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Bijnor News: सलेमपुर खादर की बस्ती तक पहुंचा गंगा का पानी
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हीमपुरदीपा क्षेत्र के गांव सलेमपुर खादर-जलीलपुर मार्ग पर भरा गंगा का पानी। संवाद
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हीमपुर दीपा। गंगा खादर क्षेत्र के गांव सलेमपुर खादर की बस्ती के निकट एवं सलेमपुर खादर-जलीलपुर मार्ग पर गंगा का पानी आने से ग्रामीणों को चिंता सताने लगी है।
शुक्रवार की रात गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण क्षेत्र के सलेमपुर खादर के जंगल में किसानों की हजारों हेक्टेयर गन्ना और धान की फसल पानी में डूब गई। साथ ही गंगा के पानी ने सलेमपुर खादर की बस्ती में ग्रामीणों राजकुमार, श्रवण सिंह, भरत शर्मा, संजय शर्मा, संदीप, बिट्टू, प्रदीप, मूलचंद आदि के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
गांव के बबलू चौहान, डॉक्टर भूपेंद्र चौहान, खजान सिंह, ओमपाल सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने से उनके खून पसीने की गन्ने, धान की फसल प्रतिवर्ष नष्ट हो जाती है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं प्रतिनिधियों से गंगा का तटबंध निर्माण कराने की बार-बार गुहार लगाई लेकिन उनकी आवाज पर ध्यान नहीं दिया गया।
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इस संबंध में गांव के डॉ भूपेंद्र सिंह चौहान, खजाना सिंह, बबलू चौहान, गजेंद्र सिंह, लाखन सिंह, बिजेंद्र, राजपाल, प्रमोद, अरविंद अत्रे, ओमवीर, जितेंद्र आदि ने बताया कि उन्होंने समस्या निस्तारण के लिए बार-बार जिला प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया लेकिन इस ज्वलंत समस्या का निस्तारण नहीं हो सका। उन्होंने गंगा तट पर तटबंध बनवाने की पुरजोर मांग की मांग की है।
जंगल जाने के लिए चार गांव का रास्ता हुआ बंद
गंगा खादर तट के पास बसे सलेमपुर खादर ढ़ोलनपुर, महमूद खादर, फैजीपुर खादर के चार गांव के ग्रामीण कृषि कार्य एवं पशुचारे के लिए छोईया पुल पार करके जंगल जाते हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से 2 दिन से है रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। जिसके परिणाम स्वरूप ग्रामीणों को पशुचारे की समस्या का संकट पैदा हो गया है।
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शुक्रवार की रात गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण क्षेत्र के सलेमपुर खादर के जंगल में किसानों की हजारों हेक्टेयर गन्ना और धान की फसल पानी में डूब गई। साथ ही गंगा के पानी ने सलेमपुर खादर की बस्ती में ग्रामीणों राजकुमार, श्रवण सिंह, भरत शर्मा, संजय शर्मा, संदीप, बिट्टू, प्रदीप, मूलचंद आदि के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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गांव के बबलू चौहान, डॉक्टर भूपेंद्र चौहान, खजान सिंह, ओमपाल सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने से उनके खून पसीने की गन्ने, धान की फसल प्रतिवर्ष नष्ट हो जाती है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं प्रतिनिधियों से गंगा का तटबंध निर्माण कराने की बार-बार गुहार लगाई लेकिन उनकी आवाज पर ध्यान नहीं दिया गया।
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इस संबंध में गांव के डॉ भूपेंद्र सिंह चौहान, खजाना सिंह, बबलू चौहान, गजेंद्र सिंह, लाखन सिंह, बिजेंद्र, राजपाल, प्रमोद, अरविंद अत्रे, ओमवीर, जितेंद्र आदि ने बताया कि उन्होंने समस्या निस्तारण के लिए बार-बार जिला प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया लेकिन इस ज्वलंत समस्या का निस्तारण नहीं हो सका। उन्होंने गंगा तट पर तटबंध बनवाने की पुरजोर मांग की मांग की है।
जंगल जाने के लिए चार गांव का रास्ता हुआ बंद
गंगा खादर तट के पास बसे सलेमपुर खादर ढ़ोलनपुर, महमूद खादर, फैजीपुर खादर के चार गांव के ग्रामीण कृषि कार्य एवं पशुचारे के लिए छोईया पुल पार करके जंगल जाते हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से 2 दिन से है रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। जिसके परिणाम स्वरूप ग्रामीणों को पशुचारे की समस्या का संकट पैदा हो गया है।