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Bijnor News: नए पर्यटन केंद्र के रूप में उभरे रैनी वन ब्लॉक, नाकोवाली झील
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बिजनौर। वन्यजीव, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों से परिपूर्ण बिजनौर जिला अब पर्यटन के मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। महाभारत काल से लेकर आधुनिक युग तक, इस जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिनमें अमानगढ़ जैसी वन्यजीव बाहुल्य वन रेंज भी शामिल है। अब इस सूची में चांदपुर क्षेत्र की नाकोवाली झील और धामपुर रेंज में पड़ने वाला रैनी वन ब्लॉक भी शामिल होने जा रहा है।
बिजनौर का नामकरण प्राचीन काल में राजा वेन के ‘’वेन नगर’’ से हुआ, जिसके अवशेष आज भी मिलते हैं। यह जिला ‘’भारत’’ नाम की उत्पत्ति से भी जुड़ा है। महाकवि कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतलम में वर्णित राजा दुष्यंत और शकुंतला का मिलन स्थल, ऋषि कण्व का आश्रम, बिजनौर जिले के रावली क्षेत्र में स्थित है। यहीं पर राजा दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत ने शेर के बच्चे के दांत गिने थे, उन्हीं के नाम पर देश का नाम ‘’भारत’’ पड़ा। दुर्भाग्यवश, गंगा-मालन संगम और कण्व ऋषि आश्रम लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रहे। वहीं पिछले कुछ सालों में इन जगहों पर भी पर्यटन की संभावनाएं बनने लगी है।
महाभारत काल से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण स्थली विदुर कुटी है, जो गंगा किनारे स्थित है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के दूत बनकर हस्तिनापुर जाते समय कौरवों का छप्पन भोग त्यागकर महात्मा विदुर की कुटी में बथुए का साग खाया था। यहीं पर महाभारत के सैनिकों की विधवाओं के लिए दारानगर नामक आश्रम भी बनवाया गया था। चांदपुर के पास स्थित सैंद्वार, जिसे पहले ‘’सैन्यद्वार’’ कहा जाता था, भारद्वाज ऋषि के पुत्र द्रोण का आश्रम और सैन्य प्रशिक्षण केंद्र था।
वेटलैंड के रूप में विकसित होगी नाकोवाली झील : चांदपुर क्षेत्र में नारनौर के पास एक नाकोवाली झील है, जिसे वन विभाग ने कुछ समय पहले ही वेटलैंड के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। इसकी तुलना हैदरपुर वेटलैंड से की जा रही है। यहां पर इस समय हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी आए हुए हैं। सबकुछ ठीक रहा तो यहां पर रामसर साइट का सपना भी पूरा हो सकता है।
उधर रैनी वन ब्लाॅक के जंगल को रैनी नदी भी खास बनाती है। नदी ने सालों में अपना दायरा और धारा दोनों बदलें हैं। इसलिए जंगल में प्राकृतिक झील भी बन गई हैं। इसके अलावा यहां पर खैर, शीशम, बबूल, आम, सेंबल, पीपल, बरगद का घना जंगल है। यहां पर भालू, गुलदार, हिरण, जंगली सुकर, नीलगाय, पैंगोलिन जैसे वन्य जीव, किंग कोबरा, अजगर जैसे सांप और 200 से अधिक प्रजाति के पक्षी भी विचरण कर रहे हैं।ी
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महाभारत काल से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण स्थली विदुर कुटी है, जो गंगा किनारे स्थित है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के दूत बनकर हस्तिनापुर जाते समय कौरवों का छप्पन भोग त्यागकर महात्मा विदुर की कुटी में बथुए का साग खाया था। यहीं पर महाभारत के सैनिकों की विधवाओं के लिए दारानगर नामक आश्रम भी बनवाया गया था। चांदपुर के पास स्थित सैंद्वार, जिसे पहले ‘’सैन्यद्वार’’ कहा जाता था, भारद्वाज ऋषि के पुत्र द्रोण का आश्रम और सैन्य प्रशिक्षण केंद्र था।
वेटलैंड के रूप में विकसित होगी नाकोवाली झील : चांदपुर क्षेत्र में नारनौर के पास एक नाकोवाली झील है, जिसे वन विभाग ने कुछ समय पहले ही वेटलैंड के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। इसकी तुलना हैदरपुर वेटलैंड से की जा रही है। यहां पर इस समय हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी आए हुए हैं। सबकुछ ठीक रहा तो यहां पर रामसर साइट का सपना भी पूरा हो सकता है।
उधर रैनी वन ब्लाॅक के जंगल को रैनी नदी भी खास बनाती है। नदी ने सालों में अपना दायरा और धारा दोनों बदलें हैं। इसलिए जंगल में प्राकृतिक झील भी बन गई हैं। इसके अलावा यहां पर खैर, शीशम, बबूल, आम, सेंबल, पीपल, बरगद का घना जंगल है। यहां पर भालू, गुलदार, हिरण, जंगली सुकर, नीलगाय, पैंगोलिन जैसे वन्य जीव, किंग कोबरा, अजगर जैसे सांप और 200 से अधिक प्रजाति के पक्षी भी विचरण कर रहे हैं।ी
