सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   After 79 years, the wounds of displacement were healed.

Bijnor News: विस्थापन के घाव पर 79 साल बाद लगा मरहम

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 12:26 AM IST
विज्ञापन
After 79 years, the wounds of displacement were healed.
अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अ​धिकार प
विज्ञापन
करीब 79 साल से रह रहे 1645 परिवारों को मिला जमीन का मालिकाना हक

पूर्व सैनिकों के 50 परिवार भी लंबे समय से लड़ रहे थे अपने हक के लिए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच पर अधिकार पत्र देते हुए जब यह कहा कि लीजिए अब से आप अपनी जमीन के मालिक हैं, तो छजमलवाला के बुजुर्ग मुख्तयार सिंह की आंखों में आंसू आ गए। न केवल मुख्तार सिंह बल्कि पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए 1645 और 50 भूतपूर्व सैनिकों के परिवारों के सदस्यों की आंखें नम हो गईं।
ये परिवार लगभग 79 वर्षों से जिस जमीन पर रह रहे हैं, उस पर मालिकाना हक के लिए लड़ाई लड़ रहे थे। प्रदेश सरकार ने इन परिवारों को विस्थापन से मिले घाव पर मरहम लगाते हुए भूमि का अधिकार दिया। सोमवार को मंच पर मुख्यमंत्री ने मुख्तयार सिंह के अलावा मोहन सिंह, अमरीक सिंह, लेखा सिंह और लखविंदर कौर को एसडीएम धामपुर के हस्ताक्षर युक्त भूमि अधिकार पत्र सौंपे। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों के वारिस अनुपम कुमार, जगमोहन सिंह, जयकीरत सिंह, सुरेश कुमार और चांदनी देवी के पुत्र जयदीप सिंह को भी मंच पर अधिकार पत्र दिए। इस क्षण के इंतजार में इन परिवारों की तीन से चार पीढि़यां निकल गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

-- अपनी फसल भी नहीं बेच पाते थे किसान
जमीन का मालिकाना हक नहीं होने के कारण विस्थापित एवं पूर्व सैनिक परिवारों के किसान अपनी फसल भी नहीं बेच पाते थे। अधिकार पत्र पाने वाले मिल्खा सिंह ने बताया कि उन्हें बैंक लोन तक नहीं देते थे। सभी किसानों के कृषि कार्ड बने हुए हैं लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला था। अब उन्हें आसानी से लोन मिल सकेगा।
विज्ञापन
Trending Videos

मुख्तयार सिंह का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं एवं धान भी वे नहीं बेच पाते थे। इसके लिए जमीन के दस्तावेजों की जरूरत होती है। अब उनकी यह समस्या खत्म हो गई है। उन्होंने अधिकार पत्र देने पर प्रदेश सरकार का आभार जताया।
लखविंदर कौर बताती हैं कि उनके आवास खेतों पर ही बने हैं। जब से उनका परिवार पाकिस्तान से यहां आया तभी से जमीन के मालिकाना हक के लिए प्रयास कर रहा था। आज उनके जीवन का यह सबसे बड़ा सपना पूरा हुआ है। मोहन सिंह भी भूमि अधिकार पत्र मिलने पर बेहद खुश नजर आए। इसके अलावा पूर्व सैनिकों के परिवारों की खुशी भी देखते ही बनती थी।

अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प

अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प

अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प

अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प

अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प

अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प

अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प

अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed