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Budaun News: दहेज हत्या में आरोपी दोषमुक्त, छह गवाहों पर दर्ज होगा फौजदारी वाद
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बदायूं। अपर जिला न्यायाधीश कु. रिंकू की कोर्ट ने दहेज हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी धर्मेंद्र पुत्र करन सिंह निवासी ग्राम बरवारा, थाना उघैती को संदेह का लाभ मिलने पर दोषमुक्त कर दिया। साथ ही कोर्ट ने प्रकरण में झूठी गवाही देने वाले छह गवाहों को पक्षद्रोही साक्षी घोषित किया और गवाहों के विरुद्ध फौजदारी वाद दर्ज कर स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
थाना सहसवान क्षेत्र के ग्राम तिगरा निवासी लीलाधर पुत्र सियाराम ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि 27 जून 2016 को भतीजी रूबी की शादी में दो लाख नगद, बाइक सहित घरेलू सामान दिया था, लेकिन दामाद धर्मेंद्र पुत्र करन सिंह निवासी ग्राम बरवारा, थाना उघैती और उनके परिजन खुश नहीं थे।
आरोपियों ने भतीजी से सोने की चेन व अंगूठी की मांग की तो उसने मना कर दिया। आरोप था कि 8 सितंबर 2016 को घर बंद कर आग लगा दी गई। सूचना पर वे पहुंचे तो घर में कोई नहीं मिला। उन्हें मालूम हुआ कि भतीजी की मौत हो चुकी है। पुलिस ने धर्मेंद्र सहित अन्य के खिलाफ दहेज हत्या सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना कर आरोपी धर्मेंद्र के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया।
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कोर्ट ने सुनवाई कर दोनों पक्षों को सुना। आदेश में कोर्ट ने कहा है कि विवेचना एवं पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक एवं अभिलेखीय साक्ष्य व पक्षकारों के तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय का यह कहना है कि अभियोजन पक्ष आरोपी धर्मेंद्र के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। आरोप से संदेह का लाभ देते हुए आरोपी दोषमुक्त करने योग्य है।
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थाना सहसवान क्षेत्र के ग्राम तिगरा निवासी लीलाधर पुत्र सियाराम ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि 27 जून 2016 को भतीजी रूबी की शादी में दो लाख नगद, बाइक सहित घरेलू सामान दिया था, लेकिन दामाद धर्मेंद्र पुत्र करन सिंह निवासी ग्राम बरवारा, थाना उघैती और उनके परिजन खुश नहीं थे।
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आरोपियों ने भतीजी से सोने की चेन व अंगूठी की मांग की तो उसने मना कर दिया। आरोप था कि 8 सितंबर 2016 को घर बंद कर आग लगा दी गई। सूचना पर वे पहुंचे तो घर में कोई नहीं मिला। उन्हें मालूम हुआ कि भतीजी की मौत हो चुकी है। पुलिस ने धर्मेंद्र सहित अन्य के खिलाफ दहेज हत्या सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना कर आरोपी धर्मेंद्र के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया।
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कोर्ट ने सुनवाई कर दोनों पक्षों को सुना। आदेश में कोर्ट ने कहा है कि विवेचना एवं पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक एवं अभिलेखीय साक्ष्य व पक्षकारों के तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय का यह कहना है कि अभियोजन पक्ष आरोपी धर्मेंद्र के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। आरोप से संदेह का लाभ देते हुए आरोपी दोषमुक्त करने योग्य है।