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Bijnor News: विवादित सेवा समिति की भूमि पर प्रशासन ने कब्जा लिया
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स्योहारा। नगर के जुमरात बाजार में स्थित विवादित सेवा समिति की भूमि को आखिरकार प्रशासन ने अपने संरक्षण में ले लिया। जिलाधिकारी बिजनौर के आदेश पर एसडीएम धामपुर द्वारा गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की तारबंदी कर उसे नगर पालिका के संरक्षण में दे दिया है। जुमरात बाजार में स्थित सेवा समिति की खाली पड़ी भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप है कि रानी कामिनी सिंह ने इस भूमि पर अपना स्वामित्व जताते हुए तीन लोगों से भारी रकम लेकर बैनामा कर दिया था, जबकि नगर पालिका और अन्य सरकारी अभिलेखों में यह भूमि सेवा समिति के नाम दर्ज है।
मामला सामने आने के बाद हिंदू संपत्ति सुरक्षा समिति के संरक्षक डॉ. विनीत देवरा ने इसे हिन्दू संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन से शिकायत की थी। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों को भी दी गई थी। शिकायत के बाद जिलाधिकारी बिजनौर ने जांच कराते हुए गाटा संख्या 2027 (ग) को राजस्व अभिलेखों में आबादी अथवा सार्वजनिक संपत्ति मानते हुए उस पर तारबंदी कराने के निर्देश दिए।
शनिवार को नायब तहसीलदार विजय कुमार, ईओ स्योहारा बिजेंद्र सिंह पाल, लेखपाल अनिल कुमार और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और भूमि की घेराबंदी कर दी गई। इस भूमि के एक हिस्से पर नीलू रस्तोगी की करीब तीन दशक पुरानी समोसे की दुकान भी थी। तारबंदी के दौरान उन्होंने विरोध जताया, लेकिन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उनका विरोध सफल नहीं हो सका। नगर पालिका ईओ विजेंद्र सिंह पाल का कहना है कि यह कार्रवाई सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए की गई है।
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मामला सामने आने के बाद हिंदू संपत्ति सुरक्षा समिति के संरक्षक डॉ. विनीत देवरा ने इसे हिन्दू संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन से शिकायत की थी। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों को भी दी गई थी। शिकायत के बाद जिलाधिकारी बिजनौर ने जांच कराते हुए गाटा संख्या 2027 (ग) को राजस्व अभिलेखों में आबादी अथवा सार्वजनिक संपत्ति मानते हुए उस पर तारबंदी कराने के निर्देश दिए।
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शनिवार को नायब तहसीलदार विजय कुमार, ईओ स्योहारा बिजेंद्र सिंह पाल, लेखपाल अनिल कुमार और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और भूमि की घेराबंदी कर दी गई। इस भूमि के एक हिस्से पर नीलू रस्तोगी की करीब तीन दशक पुरानी समोसे की दुकान भी थी। तारबंदी के दौरान उन्होंने विरोध जताया, लेकिन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उनका विरोध सफल नहीं हो सका। नगर पालिका ईओ विजेंद्र सिंह पाल का कहना है कि यह कार्रवाई सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए की गई है।
