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Bijnor News: तीन साल में 36 इंसानों को मार चुका गुलदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जनपद में गुलदार का आतंक फैला हुआ है। पिछले तीन वर्षों में जिले में अलग अलग जगहों पर गुलदार के हमलों में 36 लोगों की जान जा चुकी है। इससे जहां लोगों में दहशत हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग की चिंता भी गहरा रही है। कादराबाद में 2026 में यह गुलदार के हमले से हुई दूसरे व्यक्ति की मौत है। बढ़ते खतरे को देखते हुए, वन विभाग ने जनपद के लगभग 150 गांवों को गुलदार की गतिविधि के प्रति संवेदनशील घोषित किया है। इन गांवों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। गुलदार को पकड़ने के लिए जिले भर में 200 से अधिक पिंजरे लगाए गए हैं।
पिछले चार वर्षों में 100 से अधिक गुलदारों को पकड़ा जा चुका है। इसके बावजूद समस्या बनी हुई है, जो नए गुलदारों के प्रवेश का संकेत देती है। वन विभाग ने गुलदार गतिविधि वाले क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों की जीवन शैली पर प्रभाव : गुलदार के आतंक के कारण ग्रामीण अपनी दैनिक गतिविधियों को लेकर भयभीत हैं। शाम ढलने के बाद लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते हैं। खेतों में काम करने वाले किसान विशेष रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे भी इस स्थिति से प्रभावित हैं। इस स्थिति ने ग्रामीण जीवन की सामान्य लय को बाधित कर दिया है।
वन विभाग के अधिकारी समस्या के समाधान के लिए विभिन्न रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। इसमें पिंजरे लगाना, गश्त बढ़ाना और संभावित ठिकानों की पहचान करना शामिल है। हालांकि, गुलदार की चालाकी और घने जंगल उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है।
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बिजनौर। जनपद में गुलदार का आतंक फैला हुआ है। पिछले तीन वर्षों में जिले में अलग अलग जगहों पर गुलदार के हमलों में 36 लोगों की जान जा चुकी है। इससे जहां लोगों में दहशत हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग की चिंता भी गहरा रही है। कादराबाद में 2026 में यह गुलदार के हमले से हुई दूसरे व्यक्ति की मौत है। बढ़ते खतरे को देखते हुए, वन विभाग ने जनपद के लगभग 150 गांवों को गुलदार की गतिविधि के प्रति संवेदनशील घोषित किया है। इन गांवों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। गुलदार को पकड़ने के लिए जिले भर में 200 से अधिक पिंजरे लगाए गए हैं।
पिछले चार वर्षों में 100 से अधिक गुलदारों को पकड़ा जा चुका है। इसके बावजूद समस्या बनी हुई है, जो नए गुलदारों के प्रवेश का संकेत देती है। वन विभाग ने गुलदार गतिविधि वाले क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
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ग्रामीणों की जीवन शैली पर प्रभाव : गुलदार के आतंक के कारण ग्रामीण अपनी दैनिक गतिविधियों को लेकर भयभीत हैं। शाम ढलने के बाद लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते हैं। खेतों में काम करने वाले किसान विशेष रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे भी इस स्थिति से प्रभावित हैं। इस स्थिति ने ग्रामीण जीवन की सामान्य लय को बाधित कर दिया है।
वन विभाग के अधिकारी समस्या के समाधान के लिए विभिन्न रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। इसमें पिंजरे लगाना, गश्त बढ़ाना और संभावित ठिकानों की पहचान करना शामिल है। हालांकि, गुलदार की चालाकी और घने जंगल उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है।