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Etawah News: बकरी पालन से समृद्ध बन रहे 20 हजार परिवार

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 12:05 AM IST
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20,000 Families Becoming Prosperous Through Goat Farming
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फोटो 02:: मेले में बिक्री के लिए लाई गई जमुनापारी बकरियां। आर्काइव

फोटो 03:: कुछ इस प्रकार दिखाई देती है जमुनापारी बकरियां। संवाद
फोटो 04::साहिब सिंह।
फोटो 05::रामदास यादव।
विश्व दुग्ध दिवस

पशुपालकों की तकदीर, किसी ने खरीदे 20 बीघा खेत, किसी ने भाई को बनाया फौजी
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। कभी महज 200 से 300 रुपये में बिकने वाली जमुनापारी बकरी आज 15,000 से 40,000 तक की कीमत हासिल कर रही है। यमुना और चंबल के बीहड़ों में पाली जाने वाली यह विश्व प्रसिद्ध नस्ल अब केवल पशुपालन का साधन नहीं बल्कि हजारों परिवारों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन चुकी है। विश्व दुग्ध दिवस पर चकरनगर की जमुनापारी बकरी की सफलता की कहानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर पेश कर रही है।
वर्ष 2025-26 की पशुगणना के अनुसार जिले में लगभग 20 हजार पशुपालक करीब 1.30 लाख जमुनापारी बकरियों का पालन कर रहे हैं जिनमें से 50 हजार से अधिक अकेले चकरनगर क्षेत्र में पाली जा रही हैं। यही वजह है कि क्षेत्र के हजारों परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बकरी पालन से जुड़ी हुई है। पशुपालन विभाग के अनुसार जमुनापारी नस्ल के संरक्षण और संवर्धन में चकरनगर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुकी है।
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पशुपालकों की बात
फोटो 04::साहिब सिंह।
सिरसा गांव निवासी पशुपालक साहिब सिंह बताते हैं कि वह वर्ष 1990 से जमुनापारी बकरी पालन कर रहे हैं। वर्तमान में उनके पास 15 बकरियां हैं। उनका कहना है कि जमुनापारी बकरी सालभर में अपनी कीमत लगभग दोगुनी कर देती है।
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फोटो 05::रामदास यादव।
टिटावली निवासी रामदास यादव बताते हैं कि वह हर वर्ष पांच से दस लाख रुपये तक की आय अर्जित कर लेते हैं। इसी कमाई से उन्होंने 20 बीघा खेत खरीदा, चार प्लॉट लिए और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई। अपने छोटे भाई राजपाल यादव की पढ़ाई का खर्च उठाया, जो आज सेना में सरकारी नौकरी कर रहे हैं।
इन गांवों में होता जमुनापारी बकरी का पालन

नगला मथुरी, जौनानी, नगला कढ़ोरी, नगला पिलुआ, छिवरौली, बरचोली, सगरा, नीमडांडा, अहेरिया, फूटाताल, नगला चौप, सहसों, नगला महानंद, बछेड़ी, सिरसा, टिटावली, प्रेमकापुरा, सोनेपुरा और विंडवा कला समेत दर्जनों गांवों में बड़े पैमाने पर जमुनापारी बकरी पालन किया जा रहा है। बीहड़ क्षेत्र का प्राकृतिक वातावरण और पर्याप्त हरा चारा इस नस्ल के लिए अनुकूल माना जाता है।


देशभर में है जमुनापारी बकरी की मांग

जमुनापारी बकरी अपने बेहतर दुग्ध उत्पादन, आकर्षक कद-काठी और अधिक वजन के कारण देशभर में लोकप्रिय है। नागपुर, छिंदवाड़ा, मुंबई, लखनऊ, जोधपुर, केरल और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के व्यापारी यहां से बड़ी संख्या में बकरियां खरीदकर ले जाते हैं। दूध के साथ-साथ इसके मीट की भी अच्छी मांग है जिससे पशुपालकों को बेहतर कीमत मिलती है।
प्रदेश का पहला भेड़-बकरी पालन प्रशिक्षण केंद्र
उत्तर प्रदेश का पहला भेड़-बकरी पालन प्रशिक्षण केंद्र जिले में स्थित है। वर्ष 2023 में बनकर तैयार हुए इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करके उनकी आय को बढ़ाना है। केंद्र पर अप्रैल 2026 तक 2776 पशुपालकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। डिप्टी सीवीओ डॉ. हरिश्चंद्र ने बताया कि प्रशिक्षण केंद्र पर अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जमुनापारी बकरियाें की कीमत बाजार के हिसाब से निर्धारित होती है, इसका विभाग की ओर से कोई निश्चित कीमत नहीं है। यह पशुपालक और खरीदार पर निर्भर करती है। (संवाद)
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