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Budaun News: शहर की महायोजना में 25 गांव फिर भी सुविधाएं गांव जैसी ही
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शहर का छ: सड़का मार्ग बाजार। संवाद
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बदायूं। शहर की महायोजना लागू होने के बाद सटे 25 गांव शहरी क्षेत्र का हिस्सा घोषित हो चुके हैं। इन इलाकों में जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं, कॉलोनियां बस रही हैं, बाजार विकसित हो रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि ये गांव नगर पालिका सीमा में शामिल नहीं हो सके हैं। यही कारण है कि इन 25 गांवों की आबादी अब तक शहरी आबादी का हिस्सा नहीं बन सकी है।
शहर के सुनियोजित विकास के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर नगर पालिका क्षेत्र से सटे 25 गांवों को विनियमित क्षेत्र घोषित किया था। उद्देश्य था कि भूमि का अव्यवस्थित बंटवारा रोका जाए, अनियोजित निर्माण पर अंकुश लगे और बदायूं का विकास तयशुदा महायोजना के तहत हो। इस बीच इन इलाकों में बड़े पैमाने पर प्लाटिंग, आवासीय कॉलोनियों, शोरूम, निजी अस्पताल, स्कूल और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का विकास हो रहा है। जमीनों के रेट शहर के कई मोहल्लों से ज्यादा हो गए हैं।
नगर पालिका में शामिल न होने के कारण इन क्षेत्रों में न समुचित जल निकासी है, न स्थायी सफाई व्यवस्था, न नियमित कूड़ा उठान, न पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और न ही सुनियोजित सड़क नेटवर्क। निर्माण कार्य बिना ठोस नियंत्रण के हो रहा है, जिससे बदायूं का भविष्य का शहरी ढांचा अव्यवस्थित होता जा रहा है।
ये गांव किए गए हैं विनियमित क्षेत्र में शामिल
भगवतीपुर, सिरसाठेर, आरिफपुर नवादा, खेड़ा बुजुर्ग, चन्दन नगर, बाकरपुर खण्डोर, बहेरिया, अतापुर मझिया, नगला शर्की, नरऊ खुर्द, पडौआ, रसूलपुर विल्हारी, नरऊ बुजुर्ग, मौजमपुर नेहनगर, मुजाहिदपुर, शेखूपुर, नौशेरा, मीरापट्टी, नेकपुर, बहेड़ी, बदायूं ग्रामीण, अकरामनगर गढ़ी, सलारपुर, आलमपुर आदि गांव शहरीकरण के दायरे में आ गए है।
शहर बन गए, पर अधिकार नहीं मिले
इन गांवों में नगर पालिका जैसी सफाई व्यवस्था नहीं, नियमित जलापूर्ति व सीवर सिस्टम का अभाव, सड़कें संकरी हैं। अतिक्रमण बेतरतीब होने के साथ स्ट्रीट लाइटें नाकाफी, अवैध कॉलोनियों की बाढ़, विकास कार्यों में कोई एक जिम्मेदार संस्था नहीं है।
खेत रातोंरात प्लॉट में बदल गए
इन 25 गांवों में आज अवैध कॉलोनियों की भरमार है। खेत रातोंरात प्लॉट में बदल गए। जमीन के रेट शहर के पॉश इलाकों को टक्कर देने लगे। नगर पालिका सीमा में शामिल न होने से यहां संसाधनों का अभाव है।
25 गांव महायोजना 2031 के तहत शहरी क्षेत्र का हिस्सा बन गए हैं। इन गांवों को नगर पालिका में शामिल कराने की भी प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए नगर पालिका बदायूं के सीमा विस्तार का भी प्रयास चल रहा है। यदि यह गांव नगर पालिका में शामिल हो जाएंगे तो इनमें मूलभूत सुविधाएं भी बेहतर हो सकेंगी। - सुरेश पाल सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
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नगर पालिका में शामिल न होने के कारण इन क्षेत्रों में न समुचित जल निकासी है, न स्थायी सफाई व्यवस्था, न नियमित कूड़ा उठान, न पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और न ही सुनियोजित सड़क नेटवर्क। निर्माण कार्य बिना ठोस नियंत्रण के हो रहा है, जिससे बदायूं का भविष्य का शहरी ढांचा अव्यवस्थित होता जा रहा है।
ये गांव किए गए हैं विनियमित क्षेत्र में शामिल
भगवतीपुर, सिरसाठेर, आरिफपुर नवादा, खेड़ा बुजुर्ग, चन्दन नगर, बाकरपुर खण्डोर, बहेरिया, अतापुर मझिया, नगला शर्की, नरऊ खुर्द, पडौआ, रसूलपुर विल्हारी, नरऊ बुजुर्ग, मौजमपुर नेहनगर, मुजाहिदपुर, शेखूपुर, नौशेरा, मीरापट्टी, नेकपुर, बहेड़ी, बदायूं ग्रामीण, अकरामनगर गढ़ी, सलारपुर, आलमपुर आदि गांव शहरीकरण के दायरे में आ गए है।
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इन गांवों में नगर पालिका जैसी सफाई व्यवस्था नहीं, नियमित जलापूर्ति व सीवर सिस्टम का अभाव, सड़कें संकरी हैं। अतिक्रमण बेतरतीब होने के साथ स्ट्रीट लाइटें नाकाफी, अवैध कॉलोनियों की बाढ़, विकास कार्यों में कोई एक जिम्मेदार संस्था नहीं है।
खेत रातोंरात प्लॉट में बदल गए
इन 25 गांवों में आज अवैध कॉलोनियों की भरमार है। खेत रातोंरात प्लॉट में बदल गए। जमीन के रेट शहर के पॉश इलाकों को टक्कर देने लगे। नगर पालिका सीमा में शामिल न होने से यहां संसाधनों का अभाव है।
25 गांव महायोजना 2031 के तहत शहरी क्षेत्र का हिस्सा बन गए हैं। इन गांवों को नगर पालिका में शामिल कराने की भी प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए नगर पालिका बदायूं के सीमा विस्तार का भी प्रयास चल रहा है। यदि यह गांव नगर पालिका में शामिल हो जाएंगे तो इनमें मूलभूत सुविधाएं भी बेहतर हो सकेंगी। - सुरेश पाल सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
