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प्रबल हत्याकांड : जिले के रसूखदारों का नया पता- जिला जेल बैरक नंबर आठ
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बिजनौर। प्रबल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए शहर के रसूखदारों का नया पता बिजनौर जेल की बैरक नंबर आठ है। कैदी नंबर 234...जेल में यह क्रमांक संजय गुप्ता को मिला है, जबकि विनय अग्रवाल का नाम कैदियों के रजिस्टर में 233वें क्रमांक पर रखा गया है। इसी तरह से अन्य पांच के भी कैदी नंबर जारी कर दिए गए हैं।
प्रबल हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने राज्य महिला आयोग सदस्य संगीता अग्रवाल के पति विनय अग्रवाल बेटे अपूर्व अग्रवाल और रामलीला समिति के संरक्षक संजय गुप्ता एडवोकेट समेत सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था। इस मामले में अदालत ने शुक्रवार को सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सातों अभियुक्त बुधवार से ही जेल में बंद हैं। सभी को जेल की बैरक नंबर आठ में रखा गया है। इन्हें कैदियों के रजिस्टर में नंबर भी जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ-साथ ही इन सातों कैदियों को सफेद रंग के कपड़े दे दिए गए हैं, जिससे दूर से ही पहचान हो सके।
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ये कैदी अपने घर से ले जाए हुए मनपसंद कपड़े नहीं पहन पाएंगे क्योंकि हवालाती बंदियों को ही घर के कपड़े पहनने की आजादी होती है। सजायाफ्ता कैदी जेल के नियमों के अनुसार सफेद रंग के कुर्ता पायजामा या पैंट शर्ट पहन सकते हैं।
करवटें बदलते हुए कट रही रात : जेल में गए सभी सातों मुजरिमों की रात करवटें बदलते हुए बीत रही है। जेल सूत्रों की मानें तो जेल में आने के बाद कुछ दिनों तक कैदी या बंदी खुद को असहज महसूस करता है।
ऐसे में दो-चार दिन तक दिक्कत होती है। प्रबल हत्याकांड में आए सातों मुजरिम भी रात में कम ही सो रहे हैं।
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प्रबल हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने राज्य महिला आयोग सदस्य संगीता अग्रवाल के पति विनय अग्रवाल बेटे अपूर्व अग्रवाल और रामलीला समिति के संरक्षक संजय गुप्ता एडवोकेट समेत सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था। इस मामले में अदालत ने शुक्रवार को सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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सातों अभियुक्त बुधवार से ही जेल में बंद हैं। सभी को जेल की बैरक नंबर आठ में रखा गया है। इन्हें कैदियों के रजिस्टर में नंबर भी जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ-साथ ही इन सातों कैदियों को सफेद रंग के कपड़े दे दिए गए हैं, जिससे दूर से ही पहचान हो सके।
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ये कैदी अपने घर से ले जाए हुए मनपसंद कपड़े नहीं पहन पाएंगे क्योंकि हवालाती बंदियों को ही घर के कपड़े पहनने की आजादी होती है। सजायाफ्ता कैदी जेल के नियमों के अनुसार सफेद रंग के कुर्ता पायजामा या पैंट शर्ट पहन सकते हैं।
करवटें बदलते हुए कट रही रात : जेल में गए सभी सातों मुजरिमों की रात करवटें बदलते हुए बीत रही है। जेल सूत्रों की मानें तो जेल में आने के बाद कुछ दिनों तक कैदी या बंदी खुद को असहज महसूस करता है।
ऐसे में दो-चार दिन तक दिक्कत होती है। प्रबल हत्याकांड में आए सातों मुजरिम भी रात में कम ही सो रहे हैं।