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Bijnor News: संसद की कार्यवाही स्थगित होने पर नगीना सांसद ने जताया असंतोष
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सोशल साइट पर लिखा- क्षेत्र और समाज के महत्वपूर्ण मुद्दे नहीं उठा सके
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख व नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बृहस्पतिवार को संसद का मानसून सत्र का अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने पर असंतोष जताया है। उन्होंने संसद के बार-बार स्थगित होने के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों को बराबर जिम्मेदार ठहराया है।
सोशल साइट एक्स पर की गई पोस्ट में सांसद ने लिखा है कि आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के पूर्ण गायन के बाद केवल एक मिनट में ही समाप्त हो गई। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने पूरी तैयारी की थी कि इस बार मानसून सत्र में अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े हुए मुद्दों के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के कई जरूरी मुद्दे सदन में उठाऊंगा। लेकिन अफसोस, सदन की कार्यवाही जिस तरह बाधित हुई, उससे जनता से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सवाल संसद के पटल तक नहीं पहुंच सके।
उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन को दो-तीन पार्टियों ने बंधक बना लिया है। उन्हें सदन में बोलने का समय बहुत कम मिलता है। उसमें भी जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के रवैये के कारण सदन की कार्यवाही चलने ही नहीं दी जाती, तो जरूरी मुद्दे आखिर कहां और कैसे उठाएंगे? एक दिन की संसदीय कार्यवाही पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में संसद का बार-बार बाधित होना देश के करोड़ों लोगों के साथ अन्याय है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख व नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बृहस्पतिवार को संसद का मानसून सत्र का अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने पर असंतोष जताया है। उन्होंने संसद के बार-बार स्थगित होने के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों को बराबर जिम्मेदार ठहराया है।
सोशल साइट एक्स पर की गई पोस्ट में सांसद ने लिखा है कि आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के पूर्ण गायन के बाद केवल एक मिनट में ही समाप्त हो गई। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने पूरी तैयारी की थी कि इस बार मानसून सत्र में अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े हुए मुद्दों के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के कई जरूरी मुद्दे सदन में उठाऊंगा। लेकिन अफसोस, सदन की कार्यवाही जिस तरह बाधित हुई, उससे जनता से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सवाल संसद के पटल तक नहीं पहुंच सके।
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उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन को दो-तीन पार्टियों ने बंधक बना लिया है। उन्हें सदन में बोलने का समय बहुत कम मिलता है। उसमें भी जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के रवैये के कारण सदन की कार्यवाही चलने ही नहीं दी जाती, तो जरूरी मुद्दे आखिर कहां और कैसे उठाएंगे? एक दिन की संसदीय कार्यवाही पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में संसद का बार-बार बाधित होना देश के करोड़ों लोगों के साथ अन्याय है।
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