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Budaun News: अमर ज्योति कंपनी के पीड़ित वकीलों से भरवाए फॉर्म, हजारों को रकम मिलने की उम्मीद बंधी
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बदायूं पहुंची आईआरपी बीनू डॉल अधिवक्ता से साक्षा करती जानकारी। संवाद
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बदायूं। धनराशि डबल करने का लालच देकर जिलेभर में करीब दो हजार पीड़ितों से करोड़ों रुपये की धनराशि निवेश कराकर हड़पने वाली अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके साथ शनिवार दोपहर अमर ज्योति के केस में नियुक्त अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) बीनू डॉल टीम के साथ बदायूं पहुंचीं। उन्होंने बार एसोसिएशन के सभागार में अधिवक्ताओं से निवेश करने के संबंध में जानकारी ली और अधिवक्ताओं को अपने दावे प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित फॉर्म भी वितरित किए। इससे उन्हें रकम मिलने की उम्मीद बंधी है।
आईआरपी ने पीड़ित वकीलों और संबंधित हितधारकों से अपने दावे समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने की अपील की। उन्होंने तमाम अधिवक्ताओं से निर्धारित प्रारूप में फॉर्म भरवाकर सभागार में ही जमा कराए। आईआरपी ने कहा कि जो भी कंपनी पर अपनी लेनदारी प्रस्तुत करना चाहता है वह कार्यालय से फॉर्म लेने के साथ उसे भरकर दावा प्रस्तुत कर सकता है।
दावा प्रस्तुत करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को निर्धारित फॉर्म के सभी कॉलम सावधानीपूर्वक भरने होंगे। दावे के समर्थन में आवश्यक प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां संलग्न कर हस्ताक्षरित दावा पत्र ई-मेल के माध्यम से भेजना होगा। भेजे गए दस्तावेजों की एक प्रति अपने पास सुरक्षित रखने की भी सलाह दी।
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आईआरपी ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त दावों की जांच उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद दावा स्वीकार या अस्वीकार करने की सूचना संबंधित पक्ष को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत प्रत्येक दावे और दस्तावेज का गहन परीक्षण आवश्यक है। गौरतलब है कि पिछले दिनों कंपनी के कार्यालय पर दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने का नोटिस चस्पा किया गया।
कंपनी की जमीन, भवन, बैंक खातों, निवेश आदि की जानकारी करें साझा
आईआरपी ने आठ पेज के फॉर्म में दर्ज कॉलमों को भरने के लिए विस्तार से जानकारी दी। दिवाला और शोधन अक्षमता (कॉरपोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया) विनियम 2016 के विनियम 8 ए के अंतर्गत जारी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास कंपनी की जमीन, भवन, बैंक खातों, निवेश, दस्तावेज, धनराशि अथवा अन्य परिसंपत्तियों के संबंध में विश्वसनीय जानकारी है तो उसे साझा करें। कंपनी के वर्तमान या पूर्व अधिकारियों एवं निदेशकों के ठिकाने, संपर्क संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। आईआरपी ने बताया कि ऐसी सूचनाएं कंपनी की संपत्तियों की पहचान, सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ दिवाला समाधान प्रक्रिया को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कंपनी के कार्यालय पहुंची टीम को झेलना पड़ा विरोध
शनिवार शाम को आईआरपी अपनी टीम के साथ जोगीपुरा स्थित अमर ज्योति निधि लिमिटेड कंपनी के कार्यालय पहुंचीं तो आईआरपी बीनू डॉल और उनकी टीम को स्थानीय निवेशकों के विरोध का सामना करना पड़ा। निवेशकों की ओर से उनके साथ धोखा करने और निवेश के नाम पर उनके लाखों रुपये लेकर भागे कंपनी संचालकों से अपने रुपयों को वापस दिलाने की मांग की। टीम ने उन्हें प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी। गौरतलब है कि कंपनी के निदेशक बरेली के कटरा चांद निवासी शशिकांत मौर्य, सूर्यकांत मौर्य और श्रीकांत मौर्य आदि ने ठगी की थी। इनके विरुद्ध बदायूं, बरेली सहित कई थानों में केस दर्ज हैं।
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आईआरपी ने पीड़ित वकीलों और संबंधित हितधारकों से अपने दावे समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने की अपील की। उन्होंने तमाम अधिवक्ताओं से निर्धारित प्रारूप में फॉर्म भरवाकर सभागार में ही जमा कराए। आईआरपी ने कहा कि जो भी कंपनी पर अपनी लेनदारी प्रस्तुत करना चाहता है वह कार्यालय से फॉर्म लेने के साथ उसे भरकर दावा प्रस्तुत कर सकता है।
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दावा प्रस्तुत करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को निर्धारित फॉर्म के सभी कॉलम सावधानीपूर्वक भरने होंगे। दावे के समर्थन में आवश्यक प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां संलग्न कर हस्ताक्षरित दावा पत्र ई-मेल के माध्यम से भेजना होगा। भेजे गए दस्तावेजों की एक प्रति अपने पास सुरक्षित रखने की भी सलाह दी।
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आईआरपी ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त दावों की जांच उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद दावा स्वीकार या अस्वीकार करने की सूचना संबंधित पक्ष को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत प्रत्येक दावे और दस्तावेज का गहन परीक्षण आवश्यक है। गौरतलब है कि पिछले दिनों कंपनी के कार्यालय पर दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने का नोटिस चस्पा किया गया।
कंपनी की जमीन, भवन, बैंक खातों, निवेश आदि की जानकारी करें साझा
आईआरपी ने आठ पेज के फॉर्म में दर्ज कॉलमों को भरने के लिए विस्तार से जानकारी दी। दिवाला और शोधन अक्षमता (कॉरपोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया) विनियम 2016 के विनियम 8 ए के अंतर्गत जारी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास कंपनी की जमीन, भवन, बैंक खातों, निवेश, दस्तावेज, धनराशि अथवा अन्य परिसंपत्तियों के संबंध में विश्वसनीय जानकारी है तो उसे साझा करें। कंपनी के वर्तमान या पूर्व अधिकारियों एवं निदेशकों के ठिकाने, संपर्क संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। आईआरपी ने बताया कि ऐसी सूचनाएं कंपनी की संपत्तियों की पहचान, सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ दिवाला समाधान प्रक्रिया को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कंपनी के कार्यालय पहुंची टीम को झेलना पड़ा विरोध
शनिवार शाम को आईआरपी अपनी टीम के साथ जोगीपुरा स्थित अमर ज्योति निधि लिमिटेड कंपनी के कार्यालय पहुंचीं तो आईआरपी बीनू डॉल और उनकी टीम को स्थानीय निवेशकों के विरोध का सामना करना पड़ा। निवेशकों की ओर से उनके साथ धोखा करने और निवेश के नाम पर उनके लाखों रुपये लेकर भागे कंपनी संचालकों से अपने रुपयों को वापस दिलाने की मांग की। टीम ने उन्हें प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी। गौरतलब है कि कंपनी के निदेशक बरेली के कटरा चांद निवासी शशिकांत मौर्य, सूर्यकांत मौर्य और श्रीकांत मौर्य आदि ने ठगी की थी। इनके विरुद्ध बदायूं, बरेली सहित कई थानों में केस दर्ज हैं।

बदायूं पहुंची आईआरपी बीनू डॉल अधिवक्ता से साक्षा करती जानकारी। संवाद