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Bijnor News: राजनीति की चाशनी ने बढ़ा दी गन्ने की मिठास
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ब्रजवीर चाैधरी
बिजनौर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गन्ना केवल एक फसल नहीं, बल्कि सबसे प्रभावशाली चुनावी और आर्थिक मुद्दा भी है। यही वजह है कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, क्षेत्र की किसी भी बड़ी राजनीतिक सभा में गन्ना और किसान चर्चा के केंद्र में रहते हैं। शुक्रवार को बिजनौर में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी किसानों को साधने के लिए अपने भाषण में कई बार गन्ना, किसान और गन्ना भुगतान का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें गन्ना पसंद है और उनकी सरकार ने किसानों को बेहतर गन्ना मूल्य के साथ समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया है। मुख्यमंत्री के भाषण में जैसे ही गन्ने की बात आई, सभा में मौजूद किसानों ने तालियों से स्वागत किया। दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों गन्ने के इर्द-गिर्द घूमती हैं। गन्ना यहां किसानों की सबसे बड़ी नकदी फसल है और इसका सीधा असर गांवों की आर्थिक गतिविधियों से लेकर चुनावी समीकरणों तक दिखाई देता है। गन्ने की मिठास केवल चीनी मिलों तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की रणनीति का भी अहम हिस्सा बन चुकी है।
बिजनौर जिले में 2.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। फसल की पेराई के लिए जिले में 10 चीनी मिलें तथा 100 से अधिक क्रेशर और पावर कोल्हू संचालित हैं। वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र में जिले की चीनी मिलों ने 908.35 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की, जिसकी कीमत 3574.30 करोड़ रुपये है। यही वजह है कि बिजनौर ही नहीं, पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का मुद्दा हर चुनाव और हर राजनीतिक मंच पर सबसे अहम विषय बना रहता है।
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बिजनौर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गन्ना केवल एक फसल नहीं, बल्कि सबसे प्रभावशाली चुनावी और आर्थिक मुद्दा भी है। यही वजह है कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, क्षेत्र की किसी भी बड़ी राजनीतिक सभा में गन्ना और किसान चर्चा के केंद्र में रहते हैं। शुक्रवार को बिजनौर में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी किसानों को साधने के लिए अपने भाषण में कई बार गन्ना, किसान और गन्ना भुगतान का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें गन्ना पसंद है और उनकी सरकार ने किसानों को बेहतर गन्ना मूल्य के साथ समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया है। मुख्यमंत्री के भाषण में जैसे ही गन्ने की बात आई, सभा में मौजूद किसानों ने तालियों से स्वागत किया। दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों गन्ने के इर्द-गिर्द घूमती हैं। गन्ना यहां किसानों की सबसे बड़ी नकदी फसल है और इसका सीधा असर गांवों की आर्थिक गतिविधियों से लेकर चुनावी समीकरणों तक दिखाई देता है। गन्ने की मिठास केवल चीनी मिलों तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की रणनीति का भी अहम हिस्सा बन चुकी है।
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बिजनौर जिले में 2.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। फसल की पेराई के लिए जिले में 10 चीनी मिलें तथा 100 से अधिक क्रेशर और पावर कोल्हू संचालित हैं। वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र में जिले की चीनी मिलों ने 908.35 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की, जिसकी कीमत 3574.30 करोड़ रुपये है। यही वजह है कि बिजनौर ही नहीं, पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का मुद्दा हर चुनाव और हर राजनीतिक मंच पर सबसे अहम विषय बना रहता है।
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