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Budaun News: पिता का उठा साया तो मां ने संभाली जिम्मेदारी
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श्वेता को मिठाई खिलातीं हुई मां कोमल। संवाद
- फोटो : इंटरमीडिएट में 89.80 प्रतिशत अंक पाकर जिले में पांचवें स्थान पर रहे धनीराम को मिठाई खिलाते प्रबंधक।
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बदायूं। कहते हैं कि जो ठान ले उसे कोई भी परिस्थिति भी ढिगा नहीं सकती। ऐसी ही कहानी है हाईस्कूल में 95 फीसदी अंकों के साथ जनपद टॉप करने वाली श्वेता की। श्वेता ने कठिन संघर्षों के बीच अपनी पढ़ाई को जारी रखकर यह मुकाम हासिल किया, जिससे कॉलेज की शिक्षिकाओं से लेकर अब हर कोई उनका मुरीद हो गया है।
केदारनाथ महिला इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली श्वेता आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती है। वह एक भाई और दो बहनें हैं। श्वेता पढ़ने में शुरू से मेधावी थी, जिसका उसके पिता को भी गर्व था। 2024 में श्वेता के पिता मुकेश की तेज बुखार आने से मौत हो गई थी। इससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया।
पिता का साया उठने के बाद वह परेशान थी, लेकिन उनकी मां कोमल और शिक्षिकाओं ने हौसला कम नहीं होने दिया। पिता के जाने के बाद मां ने बच्चों के पढ़ाने के लिए शहर प्राथमिक विद्यालय नवादा में रसोईये का काम करना शुरू कर दिया। इससे उनकी दिक्कतें कुछ कम हुईं। इसके बाद लगातार पढ़ाई को जारी रखते हुए आज जिले में टॉप कर अपने परिवार और कॉलेज का नाम रोशन किया।
मां बोली- बहुत-बहुत खुशी हुई
श्वेता की मां कोमल ने बताया ने उनके तीन बच्चे हैं। सबसे बढ़ी स्वेता है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी शुरू से ही पढ़ने में होशियार थी। यह तो पता था कि बेटी अच्छे नंबर लाएग, लेकिन उसने जिला टॉप करके बहुत-बहुत खुशी दी है। पति के बारे में पूछने पर बताया कि वह मजदूरी करते थे। दो साल पहले तेज बुखार से उनकी मौत हो गई। इससे परिवार की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है। उसके बाद परिवार के लोगों ने सहारा दिया। बाद में मैंने रसोइये की नौकरी करना शुरू कर दिया।
मां-भाई ने दी ट्यूशन तो शामिल हुए जिले के टॉप टेन में
बदायूं। द्रोपदी देवी इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले मलगांव के कार्तिक ने हाईस्कूल में जिले में 93.7 फीसदी अकों के साथ जिले में सातवां स्थान हासिल किया। कार्तिक ने बताया कि उनकी मां पूर्णिमा गांव में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। इसलिए वह उन्हीं के पास बैठकर ट्यूशन पढ़ते थे। गणित की ट्यूशन उन्होंने अपने बड़े भाई कनिष्क से ली, जिसकी वजह से वह जिले के टॉप टेन की सूची में शामिल हुए। कार्तिक ने बताया उन्हें इंजीनियर बनना है। इसके लिए वह इंटर में गणित को मुख्य विषयों में रखेंगे। हाईस्कूल में अच्छे अंक आने के बाद उनका है हौसला बुलंद है।
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पिता का साया उठने के बाद वह परेशान थी, लेकिन उनकी मां कोमल और शिक्षिकाओं ने हौसला कम नहीं होने दिया। पिता के जाने के बाद मां ने बच्चों के पढ़ाने के लिए शहर प्राथमिक विद्यालय नवादा में रसोईये का काम करना शुरू कर दिया। इससे उनकी दिक्कतें कुछ कम हुईं। इसके बाद लगातार पढ़ाई को जारी रखते हुए आज जिले में टॉप कर अपने परिवार और कॉलेज का नाम रोशन किया।
मां बोली- बहुत-बहुत खुशी हुई
श्वेता की मां कोमल ने बताया ने उनके तीन बच्चे हैं। सबसे बढ़ी स्वेता है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी शुरू से ही पढ़ने में होशियार थी। यह तो पता था कि बेटी अच्छे नंबर लाएग, लेकिन उसने जिला टॉप करके बहुत-बहुत खुशी दी है। पति के बारे में पूछने पर बताया कि वह मजदूरी करते थे। दो साल पहले तेज बुखार से उनकी मौत हो गई। इससे परिवार की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है। उसके बाद परिवार के लोगों ने सहारा दिया। बाद में मैंने रसोइये की नौकरी करना शुरू कर दिया।
मां-भाई ने दी ट्यूशन तो शामिल हुए जिले के टॉप टेन में
बदायूं। द्रोपदी देवी इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले मलगांव के कार्तिक ने हाईस्कूल में जिले में 93.7 फीसदी अकों के साथ जिले में सातवां स्थान हासिल किया। कार्तिक ने बताया कि उनकी मां पूर्णिमा गांव में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। इसलिए वह उन्हीं के पास बैठकर ट्यूशन पढ़ते थे। गणित की ट्यूशन उन्होंने अपने बड़े भाई कनिष्क से ली, जिसकी वजह से वह जिले के टॉप टेन की सूची में शामिल हुए। कार्तिक ने बताया उन्हें इंजीनियर बनना है। इसके लिए वह इंटर में गणित को मुख्य विषयों में रखेंगे। हाईस्कूल में अच्छे अंक आने के बाद उनका है हौसला बुलंद है।

श्वेता को मिठाई खिलातीं हुई मां कोमल। संवाद- फोटो : इंटरमीडिएट में 89.80 प्रतिशत अंक पाकर जिले में पांचवें स्थान पर रहे धनीराम को मिठाई खिलाते प्रबंधक।

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