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Bijnor News: सहायक के भरोसे चल रही नींदड़ू की सहकारी समिति

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jan 2026 12:58 AM IST
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Nindradu's cooperative society is running on the support of assistant
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नींदड़ू। नींदड़ू की बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति (बी पैक्स) में सचिव और आंकिक की नियुक्ति नहीं होने के कारण सचिव का कार्य समिति के सहायक को करना पड़ रहा है। सहायक के बैठक, शादी या निधन में शामिल होने पर समिति बंद रहती है। लेनदेन और खाद वितरण का कार्य नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सात अप्रैल 1975 को नींदड़ू खास, बाजीदपुर, महाबतपुर बीरू, मोहम्मद अलीपुर भिक्कन और अंथाई शेख के किसानों की सुविधार्थ नींदड़ू साधन सहकारी समिति की स्थापना की गई थी। समित से किसानों को ऋण, खाद, बीज और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं। बाद में साधन सहकारी समिति का नाम बदलकर बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति हो गया। समिति में सचिव, आंकिक, सहायक और चपरासी-चौकीदार के पद सृजित हैं। 31 अगस्त 2018 में प्रभारी सचिव अरशद अली पद से सेवानिवृत हो गए।
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इसके बाद बहुउद्देशीय सहकारी समिति धामपुर के प्रबंध निदेशक (एमडी) अशोक कुमार को नींदड़ू की समिति का अतिरिक्त भार सौंपा गया। धामपुर की बड़ी समिति में कार्य अधिक होने के कारण एमडी का ज्यादातर वक्त धामपुर में ही गुजरता है। उनका नींदड़ू समिति में आना नहीं के बराबर है। आंकिक के पद पर कार्यरत तेजपाल सिंह 31 जुलाई 2023 में रिटायर्ड हो चुके हैं। जिम्मेदारी भरे दोनों पद रिक्त होने से सचिव व आंकिक का समस्त कार्य सहायक अखलाक अहमद को देखना पड़ रहा है।
अखलाक अहमद ने बताया कि समिति 1200 के करीब किसान सदस्य हैं। इनमें 500 से ज्यादा उपभोक्ता नियमित रूप से लेनदेन करते हैं। समिति का टर्नओवर तीन करोड़ से ऊपर है। पहले एक वर्ष में 70 लाख रुपये का खाद बिकता था, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते अब 30-40 लाख रुपये के आसपास खाद की बिक्री हो पा रही है। किसान अपनी जरूरत के हिसाब से यूरिया, डीएपी, एनपीके, पोटाश और सागरिका आदि ले जाते हैं। विभागीय मीटिंग में जाने या शादी-मौत में शरीक होने की स्थिति में समिति बंद करने की नौबत आ जाती है। इससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
समिति के सभापति रऊफ अहमद का कहना है कि सचिव की नियुक्ति विभागीय स्तर से की जाती है। आंकिक भी सेवानिवृत हो चुके हैं। इसलिए समिति का कार्य सहायक को ही करना पड़ रहा है।
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