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जीएसटी स्कैम प्रकरण : डिजिटल फुटप्रिंट ने खोली थीं फर्जीवाड़े की परतें

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 10:35 PM IST
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GST scam case: Digital footprints exposed the layers of fraud
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बुलंदशहर। प्रदेश के बड़े जीएसटी फर्जीवाड़े में से एक का शुक्रवार को पर्दाफाश किया था। इसमें जीएसटी की विशेष अनुसंधान इकाई (एसआईबी) ने बड़ी भूमिका निभाई है। कागजों पर करोड़ों का माल और सेवा दिखाकर 1.22 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी डकारने के मामले में पुलिस ने एक महिला समेत तीन को गिरफ्तार किया था। आरोपियों को शनिवार को जेल भेज दिया गया। इनको दबोचने में जीएसटी आयुक्त डॉ. नितिन बंसल के दिशा-निर्देशों पर रणनीति बनाई गई थी।
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जीएसटी अधिकारियों ने बताया कि मामले की जड़ें 3 दिसंबर को पड़ी छापेमारी से जुड़ी हैं। संयुक्त आयुक्त डॉ. शिव आसरे सिंह के निर्देशन में उपायुक्त एसआईबी जयंत कुमार सिंह की टीम ने तनु इंटरप्राइजेज नामक फर्म पर शिकंजा कसा था। यह फर्म मैनपावर सप्लाई के नाम पर पंजीकृत थी, लेकिन जीएसटीएन पोर्टल की निगरानी में सामने आया कि यह भवन निर्माण सामग्री की खरीद-फरोख्त दिखा रही है।
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अधिकारियों ने जब चेन एनालिसिस की, तो पता चला कि जिन फर्मों से माल खरीदना दिखाया गया, वे अस्तित्व में ही नहीं थीं। इसके बाद टीम ने जमीनी स्तर पर रेकी की। जिस पते पर दुकान दिखाई गई थी, वहां के भवन स्वामी ने किराएनामे को ही फर्जी बता दिया।
गवाहों ने भी लिखित में स्वीकार किया कि उनके हस्ताक्षर कूटरचित (फर्जी) हैं। जीएसटी विभाग ने पोर्टल के डिजिटल साक्ष्यों और भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट चोला पुलिस व साइबर सेल को सौंपी। 23 दिसंबर को दर्ज हुई एफआईआर के बाद शुक्रवार को पुलिस ने दबिश देकर तीनों आरोपियों को दबोच लिया। इनके पास से बरामद मोबाइल, आईपैड और लैपटॉप में फर्जीवाड़े के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। अभियुक्तों ने स्वीकार किया है कि वे केवल कागजों पर फर्जी बिल काटकर सरकार को चूना लगा रहे थे।



Iयह मामला विभाग की तकनीकी जांच और पुलिस समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। जिस तरह से डेटा का उपयोग कर फर्जीवाड़े की कड़ियां जोड़ी गईं, वह भविष्य की जांचों के लिए एक पाठ्यक्रम की तरह है। - जयंत कुमार सिंह, उपायुक्त एसआईबी, बुलंदशहरI
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