तर में जौनपुर, दक्षिण में मिर्जापुर, पूर्व में वाराणसी और पश्चिम में प्रयागराज जिले की सीमाएं जुड़ती हैं। इन जिलों की सीमाओं से कम से कम 35 से 40 गांव जुड़े हैं। इनमें कुछ गांव ऐसे हैं, जो सुदूर क्षेत्रों में होने के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। गांवों में सड़क, पानी, नाली, खड़ंजा समेत अन्य कई समस्याएं देखने को मिलती हैं। मुख्यालय से दूर होने के कारण उनकी आवाज पहुंचते-पहुंचते दब जाती है। यहां के लोग आसानी से मुख्यालय नहीं पहुंच पाते।
वाराणसी जिले से सटे चौरी क्षेत्र के जद्दूपुर गांव में वर्षों से सिर्फ 300 मीटर सड़क नहीं बन पा रही है। धनापुर से गांव को जोड़ने वाली सड़क का 300 मीटर हिस्सा वर्षों से कच्चा है। करीब 5,000 की आबादी वाले इस गांव के लोग 300 मीटर सड़क के अभाव में एक किलोमीटर अधिक दूरी तय कर वाराणसी जिले के गांव से होकर अपने गांव पहुंचते हैं। मुख्यालय से इस गांव की दूरी 28 से 30 किमी है।
अभोली ब्लॉक का कुढ़वा गांव प्रयागराज जिले की सीमा से सटा है। मुख्यालय से इसकी दूरी करीब 35 किमी है। गांव की आबादी करीब 10 हजार है। गांव को जोड़ने वाली सड़क की हालत खराब है। करीब 10 वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। सड़क पर घुटने से थोड़ा नीचे तक पानी भर जाता है। गांव में एक भी चौपाल नहीं लगी है।
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औराई ब्लॉक का झौवा गांव वाराणसी की पूर्वी सीमा से सटा है। यहां की सबसे बड़ी समस्या पेयजल है। जल जीवन मिशन की टंकी अधूरी है। इसके अलावा गांव का स्कूल एक तरफ से खोखला हो गया है। उसकी नींव की स्थिति ऐसी है कि वह कभी भी ढहने जैसी प्रतीत होती है। यह गांव मुख्यालय से 32 किमी दूर है। इसकी आबादी करीब सात हजार है।
जौनपुर जिले से सटा सुरियावां का कैड़ा गांव मुख्यालय से 21 किमी दूर है। यहां सबसे बड़ी समस्या खारे पानी की है। पूरे गांव में जर्जर सड़कें बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं। जगह-जगह कीचड़ है। गांव में बिजली व्यवस्था भी ध्वस्त है। खारे पानी के कारण आधे से अधिक परिवार गांव छोड़ चुके हैं। गांव की आबादी करीब चार हजार है।
गांव मुख्यालय से दूर होने का दंश झेल रहा है। गांव में आज तक एक भी चौपाल नहीं लगी। पेयजल की समस्या के साथ स्कूल की बाउंड्री क्षतिग्रस्त है। इससे बच्चों को खतरा बना रहता है। - कैलाश, निवासी झौवा
गांव प्रयागराज से जुड़ा हुआ है। यहां मुख्य सड़क की हालत ऐसी है कि घुटने से नीचे तक पानी भर जाता है। गांव में कोई सुनने वाला नहीं है। अधिकारी यहां आते नहीं हैं, किससे अपनी व्यथा सुनाएं। - गमलेश यादव, निवासी कुढ़वा
कैड़ा गांव वर्षों से खारे पानी की समस्या का दंश झेल रहा है। यहां से कई परिवार गांव छोड़कर चले गए। पेयजल की समस्या का अब तक समाधान नहीं हो सका। आखिर अपनी समस्या किससे कहें। - त्रिभुवन सिंह, निवासी कैड़ा
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वाराणसी जिले से सटे चौरी क्षेत्र के जद्दूपुर गांव में वर्षों से सिर्फ 300 मीटर सड़क नहीं बन पा रही है। धनापुर से गांव को जोड़ने वाली सड़क का 300 मीटर हिस्सा वर्षों से कच्चा है। करीब 5,000 की आबादी वाले इस गांव के लोग 300 मीटर सड़क के अभाव में एक किलोमीटर अधिक दूरी तय कर वाराणसी जिले के गांव से होकर अपने गांव पहुंचते हैं। मुख्यालय से इस गांव की दूरी 28 से 30 किमी है।
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अभोली ब्लॉक का कुढ़वा गांव प्रयागराज जिले की सीमा से सटा है। मुख्यालय से इसकी दूरी करीब 35 किमी है। गांव की आबादी करीब 10 हजार है। गांव को जोड़ने वाली सड़क की हालत खराब है। करीब 10 वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। सड़क पर घुटने से थोड़ा नीचे तक पानी भर जाता है। गांव में एक भी चौपाल नहीं लगी है।
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औराई ब्लॉक का झौवा गांव वाराणसी की पूर्वी सीमा से सटा है। यहां की सबसे बड़ी समस्या पेयजल है। जल जीवन मिशन की टंकी अधूरी है। इसके अलावा गांव का स्कूल एक तरफ से खोखला हो गया है। उसकी नींव की स्थिति ऐसी है कि वह कभी भी ढहने जैसी प्रतीत होती है। यह गांव मुख्यालय से 32 किमी दूर है। इसकी आबादी करीब सात हजार है।
जौनपुर जिले से सटा सुरियावां का कैड़ा गांव मुख्यालय से 21 किमी दूर है। यहां सबसे बड़ी समस्या खारे पानी की है। पूरे गांव में जर्जर सड़कें बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं। जगह-जगह कीचड़ है। गांव में बिजली व्यवस्था भी ध्वस्त है। खारे पानी के कारण आधे से अधिक परिवार गांव छोड़ चुके हैं। गांव की आबादी करीब चार हजार है।
गांव मुख्यालय से दूर होने का दंश झेल रहा है। गांव में आज तक एक भी चौपाल नहीं लगी। पेयजल की समस्या के साथ स्कूल की बाउंड्री क्षतिग्रस्त है। इससे बच्चों को खतरा बना रहता है। - कैलाश, निवासी झौवा
गांव प्रयागराज से जुड़ा हुआ है। यहां मुख्य सड़क की हालत ऐसी है कि घुटने से नीचे तक पानी भर जाता है। गांव में कोई सुनने वाला नहीं है। अधिकारी यहां आते नहीं हैं, किससे अपनी व्यथा सुनाएं। - गमलेश यादव, निवासी कुढ़वा
कैड़ा गांव वर्षों से खारे पानी की समस्या का दंश झेल रहा है। यहां से कई परिवार गांव छोड़कर चले गए। पेयजल की समस्या का अब तक समाधान नहीं हो सका। आखिर अपनी समस्या किससे कहें। - त्रिभुवन सिंह, निवासी कैड़ा