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Deoria News: कोल्ड डायरिया, निमोनिया के बढ़े मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:26 AM IST
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देवरिया। बदलते मौसम में कोल्ड डायरिया ओर निमोनिया के मरीज बढ़ गए हैं। इसके पीछे लापरवाही मुख्य वजह बताई जा रही हे। चिकित्सक लोगों को उतार चढ़ाव भरे मौसम में अभी सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
तापमान में लगातार वृद्धि से लोग ठंड को लेकर लापरवाह हो चले हैं। इसके चलते बच्चों से लेकर बड़े और बुजुर्ग भी इसकी चपेट में आ जा रहे हैं। महर्षि देवरहा बाबा की ओपीडी में इस तरह के करीब 15 प्रतिशत मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं।
खासकर बच्चों में कोल्ड डायरिया और निमोनिया के केस अधिक हैं। मेडिकल काॅलेज के पीआईसीयू में प्रतिदिन पांच से 10 मरीज कोल्ड डायरिया और निमोनिया के भर्ती हो रहे हैं। इसके पीछे धूप निकलने के चलते लापरवाही मुख्य वजह बताई जा रही है।
ठंड में रोग प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है कम
जाड़े के दिनों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसके चलते बच्चे जल्दी रोग की चपेट में आ जाते हैं। वायरल और फिर वैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सक इससे बचने की सलाह दे रहे हैं। सीएमएस डॉ. एचके मिश्र ने बताया कि ठंड से बचाव बेहद जरुरी है। बच्चों को गंदे हाथ व बोतल से दूध नहीं पिलाएं। इससे इंफेक्शन फैलने का खतरा अधिक रहता है। उन्हें गिलास या कटोरी व चम्मच की सहायता से दूध पिलाएं। समय समय पर टीकाकरण कराते रहें। तीन महीने तक केवल मां का दूध पिलाएं। छह माह से कांप्लीमेंट्री फीडिंग कराएं। जैसे दूध रोटी, दाल रोटी आदि का सेवन कराएं। हमेश गरम कपड़ों से बच्चों को ढककर रखें।
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खासकर बच्चों में कोल्ड डायरिया और निमोनिया के केस अधिक हैं। मेडिकल काॅलेज के पीआईसीयू में प्रतिदिन पांच से 10 मरीज कोल्ड डायरिया और निमोनिया के भर्ती हो रहे हैं। इसके पीछे धूप निकलने के चलते लापरवाही मुख्य वजह बताई जा रही है।
ठंड में रोग प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है कम
जाड़े के दिनों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसके चलते बच्चे जल्दी रोग की चपेट में आ जाते हैं। वायरल और फिर वैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सक इससे बचने की सलाह दे रहे हैं। सीएमएस डॉ. एचके मिश्र ने बताया कि ठंड से बचाव बेहद जरुरी है। बच्चों को गंदे हाथ व बोतल से दूध नहीं पिलाएं। इससे इंफेक्शन फैलने का खतरा अधिक रहता है। उन्हें गिलास या कटोरी व चम्मच की सहायता से दूध पिलाएं। समय समय पर टीकाकरण कराते रहें। तीन महीने तक केवल मां का दूध पिलाएं। छह माह से कांप्लीमेंट्री फीडिंग कराएं। जैसे दूध रोटी, दाल रोटी आदि का सेवन कराएं। हमेश गरम कपड़ों से बच्चों को ढककर रखें।
