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Chitrakoot News: रासायनिक खाद ने बिगाड़ दी मिट्टी की उर्वरक क्षमता
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Tue, 24 Mar 2026 12:16 AM IST
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फोटो न- 23सीकेटीपी 13 कर्वी स्थित कृषि भवन में मिट्टी की जांच करता कर्मी। संवाद
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चित्रकूट। अधिक रासायनिक खाद के इस्तेमाल से धर्मनगरी की मिट्टी की सेहत बिगड़ गई है। हाल ही में सात हजार किसानों के खेतों की मिट्टी जांच में यह खुलासा हुआ है। मिट्टी में पोटाश और जीवाश्म की कमी मिली है। यह स्थिति उपज और उर्वरता के लिए चिंता का विषय है। जिससे किसानों को फसल की पैदावार में नुकसान हो सकता है।
जिला कृषि विभाग के मिट्टी परीक्षण लैब के वरिष्ठ शोध सहायक आनंद सेन ने बताया कि जिले की मिट्टी में एक हेक्टेयर के लिए 350 किग्रा पोटाश की आवश्यकता होती है। वर्तमान में यह मात्रा केवल 270 किग्रा है। इसी तरह कार्बनिक जीवाश्म की आवश्यक 375 किग्रा प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए, लेकिन यह 240 किग्रा ही पाया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिले की मिट्टी में फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन रासायनिक खाद का प्रयोग इसी तरह जारी रहा तो यह भी कम हो सकता है। पोटाश की कमी से फसल के पौधे ठीक से नहीं बढ़ते, फूल और फलों का विकास नहीं होता तथा दाना चमकदार नहीं होता। खरीफ की फसल में सात हजार किसानों के खेत की मिट्टी की जांच की गई थी, जबकि रबी की फसल के लिए तीन हजार का लक्ष्य रखा गया है। इसमें दो हजार जांचें पूरी हो चुकी हैं।
गनीवां कृषि फार्म के वैज्ञानिक मनोज शर्मा ने बताया कि भूमि में पोषक तत्व संतुलित मात्रा में होने चाहिए, क्योंकि किसी एक तत्व की कमी या अधिकता से फसल की पैदावार कम हो जाती है। प्रगतिशील किसानों योगेश जैन, शिवकुमार शुक्ला और रेवती रमण ने बताया कि मिट्टी की जांच कराने से उन्हें अपने खेतों की कमियों का पता चला कि उनकी मिट्टी में कौन सी कमी है।
इनसेट
मिट्टी जांच की प्रक्रिया
मिट्टी परीक्षण के लिए लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों से कुल आधा किग्रा मिट्टी निकाली जाती है। जिस स्थान से मिट्टी ली जाती है, वहां छह इंच गहराई और दो इंच चौड़ा गड्ढा होना चाहिए। इसके बाद मिट्टी को एक साफ कपड़े की थैली में रखकर कृषि विभाग स्थित लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। यह जांच किसानों को अपनी मिट्टी की स्थिति समझने में मदद करती है।
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कृषि अधिकारी की सलाह: जैविक खेती अपनाएं
जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने किसानों को मिट्टी में पोषक तत्व बनाए रखने के लिए फसल चक्र के अनुसार खेती करने की सलाह दी है। कहा कि हर साल एक ही तरह की फसल नहीं उगानी चाहिए। फसलों को बदलकर बोना चाहिए ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे। किसानों से गोबर की खाद का अधिक प्रयोग करने और रासायनिक उर्वरकों का छिड़काव कम करने का आग्रह किया। उनके अनुसार ये उपाय भूमि की उर्वरता शक्ति को बनाए रखने और स्वस्थ, अच्छी पैदावार प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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जिला कृषि विभाग के मिट्टी परीक्षण लैब के वरिष्ठ शोध सहायक आनंद सेन ने बताया कि जिले की मिट्टी में एक हेक्टेयर के लिए 350 किग्रा पोटाश की आवश्यकता होती है। वर्तमान में यह मात्रा केवल 270 किग्रा है। इसी तरह कार्बनिक जीवाश्म की आवश्यक 375 किग्रा प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए, लेकिन यह 240 किग्रा ही पाया गया है।
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उन्होंने यह भी बताया कि जिले की मिट्टी में फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन रासायनिक खाद का प्रयोग इसी तरह जारी रहा तो यह भी कम हो सकता है। पोटाश की कमी से फसल के पौधे ठीक से नहीं बढ़ते, फूल और फलों का विकास नहीं होता तथा दाना चमकदार नहीं होता। खरीफ की फसल में सात हजार किसानों के खेत की मिट्टी की जांच की गई थी, जबकि रबी की फसल के लिए तीन हजार का लक्ष्य रखा गया है। इसमें दो हजार जांचें पूरी हो चुकी हैं।
गनीवां कृषि फार्म के वैज्ञानिक मनोज शर्मा ने बताया कि भूमि में पोषक तत्व संतुलित मात्रा में होने चाहिए, क्योंकि किसी एक तत्व की कमी या अधिकता से फसल की पैदावार कम हो जाती है। प्रगतिशील किसानों योगेश जैन, शिवकुमार शुक्ला और रेवती रमण ने बताया कि मिट्टी की जांच कराने से उन्हें अपने खेतों की कमियों का पता चला कि उनकी मिट्टी में कौन सी कमी है।
इनसेट
मिट्टी जांच की प्रक्रिया
मिट्टी परीक्षण के लिए लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों से कुल आधा किग्रा मिट्टी निकाली जाती है। जिस स्थान से मिट्टी ली जाती है, वहां छह इंच गहराई और दो इंच चौड़ा गड्ढा होना चाहिए। इसके बाद मिट्टी को एक साफ कपड़े की थैली में रखकर कृषि विभाग स्थित लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। यह जांच किसानों को अपनी मिट्टी की स्थिति समझने में मदद करती है।
कृषि अधिकारी की सलाह: जैविक खेती अपनाएं
जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने किसानों को मिट्टी में पोषक तत्व बनाए रखने के लिए फसल चक्र के अनुसार खेती करने की सलाह दी है। कहा कि हर साल एक ही तरह की फसल नहीं उगानी चाहिए। फसलों को बदलकर बोना चाहिए ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे। किसानों से गोबर की खाद का अधिक प्रयोग करने और रासायनिक उर्वरकों का छिड़काव कम करने का आग्रह किया। उनके अनुसार ये उपाय भूमि की उर्वरता शक्ति को बनाए रखने और स्वस्थ, अच्छी पैदावार प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।