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Bijnor News: खेत बनेंगे शोध केंद्र, वैज्ञानिक तैयार कराएंगे उन्नत गन्ना बीज

Tue, 04 Aug 2026 01:14 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 01:14 AM IST
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Farms to become research centers; scientists to develop improved sugarcane seeds.
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बिजनौर में शुरू होगी नई पहल, किसानों को मिलेगा प्रमाणित एवं रोगमुक्त गन्ना बीज
-नंबर गेम
-100 हेक्टेयर में होगा कार्य ट्रायल
-2.65 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बिजनौर के खेत अब केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान के केंद्र भी बनेंगे। शीतकालीन गन्ना बुवाई से जिले में ऐसी नई पहल शुरू होने जा रही है, जिसमें वैज्ञानिकों की निगरानी में उन्नत एवं रोगमुक्त गन्ना बीज तैयार किया जाएगा। इससे किसानों को प्रमाणित बीज उचित मूल्य पर मिलेगा और नकली व महंगे बीज की समस्या पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा।
बिजनौर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में शामिल है, जहां लगभग 2.65 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। 0238 गन्ना प्रजाति में रोग बढ़ने के कारण किसान दूसरी किस्मों की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अन्य प्रजाति उसकी बराबरी नहीं कर सकी है। जिले में किसानों को उन्नत एवं रोगमुक्त गन्ना बीज उपलब्ध कराने के लिए नई पहल शुरू होने जा रही है। शीतकालीन गन्ना बुवाई से पहले वैज्ञानिकों की निगरानी में चयनित खेतों को अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में कुल 100 हेक्टेयर से ज्यादा तक विस्तारित किया जाएगा। इसमें एक किसान यानी एक हेक्टेयर जमीन में बीज तैयार किया जाएगा। नई व्यवस्था से किसानों को दूसरे जिलों से महंगे दामों पर बीज खरीदने की मजबूरी नहीं रहेगी और गन्ना बीज के नाम पर होने वाली कालाबाजारी पर भी प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
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-वैज्ञानिकों की टीम करेंगे जिले का दौरा
गन्ना अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिक एक-दो दिन में जिले का दौरा कर उपजाऊ भूमि और सिंचाई सुविधा वाले खेतों का चयन करेंगे। बुवाई से लेकर फसल तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिकों की देखरेख में होगी। तैयार बीज किसानों को अनुसंधान केंद्र द्वारा निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे महंगे बीज की खरीद और कालाबाजारी पर रोक लगेगी।
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-वैज्ञानिक टीम करेगी दौरा -डीसीओ
जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि शीतकालीन गन्ना बुवाई के समय कुछ खेतों उन्नत प्रजाति के बीज तैयार कराए जाएंगे। इसमें कम से कम एक हेक्टेयर का एक प्लॉट तैयार किया जाएगा। वैज्ञानिक ही खेतों का चयन करेंगे। इससे किसानों उचित दाम पर उन्नत प्रजाति के बीज लोकल में ही मिलेगा।
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