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Bulandshahar News: आज से शुरू होगा सावन, तीन अगस्त को पड़ेगा पहला सोमवार
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गांव गंगेरूआ स्थित द्वादश महालिंगेश्वर सिद्ध महापीठ पर सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक के लि
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बुलंदशहर। सावन आज बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। इसके आगमन को लेकर जिले के प्रमुख शिवालयों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिरों को संवारा जा रहा है। श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह है। जिलेभर के मंदिरों में बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजेंगे। इस बार सावन 28 अगस्त तक रहेगा। चार सोमवार पड़ेंगे। सावन का पहला सोमवार तीन, दूसरा 10, तीसरा 17 और चौथा 24 अगस्त को पड़ेगा।
सावन के पहले सोमवार को सुबह चार बजे से ही शिवालयों के कपाट खोल दिए जाएंगे। श्रद्धालु भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा और बेर अर्पित कर विधिवत जलाभिषेक करेंगे। प्रशासन और मंदिर समितियों ने भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं।
जिले के प्रमुख शिव मंदिरों अहार के अंबकेश्वर महादेव मंदिर, शिकारपुर क्षेत्र के गांव बरासऊ स्थित बड़ा महादेव मंदिर, गांव गंगेरूआ स्थित द्वादश महालिंगेश्वर महादेव मंदिर समेत 250 से अधिक मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रहीं हैं। यहां पर जिले से ही नहीं बल्कि प्रदेश के दूसरे जिले और हरियाणा के फरीदाबाद व बल्लभगढ़ और दिल्ली से भी भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
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बाजारों में भी सावन की रौनक दिखाई देने लगी है। भगवा रंग की टी-शर्ट, पायजामे, गमछे और कांवड़ यात्रा से जुड़ी पूजा सामग्री की दुकानों पर खरीदारी बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी सावन और कांवड़ यात्रा को लेकर बाजारों में अच्छी रौनक देखने को मिल रही है। पंडित कैलाश शर्मा का कहना है कि इस बार सावन का माह बृहस्पतिवार से शुरू होने वाला है।
सावन के स्वागत की तैयारियां शिवालयों समेत जगह-जगह चल रही हैं। इसे भगवान शिव का प्रिय माह माना जाता है। सनातन धर्म में इसे भक्ति और ईश्वर से जुड़ाव का माह माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान की गई प्रत्येक प्रार्थना, अनुष्ठान, व्रत और जल अर्पण से हजार गुना फल मिलता है।
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अंबकेश्वर महादेव मंदिर की है दूर-दूर तक आस्था
अहार। गंगा किनारे स्थित अंबकेश्वर महादेव मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध में विजय पाने के लिए पांडवों ने कुंदनपुर वर्तमान अहार में गंगा किनारे स्थित इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया था। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का शिवलिंग पाताल लोक तक जुड़ा हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से जलाभिषेक करने मात्र से भोलेनाथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
मंदिर के पुजारी विक्रम गिरी ने बताया कि यह मंदिर बुलंदशहर जिला मुख्यालय से लगभग 45-50 किलोमीटर दूर अहार क्षेत्र में गंगा नदी के पावन तट पर स्थित है। मंदिर महाशिवरात्रि और शिवरात्रि के अवसर पर यहां तीन दिवसीय विशाल मेले का आयोजन होता है। इसमें दूर-दराज से हजारों शिवभक्त पैदल यात्रा करके जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
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सावन के पहले सोमवार को सुबह चार बजे से ही शिवालयों के कपाट खोल दिए जाएंगे। श्रद्धालु भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा और बेर अर्पित कर विधिवत जलाभिषेक करेंगे। प्रशासन और मंदिर समितियों ने भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं।
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जिले के प्रमुख शिव मंदिरों अहार के अंबकेश्वर महादेव मंदिर, शिकारपुर क्षेत्र के गांव बरासऊ स्थित बड़ा महादेव मंदिर, गांव गंगेरूआ स्थित द्वादश महालिंगेश्वर महादेव मंदिर समेत 250 से अधिक मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रहीं हैं। यहां पर जिले से ही नहीं बल्कि प्रदेश के दूसरे जिले और हरियाणा के फरीदाबाद व बल्लभगढ़ और दिल्ली से भी भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
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बाजारों में भी सावन की रौनक दिखाई देने लगी है। भगवा रंग की टी-शर्ट, पायजामे, गमछे और कांवड़ यात्रा से जुड़ी पूजा सामग्री की दुकानों पर खरीदारी बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी सावन और कांवड़ यात्रा को लेकर बाजारों में अच्छी रौनक देखने को मिल रही है। पंडित कैलाश शर्मा का कहना है कि इस बार सावन का माह बृहस्पतिवार से शुरू होने वाला है।
सावन के स्वागत की तैयारियां शिवालयों समेत जगह-जगह चल रही हैं। इसे भगवान शिव का प्रिय माह माना जाता है। सनातन धर्म में इसे भक्ति और ईश्वर से जुड़ाव का माह माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान की गई प्रत्येक प्रार्थना, अनुष्ठान, व्रत और जल अर्पण से हजार गुना फल मिलता है।
अंबकेश्वर महादेव मंदिर की है दूर-दूर तक आस्था
अहार। गंगा किनारे स्थित अंबकेश्वर महादेव मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध में विजय पाने के लिए पांडवों ने कुंदनपुर वर्तमान अहार में गंगा किनारे स्थित इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया था। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का शिवलिंग पाताल लोक तक जुड़ा हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से जलाभिषेक करने मात्र से भोलेनाथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
मंदिर के पुजारी विक्रम गिरी ने बताया कि यह मंदिर बुलंदशहर जिला मुख्यालय से लगभग 45-50 किलोमीटर दूर अहार क्षेत्र में गंगा नदी के पावन तट पर स्थित है। मंदिर महाशिवरात्रि और शिवरात्रि के अवसर पर यहां तीन दिवसीय विशाल मेले का आयोजन होता है। इसमें दूर-दराज से हजारों शिवभक्त पैदल यात्रा करके जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।