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Chandauli News: खेत-सिवान तो कहीं गड्ढे मेंं बना दिया 30 कूड़ा घर, चार साल में एक बार भी नहीं पहुंचा कूड़ा
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इलिया के बनरसिया गांव में जलजमाव के बीच स्थित आरआरसी सेंटर। संवाद
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पीडीडीयू नगर। गांवों को कूड़ा मुक्त बनाने और ठोस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए सरकार की ओर से वर्ष 2022 में ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए कूड़ा निस्तारण केंद्र (आरसीसी) कई जगह खुद ही बदहाली का शिकार हो गए हैं। चंदौली में 30 से अधिक ग्राम पंचायतों में निर्माण के बाद कूड़ा निस्तारण केंद्रों का उपयोग ही शुरू नहीं हो सका है। कहीं केंद्र आबादी से सैकड़ों मीटर दूर सिवान में बना दिए गए हैं तो कहीं खेत के बीच।
कई केंद्र ऐसे स्थानों पर बनाए गए हैं, जहां पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। कुछ सेंटर बरसात में पानी से घिर जाते हैं तो कहीं निर्माण के बाद से एक बार भी कूड़ा नहीं पहुंचा है। कूड़ा निस्तारण केंद्रों में टिनशेड, जाली और वर्मी कंपोस्ट पिट आदि बनाकर स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर करने का दावा किया गया था। कई स्थानों पर बाकायदा ‘एक कदम स्वच्छता की ओर’ का बोर्ड भी लगा दिया गया, लेकिन वास्तविक स्थिति सरकारी दावों से बिल्कुल अलग है। निर्माण के बाद सफाईकर्मियों की नियमित तैनाती, घर-घर से कूड़ा उठाने और उसे पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था नहीं होने से लाखों रुपये की लागत से तैयार केंद्र खाली पड़े हैं। अब स्थिति यह है कि जिन गांवों को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए योजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए, उन्हीं गांवों में आज भी लोग कूड़ा इधर-उधर फेंकने को मजबूर हैं। कई सेंटरों में घास उग आई है तो कहीं बाउंड्रीवाल और दरवाजे टूटने लगे हैं। शहाबगंज विकासखंड के कलानी गांव में कूड़ा निस्तारण केंद्र आबादी से काफी दूर सिवान में बना दिया गया है। निर्माण के बाद से यहां कूड़ा डालने की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय से सेंटर का उपयोग नहीं हो रहा है। देखरेख के अभाव में इसकी बाउंड्रीवाल का एक हिस्सा गिर चुका है, जबकि दरवाजा भी टूटकर गायब हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव से कूड़ा उठाकर केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था ही नहीं है तो दूर सिवान में बनाए गए केंद्र का इस्तेमाल कैसे होगा। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से गांव में जगह-जगह गंदगी बनी रहती है।
नियामताबाद विकासखंड के रतनपुर भोजपुर गांव में कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए ऐसी जगह का चयन किया गया है, जहां साल में छह महीने से अधिक समय तक पानी भरा रहता है। रेलवे लाइन के किनारे गड्ढे में बनाए गए इस केंद्र तक पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक बरसात और बाढ़ के दौरान पूरा केंद्र पानी में डूब जाता है। करीब चार लाख रुपये की लागत से बने इस केंद्र में निर्माण के बाद से एक बार भी कूड़ा नहीं डाला गया। लाखों रुपये की लागत से बना यह केंद्र अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। शहाबगंज विकासखंड की कवलपुरवा ग्राम पंचायत में भी कूड़ा निस्तराण केंद्र गांव से बाहर सिवान में बना दिया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण के बाद यहां कूड़ा पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। केंद्र खाली पड़ा है और उसके आसपास घास उग आई है। दूसरी ओर गांव में कूड़ा निस्तारण की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि केंद्र आबादी के नजदीक और सुगम स्थान पर बनाया जाता तो इसका उपयोग किया जा सकता था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को कचरामुक्त बनाने की योजना चहनिया ब्लॉक में भी सवालों के घेरे में है। सोनहुला, खंडवारी, रामगढ़, दरियापुर, सराय और भलेहटा बलुआ ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन निर्माण के बाद से कई केंद्रों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। केंद्र गांव से करीब 500 मीटर दूर सिवान में बनाए गए हैं। वहां तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। गांव से कूड़ा उठाकर केंद्र तक पहुंचाने के लिए भी कोई नियमित व्यवस्था नहीं है। खंड विकास अधिकारी जावेद अख्तर ने बताया कि बारिश के कारण लोग कूड़ा घर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सफाईकर्मी की लापरवाही को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच कराकर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शहाबगंज विकासखंड के जिगना गांव में कूड़ा निस्तराण केंद्र खेत के बीच बना दिया गया है। केंद्र तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब कूड़ा लेकर केंद्र तक जाने का रास्ता ही नहीं है तो इसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। निर्माण के बाद से केंद्र अनुपयोगी पड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक स्थान चयन के समय यह नहीं देखा गया कि भविष्य में यहां कूड़ा कैसे पहुंचाया जाएगा। स्थिति यह है कि गांव में कूड़ा निस्तारण की समस्या बनी हुई है और लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया केंद्र बेकार पड़ा है। शहाबगंज विकासखंड के बनारसिया गांव में कड़ा निस्तारण केंद्र खेत के बीच बनाया गया है। बरसात के दिनों में केंद्र के चारों तरफ पानी भर जाता है। इससे वहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थान का चयन करते समय बरसात के दिनों की स्थिति को ध्यान में नहीं रखा गया। जब पानी भर जाता है तो ग्रामीणों के लिए कूड़ा लेकर केंद्र तक पहुंचना संभव नहीं होता। ऐसे में स्वच्छता के लिए बनाया गया केंद्र बारिश के मौसम में खुद ही पहुंच से दूर हो जाता है। एडीओ पंचायत अरविंद सिंह का कहना है कि ग्राम पंचायतों में राजस्व कर्मियों की ओर से जहां खाली जमीन उपलब्ध होने की जानकारी दी गई, वहां कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण कराया गया है। केंद्रों को उपयोग में लाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की है। यदि किसी ग्राम पंचायत में कूड़ा निस्तारण केंद्र का उपयोग नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कई केंद्र ऐसे स्थानों पर बनाए गए हैं, जहां पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। कुछ सेंटर बरसात में पानी से घिर जाते हैं तो कहीं निर्माण के बाद से एक बार भी कूड़ा नहीं पहुंचा है। कूड़ा निस्तारण केंद्रों में टिनशेड, जाली और वर्मी कंपोस्ट पिट आदि बनाकर स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर करने का दावा किया गया था। कई स्थानों पर बाकायदा ‘एक कदम स्वच्छता की ओर’ का बोर्ड भी लगा दिया गया, लेकिन वास्तविक स्थिति सरकारी दावों से बिल्कुल अलग है। निर्माण के बाद सफाईकर्मियों की नियमित तैनाती, घर-घर से कूड़ा उठाने और उसे पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था नहीं होने से लाखों रुपये की लागत से तैयार केंद्र खाली पड़े हैं। अब स्थिति यह है कि जिन गांवों को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए योजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए, उन्हीं गांवों में आज भी लोग कूड़ा इधर-उधर फेंकने को मजबूर हैं। कई सेंटरों में घास उग आई है तो कहीं बाउंड्रीवाल और दरवाजे टूटने लगे हैं। शहाबगंज विकासखंड के कलानी गांव में कूड़ा निस्तारण केंद्र आबादी से काफी दूर सिवान में बना दिया गया है। निर्माण के बाद से यहां कूड़ा डालने की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय से सेंटर का उपयोग नहीं हो रहा है। देखरेख के अभाव में इसकी बाउंड्रीवाल का एक हिस्सा गिर चुका है, जबकि दरवाजा भी टूटकर गायब हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव से कूड़ा उठाकर केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था ही नहीं है तो दूर सिवान में बनाए गए केंद्र का इस्तेमाल कैसे होगा। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से गांव में जगह-जगह गंदगी बनी रहती है।
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नियामताबाद विकासखंड के रतनपुर भोजपुर गांव में कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए ऐसी जगह का चयन किया गया है, जहां साल में छह महीने से अधिक समय तक पानी भरा रहता है। रेलवे लाइन के किनारे गड्ढे में बनाए गए इस केंद्र तक पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक बरसात और बाढ़ के दौरान पूरा केंद्र पानी में डूब जाता है। करीब चार लाख रुपये की लागत से बने इस केंद्र में निर्माण के बाद से एक बार भी कूड़ा नहीं डाला गया। लाखों रुपये की लागत से बना यह केंद्र अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। शहाबगंज विकासखंड की कवलपुरवा ग्राम पंचायत में भी कूड़ा निस्तराण केंद्र गांव से बाहर सिवान में बना दिया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण के बाद यहां कूड़ा पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। केंद्र खाली पड़ा है और उसके आसपास घास उग आई है। दूसरी ओर गांव में कूड़ा निस्तारण की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि केंद्र आबादी के नजदीक और सुगम स्थान पर बनाया जाता तो इसका उपयोग किया जा सकता था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को कचरामुक्त बनाने की योजना चहनिया ब्लॉक में भी सवालों के घेरे में है। सोनहुला, खंडवारी, रामगढ़, दरियापुर, सराय और भलेहटा बलुआ ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन निर्माण के बाद से कई केंद्रों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। केंद्र गांव से करीब 500 मीटर दूर सिवान में बनाए गए हैं। वहां तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। गांव से कूड़ा उठाकर केंद्र तक पहुंचाने के लिए भी कोई नियमित व्यवस्था नहीं है। खंड विकास अधिकारी जावेद अख्तर ने बताया कि बारिश के कारण लोग कूड़ा घर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सफाईकर्मी की लापरवाही को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच कराकर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शहाबगंज विकासखंड के जिगना गांव में कूड़ा निस्तराण केंद्र खेत के बीच बना दिया गया है। केंद्र तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब कूड़ा लेकर केंद्र तक जाने का रास्ता ही नहीं है तो इसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। निर्माण के बाद से केंद्र अनुपयोगी पड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक स्थान चयन के समय यह नहीं देखा गया कि भविष्य में यहां कूड़ा कैसे पहुंचाया जाएगा। स्थिति यह है कि गांव में कूड़ा निस्तारण की समस्या बनी हुई है और लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया केंद्र बेकार पड़ा है। शहाबगंज विकासखंड के बनारसिया गांव में कड़ा निस्तारण केंद्र खेत के बीच बनाया गया है। बरसात के दिनों में केंद्र के चारों तरफ पानी भर जाता है। इससे वहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थान का चयन करते समय बरसात के दिनों की स्थिति को ध्यान में नहीं रखा गया। जब पानी भर जाता है तो ग्रामीणों के लिए कूड़ा लेकर केंद्र तक पहुंचना संभव नहीं होता। ऐसे में स्वच्छता के लिए बनाया गया केंद्र बारिश के मौसम में खुद ही पहुंच से दूर हो जाता है। एडीओ पंचायत अरविंद सिंह का कहना है कि ग्राम पंचायतों में राजस्व कर्मियों की ओर से जहां खाली जमीन उपलब्ध होने की जानकारी दी गई, वहां कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण कराया गया है। केंद्रों को उपयोग में लाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की है। यदि किसी ग्राम पंचायत में कूड़ा निस्तारण केंद्र का उपयोग नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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