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Bijnor News: लकड़ी-कोयले की भट्ठी का सहारा, छोटे होटल और ढाबे बंदी के कगार पर

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:00 AM IST
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Small hotels and eateries rely on wood and coal furnaces, facing closure.
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शेरकोट/धामपुर। खाड़ी देशों में युद्ध के चलते गैस की किल्लत का असर अब होटल व्यवसाय पर पड़ने लगा है। क्षेत्र में कई होटलों, ढाबा संचालकों ने कॉमर्शियल गैस सिलिंडर न मिलने पर विकल्प के तौर पर लकड़ी और कोयले से संचालित भट्ठियों का उपयोग करना शुरू कर दिया। छोटे होटल व ढाबे बंदी के कगार पर है। शेरकोट में टेंपों स्टैंड स्थित नगर के एक मात्र शाकाहारी भोजनालय सूर्या रेस्टोरेंट के संचालक मुन्ना ने बताया कि कॉमर्शियल गैस सिलिंडर न मिलने के कारण काम धड़ाम हो गया है। पहले होटल पर तीन वक्त का खाना बनाता था। लेकिन गैस की किल्लत के कारण सुबह का नाश्ता नहीं बना रहे हैं। दोपहर, रात के भोजन में भी देरी से पकने वाले व्यंजन जैसे छोले, पनीर, राजमा आदि नहीं बनाया जा रहा है। गैस किल्लत से फिलहाल लकड़ी और कोयले की भट्ठी पर खाना तैयार किया जा रहा है। कई प्रकार के व्यंजन न बनने के कारण दुकानदारी पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
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वहीं नगर के विभिन्न मुस्लिम होटलों पर खाना बनाना बंद कर दिया गया है। होटल संचालक नदीम अहमद, आमिर आदि ने बताया कि कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण पिछले 15 दिनों से होटल पर खाना तैयार नहीं किया जा रहा है। होटल बंद हो गया है। लकड़ी कोयले का तंदूर चलाकर केवल रोटियां ही बनाई जा रही है, जिससे ग्राहकों की संख्या घटी है। व्यापार व आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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उधर धामपुर में नगीना मार्ग स्थित स्वागत ढ़ाबा के संचालक वसीम अहमद का कहना है कि कॉमर्शियल गैस सिलिंडर उपलब्ध न होने पर भट्ठी जलाकर काम किया जा रहा है। ईंधन की खपत कम हो इसलिए जल्दी तैयार होने वाले दाल, सब्जियां ही बनाई जा रही है।
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