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Deoria News: देवरिया-कसया मार्ग में एनओसी की बाधा, बरहज रोड का टेंडर अटका
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 29 Apr 2026 11:56 PM IST
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देवरिया। कुशीनगर को जोड़ने वाले देवरिया-कसया मार्ग को फोरलेन बनाने में पर्यावरण की एनओसी बाधक बन गई है। दरअसल चौड़ीकरण के लिए करीब तीन हजार पेड़ों की कटान होनी है।
इसके बदले इतने नए पेड़ दूसरी जगह लगाने की शर्त पर ही एनओसी जारी होगी। अब डीएम ने सीआरओ के नेतृत्व में एक टीम गठित की है, जो इसके लिए जमीन की तलाश कर रही है। वहीं देवरिया-बरहज मार्ग का टेंडर ही फाइनल नहीं हो पाया है।
देवरिया से कसया मार्ग करीब 34 किलोमीटर लंबा है। इसमें से 31 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन बनाया जाएगा। गौरा चौराहे के पास यह फोरलेन सड़क गोरखपुर-सलेमपुर फोरलेन बाईपास से जुड़ेगी।
इस मार्ग को फोरलेन बनाने की घोषणा एक साल पहले हुई थी। बीते मार्च में इसके लिए बजट भी जारी हो गया। टेंडर भी फाइनल हो गया। उम्मीद थी कि अप्रैल के पहले सप्ताह में ही इस पर कार्य आरंभ भी हो जाएगा।
अभी मामला पर्यावरण की एनओसी में अटका है। इस सड़क पर गौरा चौराहे से लेकर रामपुर कारखाना तक दोनों तरफ पेड़ हैं। इसके अलावा पटनवा पुल से लेकर कसया कस्बे के पास तक दोनों तरफ छायादार पेड़ हैं। इन लगभग तीन हजार पेड़ों की कटान के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। वन विभाग ने पेड़ों की गिनती का काम लगभग पूरा कर लिया है। अब इतने पेड़ किसी अन्य जगह लगाने के लिए जमीन मिलने पर ही वन विभाग की तरफ से एनओसी जारी होगी। लोक निर्माण विभाग के अनुसार देवरिया-कसया मार्ग की मौजूदा चौड़ाई करीब 10 मीटर है।
यातायात दबाव बढ़ने और लगातार दुर्घटनाओं को देखते हुए इसे चौड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सड़क चौड़ी होने से देवरिया-कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
अधिकारियों के मुताबिक चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले पेड़ों की संख्या करीब तीन हजार है। इन्हें काटने से पहले वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य है। वन विभाग ने पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की शर्त रखी है। इसी वजह से मामला अटका हुआ है।
राजस्व विभाग को इसके लिए जमीन चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई है। विभागीय टीमें विभिन्न स्थानों पर सरकारी जमीन की तलाश कर रही हैं, ताकि वहां प्रतिपूरक पौधरोपण कराया जा सके। जमीन मिलने के बाद ही प्रस्ताव वन विभाग को भेजा जाएगा और एनओसी जारी हो सकेगी। एनओसी मिलने के बाद ही चौड़ाई बढ़ाने के लिए खनन के साथ-साथ पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू होगा।
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इसके बदले इतने नए पेड़ दूसरी जगह लगाने की शर्त पर ही एनओसी जारी होगी। अब डीएम ने सीआरओ के नेतृत्व में एक टीम गठित की है, जो इसके लिए जमीन की तलाश कर रही है। वहीं देवरिया-बरहज मार्ग का टेंडर ही फाइनल नहीं हो पाया है।
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देवरिया से कसया मार्ग करीब 34 किलोमीटर लंबा है। इसमें से 31 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन बनाया जाएगा। गौरा चौराहे के पास यह फोरलेन सड़क गोरखपुर-सलेमपुर फोरलेन बाईपास से जुड़ेगी।
इस मार्ग को फोरलेन बनाने की घोषणा एक साल पहले हुई थी। बीते मार्च में इसके लिए बजट भी जारी हो गया। टेंडर भी फाइनल हो गया। उम्मीद थी कि अप्रैल के पहले सप्ताह में ही इस पर कार्य आरंभ भी हो जाएगा।
अभी मामला पर्यावरण की एनओसी में अटका है। इस सड़क पर गौरा चौराहे से लेकर रामपुर कारखाना तक दोनों तरफ पेड़ हैं। इसके अलावा पटनवा पुल से लेकर कसया कस्बे के पास तक दोनों तरफ छायादार पेड़ हैं। इन लगभग तीन हजार पेड़ों की कटान के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। वन विभाग ने पेड़ों की गिनती का काम लगभग पूरा कर लिया है। अब इतने पेड़ किसी अन्य जगह लगाने के लिए जमीन मिलने पर ही वन विभाग की तरफ से एनओसी जारी होगी। लोक निर्माण विभाग के अनुसार देवरिया-कसया मार्ग की मौजूदा चौड़ाई करीब 10 मीटर है।
यातायात दबाव बढ़ने और लगातार दुर्घटनाओं को देखते हुए इसे चौड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सड़क चौड़ी होने से देवरिया-कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
अधिकारियों के मुताबिक चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले पेड़ों की संख्या करीब तीन हजार है। इन्हें काटने से पहले वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य है। वन विभाग ने पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की शर्त रखी है। इसी वजह से मामला अटका हुआ है।
राजस्व विभाग को इसके लिए जमीन चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई है। विभागीय टीमें विभिन्न स्थानों पर सरकारी जमीन की तलाश कर रही हैं, ताकि वहां प्रतिपूरक पौधरोपण कराया जा सके। जमीन मिलने के बाद ही प्रस्ताव वन विभाग को भेजा जाएगा और एनओसी जारी हो सकेगी। एनओसी मिलने के बाद ही चौड़ाई बढ़ाने के लिए खनन के साथ-साथ पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू होगा।
