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Etah News: बाढ़- गंगा की बाढ़ ने बढ़ाया दायरा, सुन्नगढ़ी से देवकली तक खेतों में भरा पानी
Sun, 02 Aug 2026 12:12 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 02 Aug 2026 12:12 AM IST
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फोटो 32- किसौल के बांध के दोनों ओर भरा गंगा का पानी एवं निरीक्षण करती सिंचाई विभाग की टीम। स्रो
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कासगंज। जिले में उफनती गंगा का पानी अब तटीय इलाकों के खेतों में भरने लगा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई हैं। बिजनौर और नरौरा बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण बांधों पर दबाव बढ़ गया है, वहीं गंगाघाटों पर बढ़ रहे जलस्तर से कांवड़ियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
उफनती गंगा की धारा अब जिले के तटीय इलाकों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। बाढ़ के पानी का दायरा लगातार फैल रहा है, जिससे सुन्नगढ़ी से देवकली तक खेत जलमग्न हो चुके हैं। बिजनौर और नरौरा बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा के कच्चे बांधों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे कटान का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पिछले 24 घंटों से बैराजों से मीडियम फ्लड लेवल का प्रवाह लगातार बना हुआ है। शुक्रवार रात बिजनौर बैराज से पानी का प्रवाह 2 लाख क्यूसेक के आंकड़े को पार कर गया। सिंचाई विभाग के अनुसार, रात के समय 2.14 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह बना रहा, जिसके बाद बाढ़ नियंत्रण कक्ष को हाई अलर्ट जारी किया गया। हालांकि, 12 घंटे बाद शनिवार सुबह बिजनौर बैराज का प्रवाह घटकर 1.81 लाख क्यूसेक और नरौरा बैराज का प्रवाह 1.72 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। इसके बावजूद जिले की सीमा में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
फसलें डूबीं, आवागमन प्रभावित
तटीय गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीण सहम उठे हैं। नगला जयकिशन के निवासी उर्वेश ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव की पुलिया तक पहुंच गया है। यदि जलस्तर और बढ़ा, तो मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा और गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएगा। इसके अलावा खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पटियाली के नगला हंसी और आसपास के इलाकों में भी बाढ़ की आहट से लोग परेशान हैं। लहरा और कछला गंगाघाटों पर जलस्तर बढ़ने के कारण दुकानदारों ने अपनी अस्थायी दुकानें पीछे हटानी शुरू कर दी हैं।
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लहरा घाट पर कांवड़ियों की बढ़ी मुश्किलें
तीर्थनगरी सोरोंजी के लहरा गंगाघाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से सावन माह में आने वाले कांवड़ियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लहरा की निचली बस्ती में बाढ़ का पानी पहुंचने से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लहरा घाट पर एनडीआरएफ की टीम और गोताखोरों को तैनात किया गया है, जो लगातार श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोक रहे हैं और सतर्क कर रहे हैं। वहीं, जलभराव के चलते नगर पालिका द्वारा बनाए गए चेंजिंग रूम और अस्थायी प्रसाधन गृह भी पानी में डूब गए हैं।
प्रशासन और सिंचाई विभाग भी सतर्क
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखते हुए सिंचाई विभाग के एसडीओ संदीप जैन ने पटियाली क्षेत्र के किसौल और मुजफ्फरनगर में चल रहे कटानरोधी कार्यों का निरीक्षण किया। यहां गंगा की धारा सीधे कटानरोधी कार्यों से सटकर बह रही है। प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है ताकि तटबंधों को सुरक्षित रखा जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 1,23,872 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 1,81,216 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 1,72,721 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.80 मीटर के निशान पर
अभी कटान की स्थिति नहीं
