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Etah News: अमृत सरोवर में डूबा मासूम, नगर पालिका सभागार में शव रखकर हंगामा
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अभिनव
- फोटो : अमर उजाला
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मारहरा। मोहल्ला मकमूल गंज का निर्माणाधीन अमृत सरोवर एक बच्चे के लिए काल बन गया। मंगलवार की सुबह घर से खेलने के लिए निकला बच्चा सरोवर में डूब गया। करीब डेढ़ घंंटे बाद राहगीराें ने उसे सरोवर में देखा तो सीएचसी लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नगर पालिका की लापरवाही से हादसे को आरोप लगाते हुए परिजन और अन्य लोग पालिका कार्यालय पहुंच गए। यहां सभागार मेंं शव रखकर एक घंटे तक हंगामा काटा। मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी के आश्वासन पर लोग शांत हुए। बच्चे की मौत से परिवारीजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
मिरहची मार्ग पर मोहल्ला मकमूल गंज में नगर पालिका द्वारा अमृत सरोवर पार्क का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पास मुकेश का मकान बना हुआ है। मुकेश मजदूरी करता है। उसके तीन बेटे सनी (9), अभिनव (6) और मनीष (4) वर्ष हैं। मंगलवार की सुबह 8 बजे मुकेश, अपनी पत्नी शिल्पी को दवा दिलवाने के लिए लेकर गए। पीछे-पीछे अभिनव भी आने लगा। परिजन ने उसे वापस घर भेज दिया। वह घर न जाकर बाहर की खेलने लगा। इसी बीच खेलते-खेलते वह अमृत सरोवर में गिर गया और डूब गया। इसकी किसी को जानकारी नहीं हुई। करीब साढ़े नौ बजे वहां से गुजर रहे राहगीरों ने बच्चे को पानी में देखा तो शोर मचाया। वहां भीड़ एकत्रित हो गई। बच्चे को बाहर निकाला गया। परिजन भी वहां आ गए। आनन-फानन उसे सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने मृत होने की बात कही। यह सुन परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अगर अमृत सरोवर की तारबंदी या बाउंड्रीवाॅल की गई होती तो यह हादसा नहीं होता। इससे गुस्साए लोग शव को चारपाई पर रखकर नगर पालिका दफ्तर पहुंच गए। वहां सभागार में शव रखकर बैठ गए। वहां पालिका के खिलाफ खूब नारेबाजी और प्रदर्शन किया। अधिशाषी अधिकारी राम दुलारे यादव, पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि धीरेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार सुशील कुमार राजपूत आदि वहां पहुंच गए। उन्होंने परिवार को ढांढ़स बंधाया। अधिकारियों ने आपदा सहायता योजना के तहत परिजन को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही मृतक के पिता मुकेश को निर्माणाधीन अमृत सरोवर पार्क में आउटसोर्स या संविदा के आधार पर नौकरी का भरोसा दिलाया। आश्वासन के बाद लोग शांत हुए। बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। ईओ का कहना है किपरिवार को चार लाख रुपये आर्थिक सहायता और पिता को आउससोर्स पर नौकरी दिलाने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
मिरहची मार्ग पर मोहल्ला मकमूल गंज में नगर पालिका द्वारा अमृत सरोवर पार्क का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पास मुकेश का मकान बना हुआ है। मुकेश मजदूरी करता है। उसके तीन बेटे सनी (9), अभिनव (6) और मनीष (4) वर्ष हैं। मंगलवार की सुबह 8 बजे मुकेश, अपनी पत्नी शिल्पी को दवा दिलवाने के लिए लेकर गए। पीछे-पीछे अभिनव भी आने लगा। परिजन ने उसे वापस घर भेज दिया। वह घर न जाकर बाहर की खेलने लगा। इसी बीच खेलते-खेलते वह अमृत सरोवर में गिर गया और डूब गया। इसकी किसी को जानकारी नहीं हुई। करीब साढ़े नौ बजे वहां से गुजर रहे राहगीरों ने बच्चे को पानी में देखा तो शोर मचाया। वहां भीड़ एकत्रित हो गई। बच्चे को बाहर निकाला गया। परिजन भी वहां आ गए। आनन-फानन उसे सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने मृत होने की बात कही। यह सुन परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अगर अमृत सरोवर की तारबंदी या बाउंड्रीवाॅल की गई होती तो यह हादसा नहीं होता। इससे गुस्साए लोग शव को चारपाई पर रखकर नगर पालिका दफ्तर पहुंच गए। वहां सभागार में शव रखकर बैठ गए। वहां पालिका के खिलाफ खूब नारेबाजी और प्रदर्शन किया। अधिशाषी अधिकारी राम दुलारे यादव, पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि धीरेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार सुशील कुमार राजपूत आदि वहां पहुंच गए। उन्होंने परिवार को ढांढ़स बंधाया। अधिकारियों ने आपदा सहायता योजना के तहत परिजन को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही मृतक के पिता मुकेश को निर्माणाधीन अमृत सरोवर पार्क में आउटसोर्स या संविदा के आधार पर नौकरी का भरोसा दिलाया। आश्वासन के बाद लोग शांत हुए। बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। ईओ का कहना है किपरिवार को चार लाख रुपये आर्थिक सहायता और पिता को आउससोर्स पर नौकरी दिलाने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
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