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Chitrakoot News: मूंग की खेती से बंपर आय, 60 दिन में 20 हजार रुपये लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 29 Mar 2026 11:24 PM IST
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फोटो 29सीकेटीपी 03 दुर्गापुरवा क्षेत्र में मूंग फसल के लिए खेत तैयार करता किसान। संवाद
- फोटो : सम्राट अशोक की शोभायात्रा के दौरान मुख्य डोले के साथ पदाधिकारी। संवाद
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चित्रकूट। गर्मी के मौसम में किसानों ने मूंग की फसल की बोआई शुरू कर दी है। यह फसल कम समय में तैयार होकर अच्छी आय देती है। यह लगभग 55 से 60 दिनों में पक जाती है और मिट्टी की उर्वरता सुधारने में भी सहायक है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत किस्मों और सही बोआई के तरीकों का पालन करने की सलाह दी है।
कृषि वैज्ञानिक विजय गौतम के अनुसार, मूंग की बोआई का उपयुक्त समय 10 मार्च से लेकर 10 अप्रैल तक है। उन्होंने शुद्ध प्रमाणित और रोग मुक्त बीज का अंकुरण परीक्षण के बाद ही उपयोग करने पर जोर दिया। उन्नत किस्मों में शिखा, विराट, सम्राट, आईपीएम 2057 और एमएच1142 शामिल हैं। प्रति हेक्टेयर 12 से 15 किलोग्राम बीज की बोआई करनी चाहिए। बोआई के बाद प्रति हेक्टेयर 40 किलोग्राम डीएपी और 12 किलोग्राम पोटाश डालने की सलाह दी गई है। किसान गोबर की खाद का भी उपयोग कर सकते हैं।
फसल प्रबंधन और आय
प्रगतिशील किसान योगेश जैन और रेवती रमण त्रिपाठी ने बताया कि मूंग को गर्मियों में पांच बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। सिंचाई पौधा उगते समय, फलियां लगते समय और दाना आते समय करनी चाहिए। प्रति हेक्टेयर सात से आठ क्विंटल मूंग की पैदावार होती है। एक एकड़ क्षेत्र में मूंग की खेती पर चार हजार से पांच हजार रुपये की लागत आती है, जिससे लगभग 20 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। फली बीटल, सफेद मक्खी और फली छेदक जैसे कीटों के नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 400 मिली प्रोफ्नोफॉस रसायन को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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कृषि वैज्ञानिक विजय गौतम के अनुसार, मूंग की बोआई का उपयुक्त समय 10 मार्च से लेकर 10 अप्रैल तक है। उन्होंने शुद्ध प्रमाणित और रोग मुक्त बीज का अंकुरण परीक्षण के बाद ही उपयोग करने पर जोर दिया। उन्नत किस्मों में शिखा, विराट, सम्राट, आईपीएम 2057 और एमएच1142 शामिल हैं। प्रति हेक्टेयर 12 से 15 किलोग्राम बीज की बोआई करनी चाहिए। बोआई के बाद प्रति हेक्टेयर 40 किलोग्राम डीएपी और 12 किलोग्राम पोटाश डालने की सलाह दी गई है। किसान गोबर की खाद का भी उपयोग कर सकते हैं।
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फसल प्रबंधन और आय
प्रगतिशील किसान योगेश जैन और रेवती रमण त्रिपाठी ने बताया कि मूंग को गर्मियों में पांच बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। सिंचाई पौधा उगते समय, फलियां लगते समय और दाना आते समय करनी चाहिए। प्रति हेक्टेयर सात से आठ क्विंटल मूंग की पैदावार होती है। एक एकड़ क्षेत्र में मूंग की खेती पर चार हजार से पांच हजार रुपये की लागत आती है, जिससे लगभग 20 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। फली बीटल, सफेद मक्खी और फली छेदक जैसे कीटों के नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 400 मिली प्रोफ्नोफॉस रसायन को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।