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Bijnor News: विस्थापन के घाव पर 79 साल बाद लगा मरहम
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अफजलगढ़ के गांव आलमपुर गावड़ी मे भाजपा की जनसभा में विस्थापित परिवार के सदस्य को भूमि अधिकार प
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करीब 79 साल से रह रहे 1645 परिवारों को मिला जमीन का मालिकाना हक
पूर्व सैनिकों के 50 परिवार भी लंबे समय से लड़ रहे थे अपने हक के लिए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच पर अधिकार पत्र देते हुए जब यह कहा कि लीजिए अब से आप अपनी जमीन के मालिक हैं, तो छजमलवाला के बुजुर्ग मुख्तयार सिंह की आंखों में आंसू आ गए। न केवल मुख्तार सिंह बल्कि पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए 1645 और 50 भूतपूर्व सैनिकों के परिवारों के सदस्यों की आंखें नम हो गईं।
ये परिवार लगभग 79 वर्षों से जिस जमीन पर रह रहे हैं, उस पर मालिकाना हक के लिए लड़ाई लड़ रहे थे। प्रदेश सरकार ने इन परिवारों को विस्थापन से मिले घाव पर मरहम लगाते हुए भूमि का अधिकार दिया। सोमवार को मंच पर मुख्यमंत्री ने मुख्तयार सिंह के अलावा मोहन सिंह, अमरीक सिंह, लेखा सिंह और लखविंदर कौर को एसडीएम धामपुर के हस्ताक्षर युक्त भूमि अधिकार पत्र सौंपे। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों के वारिस अनुपम कुमार, जगमोहन सिंह, जयकीरत सिंह, सुरेश कुमार और चांदनी देवी के पुत्र जयदीप सिंह को भी मंच पर अधिकार पत्र दिए। इस क्षण के इंतजार में इन परिवारों की तीन से चार पीढि़यां निकल गईं।
-- अपनी फसल भी नहीं बेच पाते थे किसान
जमीन का मालिकाना हक नहीं होने के कारण विस्थापित एवं पूर्व सैनिक परिवारों के किसान अपनी फसल भी नहीं बेच पाते थे। अधिकार पत्र पाने वाले मिल्खा सिंह ने बताया कि उन्हें बैंक लोन तक नहीं देते थे। सभी किसानों के कृषि कार्ड बने हुए हैं लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला था। अब उन्हें आसानी से लोन मिल सकेगा।
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मुख्तयार सिंह का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं एवं धान भी वे नहीं बेच पाते थे। इसके लिए जमीन के दस्तावेजों की जरूरत होती है। अब उनकी यह समस्या खत्म हो गई है। उन्होंने अधिकार पत्र देने पर प्रदेश सरकार का आभार जताया।
लखविंदर कौर बताती हैं कि उनके आवास खेतों पर ही बने हैं। जब से उनका परिवार पाकिस्तान से यहां आया तभी से जमीन के मालिकाना हक के लिए प्रयास कर रहा था। आज उनके जीवन का यह सबसे बड़ा सपना पूरा हुआ है। मोहन सिंह भी भूमि अधिकार पत्र मिलने पर बेहद खुश नजर आए। इसके अलावा पूर्व सैनिकों के परिवारों की खुशी भी देखते ही बनती थी।
पूर्व सैनिकों के 50 परिवार भी लंबे समय से लड़ रहे थे अपने हक के लिए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच पर अधिकार पत्र देते हुए जब यह कहा कि लीजिए अब से आप अपनी जमीन के मालिक हैं, तो छजमलवाला के बुजुर्ग मुख्तयार सिंह की आंखों में आंसू आ गए। न केवल मुख्तार सिंह बल्कि पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए 1645 और 50 भूतपूर्व सैनिकों के परिवारों के सदस्यों की आंखें नम हो गईं।
ये परिवार लगभग 79 वर्षों से जिस जमीन पर रह रहे हैं, उस पर मालिकाना हक के लिए लड़ाई लड़ रहे थे। प्रदेश सरकार ने इन परिवारों को विस्थापन से मिले घाव पर मरहम लगाते हुए भूमि का अधिकार दिया। सोमवार को मंच पर मुख्यमंत्री ने मुख्तयार सिंह के अलावा मोहन सिंह, अमरीक सिंह, लेखा सिंह और लखविंदर कौर को एसडीएम धामपुर के हस्ताक्षर युक्त भूमि अधिकार पत्र सौंपे। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों के वारिस अनुपम कुमार, जगमोहन सिंह, जयकीरत सिंह, सुरेश कुमार और चांदनी देवी के पुत्र जयदीप सिंह को भी मंच पर अधिकार पत्र दिए। इस क्षण के इंतजार में इन परिवारों की तीन से चार पीढि़यां निकल गईं।
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जमीन का मालिकाना हक नहीं होने के कारण विस्थापित एवं पूर्व सैनिक परिवारों के किसान अपनी फसल भी नहीं बेच पाते थे। अधिकार पत्र पाने वाले मिल्खा सिंह ने बताया कि उन्हें बैंक लोन तक नहीं देते थे। सभी किसानों के कृषि कार्ड बने हुए हैं लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला था। अब उन्हें आसानी से लोन मिल सकेगा।
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मुख्तयार सिंह का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं एवं धान भी वे नहीं बेच पाते थे। इसके लिए जमीन के दस्तावेजों की जरूरत होती है। अब उनकी यह समस्या खत्म हो गई है। उन्होंने अधिकार पत्र देने पर प्रदेश सरकार का आभार जताया।
लखविंदर कौर बताती हैं कि उनके आवास खेतों पर ही बने हैं। जब से उनका परिवार पाकिस्तान से यहां आया तभी से जमीन के मालिकाना हक के लिए प्रयास कर रहा था। आज उनके जीवन का यह सबसे बड़ा सपना पूरा हुआ है। मोहन सिंह भी भूमि अधिकार पत्र मिलने पर बेहद खुश नजर आए। इसके अलावा पूर्व सैनिकों के परिवारों की खुशी भी देखते ही बनती थी।

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