- बिजनौर और नरौरा से पानी का प्रवाह बढ़ने के कारण गंगा के जलस्तर में वृद्धि से मीडियम फ्लड की स्थित गंगा में बनी है। फिलहाल जिले में कहीं कटान की स्थिति नहीं है। सिंचाई विभाग की टीम निरंतर निगरानी कर रही है। अब बैराजों से प्रवाह कम होने की उम्मीद है- शरद सौरभ गिरी, अधिशासी अभियंता सिंचाई।
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उफनती गंगा की धारा अब जिले के तटीय इलाकों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। बाढ़ के पानी का दायरा लगातार फैल रहा है, जिससे सुन्नगढ़ी से देवकली तक खेत जलमग्न हो चुके हैं। बिजनौर और नरौरा बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा के कच्चे बांधों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे कटान का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पिछले 24 घंटों से बैराजों से मीडियम फ्लड लेवल का प्रवाह लगातार बना हुआ है। शुक्रवार रात बिजनौर बैराज से पानी का प्रवाह 2 लाख क्यूसेक के आंकड़े को पार कर गया। सिंचाई विभाग के अनुसार, रात के समय 2.14 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह बना रहा, जिसके बाद बाढ़ नियंत्रण कक्ष को हाई अलर्ट जारी किया गया। हालांकि, 12 घंटे बाद शनिवार सुबह बिजनौर बैराज का प्रवाह घटकर 1.81 लाख क्यूसेक और नरौरा बैराज का प्रवाह 1.72 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। इसके बावजूद जिले की सीमा में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
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फसलें डूबीं, आवागमन प्रभावित
तटीय गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीण सहम उठे हैं। नगला जयकिशन के निवासी उर्वेश ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव की पुलिया तक पहुंच गया है। यदि जलस्तर और बढ़ा, तो मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा और गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएगा। इसके अलावा खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पटियाली के नगला हंसी और आसपास के इलाकों में भी बाढ़ की आहट से लोग परेशान हैं। लहरा और कछला गंगाघाटों पर जलस्तर बढ़ने के कारण दुकानदारों ने अपनी अस्थायी दुकानें पीछे हटानी शुरू कर दी हैं।
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लहरा घाट पर कांवड़ियों की बढ़ी मुश्किलें
तीर्थनगरी सोरोंजी के लहरा गंगाघाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से सावन माह में आने वाले कांवड़ियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लहरा की निचली बस्ती में बाढ़ का पानी पहुंचने से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लहरा घाट पर एनडीआरएफ की टीम और गोताखोरों को तैनात किया गया है, जो लगातार श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोक रहे हैं और सतर्क कर रहे हैं। वहीं, जलभराव के चलते नगर पालिका द्वारा बनाए गए चेंजिंग रूम और अस्थायी प्रसाधन गृह भी पानी में डूब गए हैं।
प्रशासन और सिंचाई विभाग भी सतर्क
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखते हुए सिंचाई विभाग के एसडीओ संदीप जैन ने पटियाली क्षेत्र के किसौल और मुजफ्फरनगर में चल रहे कटानरोधी कार्यों का निरीक्षण किया। यहां गंगा की धारा सीधे कटानरोधी कार्यों से सटकर बह रही है। प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है ताकि तटबंधों को सुरक्षित रखा जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 1,23,872 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 1,81,216 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 1,72,721 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.80 मीटर के निशान पर
अभी कटान की स्थिति नहीं
- बिजनौर और नरौरा से पानी का प्रवाह बढ़ने के कारण गंगा के जलस्तर में वृद्धि से मीडियम फ्लड की स्थित गंगा में बनी है। फिलहाल जिले में कहीं कटान की स्थिति नहीं है। सिंचाई विभाग की टीम निरंतर निगरानी कर रही है। अब बैराजों से प्रवाह कम होने की उम्मीद है- शरद सौरभ गिरी, अधिशासी अभियंता सिंचाई।

फोटो 32- किसौल के बांध के दोनों ओर भरा गंगा का पानी एवं निरीक्षण करती सिंचाई विभाग की टीम। स्रो

फोटो 32- किसौल के बांध के दोनों ओर भरा गंगा का पानी एवं निरीक्षण करती सिंचाई विभाग की टीम। स्रो