{"_id":"6a78e0ea2f6d05bff00613d8","slug":"the-issue-of-tribal-rights-resonated-in-chandauli-on-world-tribal-day-chandauli-news-c-189-1-svns1010-152730-2026-08-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandauli News: विश्व आदिवासी दिवस पर चंदौली में गूंजा आदिवासी अधिकारों का मुद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandauli News: विश्व आदिवासी दिवस पर चंदौली में गूंजा आदिवासी अधिकारों का मुद्दा
विज्ञापन
चकिया तिराहे से जुलूस निकालते आदिवासी समाज के लोग। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीडीडीयू नगर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को नगर में आदिवासी व मूल निवासी समाज की ओर से जुलूस निकाला गया। सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में हाथों में तीर-धनुष और आदिवासी झंडे लेकर निकले। जुलूस के दौरान जल-जंगल-जमीन, वनाधिकार और संवैधानिक अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद की गई। नगर भ्रमण के बाद जुलूस सुभाष पार्क पहुंचा। जहां सभा का आयोजन किया गया।
जुलूस को चकिया त्रिमुहानी से पूर्व सांसद रामकिशुन यादव, मुख्य अतिथि चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह के प्रतिनिधि बबलू सिंह और विधायक प्रभु नारायण यादव ने आदिवासी झंडा दिखाकर रवाना किया। इसके बाद जुलूस नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सुभाष पार्क पहुंचा। जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल रहे। आदिवासी वेशभूषा में सजे लोगों और पारंपरिक हथियारों के साथ निकले दल ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। नेतृत्व विजय गोंड, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव ने किया। सुभाष पार्क में आयोजित सभा में वक्ताओं ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और वनाधिकार कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में लंबे समय से निवास कर रहे गोंड, खरवार, चेरो, पनिका समेत अन्य जनजातीय समाज के लोगों को वनाधिकार कानून के तहत भूमि का अधिकार दिया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। इसके बावजूद आज भी समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी पड़ रही है। सरकार को वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की ओर से सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी गईं। इनमें प्रमुख रूप से चंदौली जिले का नाम आदिवासी वीरांगना महारानी दुर्गावती के नाम पर रखने, धानापुर शहीद उद्यान में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों विश्वनाथ गोंड, रामराज गोंड, रंगी गोंड और भंगी गोंड की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांगें शामिल रहीं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में अलग अनुसूचित जनजाति आयोग और अनुसूचित जनजाति वित्त विभाग के गठन की मांग की गई। चकिया तहसील स्थित दिलकुशा गेस्ट हाउस में मौजूद गोंडवाना राज्य चिह्न को संरक्षित करते हुए उसका जीर्णोद्धार कराने तथा चंदौली में जनजातीय संग्रहालय स्थापित करने की मांग भी उठाई गई। इस दौरान समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बृजेश गोंड, वाराणसी जिलाध्यक्ष अतुल गोंड, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी खरवार, टोनी खरवार, पंकज गोंड, प्रदेश सचिव छाया गोंड, संतोष गोंड, गुलाब गोंड, रमापति गोंड, पिंटू बाबा, संजीव गोंड, कांता गोंड, शैलेश गोंड, लक्ष्मण गोंड, मुन्ना गोंड प्रधान, पन्ना गोंड प्रधान, उपेंद्र गोंड और प्रतीक गोंड आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
जुलूस को चकिया त्रिमुहानी से पूर्व सांसद रामकिशुन यादव, मुख्य अतिथि चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह के प्रतिनिधि बबलू सिंह और विधायक प्रभु नारायण यादव ने आदिवासी झंडा दिखाकर रवाना किया। इसके बाद जुलूस नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सुभाष पार्क पहुंचा। जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल रहे। आदिवासी वेशभूषा में सजे लोगों और पारंपरिक हथियारों के साथ निकले दल ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। नेतृत्व विजय गोंड, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव ने किया। सुभाष पार्क में आयोजित सभा में वक्ताओं ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और वनाधिकार कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में लंबे समय से निवास कर रहे गोंड, खरवार, चेरो, पनिका समेत अन्य जनजातीय समाज के लोगों को वनाधिकार कानून के तहत भूमि का अधिकार दिया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। इसके बावजूद आज भी समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी पड़ रही है। सरकार को वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
विज्ञापन
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की ओर से सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी गईं। इनमें प्रमुख रूप से चंदौली जिले का नाम आदिवासी वीरांगना महारानी दुर्गावती के नाम पर रखने, धानापुर शहीद उद्यान में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों विश्वनाथ गोंड, रामराज गोंड, रंगी गोंड और भंगी गोंड की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांगें शामिल रहीं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में अलग अनुसूचित जनजाति आयोग और अनुसूचित जनजाति वित्त विभाग के गठन की मांग की गई। चकिया तहसील स्थित दिलकुशा गेस्ट हाउस में मौजूद गोंडवाना राज्य चिह्न को संरक्षित करते हुए उसका जीर्णोद्धार कराने तथा चंदौली में जनजातीय संग्रहालय स्थापित करने की मांग भी उठाई गई। इस दौरान समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बृजेश गोंड, वाराणसी जिलाध्यक्ष अतुल गोंड, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी खरवार, टोनी खरवार, पंकज गोंड, प्रदेश सचिव छाया गोंड, संतोष गोंड, गुलाब गोंड, रमापति गोंड, पिंटू बाबा, संजीव गोंड, कांता गोंड, शैलेश गोंड, लक्ष्मण गोंड, मुन्ना गोंड प्रधान, पन्ना गोंड प्रधान, उपेंद्र गोंड और प्रतीक गोंड आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन