{"_id":"69c974e95ccbf3e9310e4ec4","slug":"the-earnings-of-small-businessmen-are-burning-in-the-furnace-bijnor-news-c-27-1-smrt1025-175692-2026-03-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: भट्ठी में सुलग रही छोटे कारोबारियों की कमाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: भट्ठी में सुलग रही छोटे कारोबारियों की कमाई
विज्ञापन
बिजनौर में दीप डेयरी पर डीजल की भट्टी पर काम करता कारीगार। संवाद
विज्ञापन
धामपुर। खाड़ी देश में युद्ध की स्थिति के बाद कॉमर्शियल गैस सिलिंडर नहीं मिलने का सीधा असर गली-मोहल्लों के छोटे दुकानदारों पर पड़ रहा है। मुख्य बाजार में ठेला लगाने वाले खाद्य पदार्थ विक्रेताओं ने भी आजीविका चलाने के लिए लकड़ी- कोयले की भट्ठी लगानी शुरू कर दी है। व्यापारियों का कहना है कि ऐसे में उनका कारोबार बंदी के कगार पर आ गया है।
धामपुर के मुख्य बाजार में सुबह के नाश्ते के तौर पर मूंग की दाल, सिंघाड़े की कचरी, छोले भटूरे और खस्ता आलू का बहुत प्रचलन है। दाल विक्रेता चंद्रपाल का कहना है कि अब कॉमर्शियल गैस सिलिंडर नहीं मिलने से परिवार के लोगों को सुबह लगभग चार बजे उठकर चूल्हे पर दाल तैयार करनी पड रही है। पहले गैस सिलिंडर के चूल्हे पर दाल-कचरी तैयार की जाती थी। जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती थी। लेकिन परिवार की आजीविका चलाने के लिए काम करना जरूरी है। इसलिए अब उन्होंने गोबर के उपलों और लकड़ी की मदद से दाल कचरी बनाना शुरू कर दिया है।
सराफा बाजार स्थित खस्ता आलू विक्रेता सोनू का कहना है कि उनके यहां प्रतिदिन दो सौ से तीन सौ खस्ता की बिक्री होती है। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर न मिलने पर उन्होंने अब लकड़ी और टिकली का कोयले की भट्ठी लगा ली है। हालांकि इसमें लागत अधिक पड़ रही है लेकिन काम तो करना ही है। गली मोहल्ले में चाय आदि की दुकान चलाने वाले लोगों की भी यही स्थिति है। नगर के विवेक कुमार कहना है कि उन्होंने चाय बनाने का काम बंद कर दिया है। मोहल्ला वाड़बान स्थित चाय की दुकान संचालक राजीव ने बताया कि अब कोयले की भट्ठी पर चाय बनानी पड़ रही है। सामान बनाने में लागत बढ़ रही है। ग्राहक बढ़े दाम देने को तैयार नहीं है। इससे दुकानदारी प्रभावित हो रही है।
एआरओ आलोक कुमार वशिष्ठ का कहना है कि सिलिंडरों की मांग की गई है। सिलिंडरों की आवक होने से सभी की समस्या का निदान हो जाएगा।
Trending Videos
धामपुर के मुख्य बाजार में सुबह के नाश्ते के तौर पर मूंग की दाल, सिंघाड़े की कचरी, छोले भटूरे और खस्ता आलू का बहुत प्रचलन है। दाल विक्रेता चंद्रपाल का कहना है कि अब कॉमर्शियल गैस सिलिंडर नहीं मिलने से परिवार के लोगों को सुबह लगभग चार बजे उठकर चूल्हे पर दाल तैयार करनी पड रही है। पहले गैस सिलिंडर के चूल्हे पर दाल-कचरी तैयार की जाती थी। जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती थी। लेकिन परिवार की आजीविका चलाने के लिए काम करना जरूरी है। इसलिए अब उन्होंने गोबर के उपलों और लकड़ी की मदद से दाल कचरी बनाना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सराफा बाजार स्थित खस्ता आलू विक्रेता सोनू का कहना है कि उनके यहां प्रतिदिन दो सौ से तीन सौ खस्ता की बिक्री होती है। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर न मिलने पर उन्होंने अब लकड़ी और टिकली का कोयले की भट्ठी लगा ली है। हालांकि इसमें लागत अधिक पड़ रही है लेकिन काम तो करना ही है। गली मोहल्ले में चाय आदि की दुकान चलाने वाले लोगों की भी यही स्थिति है। नगर के विवेक कुमार कहना है कि उन्होंने चाय बनाने का काम बंद कर दिया है। मोहल्ला वाड़बान स्थित चाय की दुकान संचालक राजीव ने बताया कि अब कोयले की भट्ठी पर चाय बनानी पड़ रही है। सामान बनाने में लागत बढ़ रही है। ग्राहक बढ़े दाम देने को तैयार नहीं है। इससे दुकानदारी प्रभावित हो रही है।
एआरओ आलोक कुमार वशिष्ठ का कहना है कि सिलिंडरों की मांग की गई है। सिलिंडरों की आवक होने से सभी की समस्या का निदान हो जाएगा।

बिजनौर में दीप डेयरी पर डीजल की भट्टी पर काम करता कारीगार। संवाद