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Deoria News: नियमित व्यायाम से कम हो रही हाथीपांव की सूजन
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देवरिया। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत बृहस्पतिवार को पथरदेवा क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिर सेमरी से संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र में फाइलेरिया मरीजों को रोग प्रबंधन के लिए एमएमडीपी प्रशिक्षण दिया गया। 20 मरीजों को प्रभावित अंग की साफ सफाई के लिए एमएमडीपी किट का वितरण किया गया, जिससे वह घर पर ही अपने घावों और पैरों की बेहतर देखभाल कर सकें। इस दौरान पीएसपी सदस्य सीएचओ ने डेमो देकर प्रभावित अंग की साफ सफाई की जानकारी दी।
वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक नवीन प्रकाश ने कहा कि नियमित सफाई से फाइलेरिया प्रभावित अंग की सही देखभाल, साफ सफाई और व्यायाम से हाथीपांव की सूजन में कमी आई है। इसके साथ ही फाइलेरिया के अटैक भी कम हुए हैं। उन्होंने बीमारी की गंभीरता के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि फाइलेरिया बीमारी क्यूलेक्स मच्छर फाइलेरिया संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उसे भी संक्रमित कर देता, लेकिन संक्रमण के लक्षण पांच से 15 वर्ष में उभरकर सामने आते हैं। इससे व्यक्ति के हाथ-पैर में सूजन की शिकायत होती है या फिर अंडकोष में सूजन आ जाती है। महिलाओं को स्तन के आकार में परिवर्तन हो सकता है। शुरुआत में रोग की पहचान होने पर इसे रोका जा सकता है। इस बीमारी से साल में एक बार लगातार पांच साल दवा के सेवन से बचा जा सकता है। पीएसपी सदस्य सीएचओ अनुराधा ने फाइलेरिया मरीजों को हाथी पांव की नियमित सफाई, सूजन कम करने के उपाय, और संक्रमण से बचाव की जानकारी दी। बताया कि समय पर देखभाल से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी है। मरीजों को लगातार साफ-सफाई और उपचार की आवश्यकता होती है। सीएचओ ने किट में मौजूद सामग्री जैसे साबुन, टावेल, एंटीसेप्टिक व अन्य उपकरणों के उपयोग की विधि करके दिखाया व मरीजों को समझाया। फाइलेरिया मरीज 50 वर्षीय फाइलेरिया मरीज धर्मेंद्र ने बताया कि एक वर्ष से पीएसपी से जुड़े हैं । बताए गए साफ सफाई और व्यायाम को नियमित रुप से कराने से करीब दस माह से फाइलेरिया का अटैक नहीं आया और सूजन में भी कमी आई है। इस अवसर पर बीपीएम नागेद्र मल्ल, पीएसपी सदस्य एएनएम प्रीति, डीसीजी सदस्य वालेंटियर राजू श्रीवास्तव, बीएचडब्ल्यू राकेश, सहयोगी संस्था सीफार के जिला प्रतिनिधि सहित आशा आंगनबाडी, शिक्षक, फाइलेरिया मरीज आदि उपस्थित रहे।
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वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक नवीन प्रकाश ने कहा कि नियमित सफाई से फाइलेरिया प्रभावित अंग की सही देखभाल, साफ सफाई और व्यायाम से हाथीपांव की सूजन में कमी आई है। इसके साथ ही फाइलेरिया के अटैक भी कम हुए हैं। उन्होंने बीमारी की गंभीरता के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि फाइलेरिया बीमारी क्यूलेक्स मच्छर फाइलेरिया संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उसे भी संक्रमित कर देता, लेकिन संक्रमण के लक्षण पांच से 15 वर्ष में उभरकर सामने आते हैं। इससे व्यक्ति के हाथ-पैर में सूजन की शिकायत होती है या फिर अंडकोष में सूजन आ जाती है। महिलाओं को स्तन के आकार में परिवर्तन हो सकता है। शुरुआत में रोग की पहचान होने पर इसे रोका जा सकता है। इस बीमारी से साल में एक बार लगातार पांच साल दवा के सेवन से बचा जा सकता है। पीएसपी सदस्य सीएचओ अनुराधा ने फाइलेरिया मरीजों को हाथी पांव की नियमित सफाई, सूजन कम करने के उपाय, और संक्रमण से बचाव की जानकारी दी। बताया कि समय पर देखभाल से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी है। मरीजों को लगातार साफ-सफाई और उपचार की आवश्यकता होती है। सीएचओ ने किट में मौजूद सामग्री जैसे साबुन, टावेल, एंटीसेप्टिक व अन्य उपकरणों के उपयोग की विधि करके दिखाया व मरीजों को समझाया। फाइलेरिया मरीज 50 वर्षीय फाइलेरिया मरीज धर्मेंद्र ने बताया कि एक वर्ष से पीएसपी से जुड़े हैं । बताए गए साफ सफाई और व्यायाम को नियमित रुप से कराने से करीब दस माह से फाइलेरिया का अटैक नहीं आया और सूजन में भी कमी आई है। इस अवसर पर बीपीएम नागेद्र मल्ल, पीएसपी सदस्य एएनएम प्रीति, डीसीजी सदस्य वालेंटियर राजू श्रीवास्तव, बीएचडब्ल्यू राकेश, सहयोगी संस्था सीफार के जिला प्रतिनिधि सहित आशा आंगनबाडी, शिक्षक, फाइलेरिया मरीज आदि उपस्थित रहे।
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