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Bulandshahar News: 23 साल बाद मिला न्याय, हत्या और लूट के दोषी को आजीवन कारावास
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बुलंदशहर। करीब 23 साल पुराने हत्या और लूट के एक मामले में न्यायालय एफटीसी प्रथम के न्यायाधीश हरिकेश कुमार ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जनपद हापुड़ के थाना हापुड़ क्षेत्र स्थित गांव हरद्वारीपुर निवासी अजय गौतम ने अपराध की इस पटकथा को अंजाम दिया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अभियुक्त ने थाना बीबीनगर क्षेत्र में मेरठ के थाना खरखौदा अंतर्गत गांव मवाना निवासी कलुआ के छोटे भाई की बीबीनगर थाना क्षेत्र में नृशंस हत्या कर दी थी। अजय गौतम ने युवक को गोली मारी और मौके से उसका जुगाड़ वाहन लूटकर फरार हो गया था।
वारदात के बाद 14 दिसंबर 2002 को थाना बीबीनगर में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए विवेचना पूरी की और 22 अप्रैल 2003 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अदालती कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान कुल सात गवाह पेश किए गए। इन गवाहों के बयान और साक्ष्यों ने कड़ियों को इस तरह जोड़ा कि अजय गौतम का बच निकलना नामुमकिन हो गया।
शुक्रवार को न्यायाधीश हरिकेश कुमार ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अजय गौतम को हत्या और लूट का दोषी माना। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, दोषी पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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जनपद हापुड़ के थाना हापुड़ क्षेत्र स्थित गांव हरद्वारीपुर निवासी अजय गौतम ने अपराध की इस पटकथा को अंजाम दिया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अभियुक्त ने थाना बीबीनगर क्षेत्र में मेरठ के थाना खरखौदा अंतर्गत गांव मवाना निवासी कलुआ के छोटे भाई की बीबीनगर थाना क्षेत्र में नृशंस हत्या कर दी थी। अजय गौतम ने युवक को गोली मारी और मौके से उसका जुगाड़ वाहन लूटकर फरार हो गया था।
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वारदात के बाद 14 दिसंबर 2002 को थाना बीबीनगर में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए विवेचना पूरी की और 22 अप्रैल 2003 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अदालती कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान कुल सात गवाह पेश किए गए। इन गवाहों के बयान और साक्ष्यों ने कड़ियों को इस तरह जोड़ा कि अजय गौतम का बच निकलना नामुमकिन हो गया।
शुक्रवार को न्यायाधीश हरिकेश कुमार ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अजय गौतम को हत्या और लूट का दोषी माना। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, दोषी पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
