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Budaun News: 28 साल पुराने अपहरण कांड में फैसला, दोषी को आजीवन कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:27 AM IST
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बदायूं। जिले के बहुचर्चित अपहरण मामले में करीब 28 वर्ष बाद अदालत ने बृहस्पतिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र रेखा शर्मा ने यह निर्णय सुनाया। साथ ही जुर्माने में से 20 हजार रुपये वादी को देने का आदेश भी दिया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी इतामुला ने 28 फरवरी 1998 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रात करीब एक बजे चार बदमाश उसके मकान की छत पर चढ़ आए। उस समय छत पर बने मढ़ैया में उसका पुत्र फिरोज, भतीजे जान मोहम्मद, कौशल अली, इंद्रेश, भांजा जाकिर व महबूब सो रहे थे। बदमाश यूकेलिप्टस की सीढ़ी लगाकर छत पर पहुंचे और लैंप की रोशनी में सभी को जगाकर फिरोज और शमशुल के बारे में पूछा। पहचान होने पर बदमाश फिरोज को जबरन अपने साथ ले गए, जबकि शमशुल को वहीं छोड़ दिया।
घटना के दौरान मौजूद परिजनों ने बदमाशों को स्पष्ट रूप से देख लिया था और पहचानने की बात कही थी। बाद में 15 अप्रैल 1998 को पुलिस ने सूचना पर गंगा कट्टी क्षेत्र में बनी एक झोंपड़ी में दबिश देकर अपहृत फिरोज को सकुशल ढूंढ लिया था।
इस मामले में आरोपी शिबू उर्फ साबिर पुत्र खैराती निवासी जोरी नगला, थाना कादरचौक के खिलाफ मुकदमा चला। न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, विशेष लोक अभियोजक और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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अपहरण व हत्या के प्रयास के दोषी को आजीवन कारावास
बदायूं। थाना कादरचौक में वर्ष 1998 में दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों में अदालत ने फैसला सुनाते हुए आरोपी रामप्रकाश पुत्र जागन निवासी गंजडुंडवारा (एटा) को कड़ी सजा दी है। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र रेखा शर्मा ने दोषी को अपहरण में आजीवन सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माना, हत्या के प्रयास में 10 वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा आर्म्स एक्ट में पांच वर्ष सश्रम कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। संवाद
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी इतामुला ने 28 फरवरी 1998 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रात करीब एक बजे चार बदमाश उसके मकान की छत पर चढ़ आए। उस समय छत पर बने मढ़ैया में उसका पुत्र फिरोज, भतीजे जान मोहम्मद, कौशल अली, इंद्रेश, भांजा जाकिर व महबूब सो रहे थे। बदमाश यूकेलिप्टस की सीढ़ी लगाकर छत पर पहुंचे और लैंप की रोशनी में सभी को जगाकर फिरोज और शमशुल के बारे में पूछा। पहचान होने पर बदमाश फिरोज को जबरन अपने साथ ले गए, जबकि शमशुल को वहीं छोड़ दिया।
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घटना के दौरान मौजूद परिजनों ने बदमाशों को स्पष्ट रूप से देख लिया था और पहचानने की बात कही थी। बाद में 15 अप्रैल 1998 को पुलिस ने सूचना पर गंगा कट्टी क्षेत्र में बनी एक झोंपड़ी में दबिश देकर अपहृत फिरोज को सकुशल ढूंढ लिया था।
इस मामले में आरोपी शिबू उर्फ साबिर पुत्र खैराती निवासी जोरी नगला, थाना कादरचौक के खिलाफ मुकदमा चला। न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, विशेष लोक अभियोजक और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अपहरण व हत्या के प्रयास के दोषी को आजीवन कारावास
बदायूं। थाना कादरचौक में वर्ष 1998 में दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों में अदालत ने फैसला सुनाते हुए आरोपी रामप्रकाश पुत्र जागन निवासी गंजडुंडवारा (एटा) को कड़ी सजा दी है। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र रेखा शर्मा ने दोषी को अपहरण में आजीवन सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माना, हत्या के प्रयास में 10 वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा आर्म्स एक्ट में पांच वर्ष सश्रम कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। संवाद