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Etawah News: अप्रैल के बाद हड्डी टूटने के गंभीर मरीज नहीं होंगे रेफर

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:01 AM IST
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After April, serious bone fracture patients will not be referred.
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इटावा। अत्याधुनिक युग में जिले का सबसे बड़ा अस्पताल कई मामलों में आधुनिकता से दूर है। इस कमी के कारण हड्डी टूटने के बड़े मामले फौरन आयुर्विज्ञान विवि सैफई रेफर कर दिए जाते हैं। इस वजह से पीड़ितों की पीड़ा और बढ़ जाती है। उम्मीद जताई जा रही है कि अप्रैल माह के बाद से यह तकलीफ कम हो जाएगी। संयुक्त जिला अस्पताल में सी-आर्म मशीन आने की उम्मीद जगी है। इसके आने से बड़े ऑपरेशन आसानी से और सटीक तरीके से हो सकेंगे।
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जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में 100 से 150 तक मरीज उपचार को आते हैं। जबकि हड्डी संबंधित इमरजेंसी की बात करें तो प्रतिदिन औसतन इनकी संख्या 10 से 15 तक पहुंच जाती है। ज्यादातर सड़क दुर्घटना के मामले होते हैं। हड्डी टूटने के गंभीर मामलों को जिला अस्पताल से फौरन सैफई रेफर कर दिया जाता है। यहां सामान्य एक्सरे सुविधा की वजह से बड़े ऑपरेशन नहीं हो पाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से शासन से सी-आर्म मशीन की मांग की गई थी। लखनऊ स्तर पर मशीन की व्यवस्था कर ली गई है। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इस मशीन को भेजने की तैयारी है।
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सी-आर्म मशीन आधुनिक चिकित्सा, विशेषकर ऑर्थोपेडिक (हड्डी) और कार्डियक सर्जरी में बहुत उपयोगी व मददगार उपकरण है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सीएस नेगी ने बताया कि मरीज के शरीर के चारों ओर आसानी से घूमने और विभिन्न कोणों से एक्सरे लेने की सुविधा की वजह से इसका नाम सी-आर्म पड़ा है। यह ऑपरेशन के दौरान लाइव वीडियो जैसा एक्सरे दिखाता है। स्क्रीन पर देख कर हड्डी का ऑपरेशन करते हैं। सटीक तरीके से रॉड या स्क्रू लगाने में सुविधा मिलती है। इस मशीन की मदद से छोटा चीरा लगाकर भी ऑपरेशन करना आसान हो जाता है। सर्जरी के शरीर के अंदरूनी हिस्से का स्पष्ट दृश्य मिलता रहता है।

ऐसे करती है काम



चिकित्सक के अनुसार एक्सरे तकनीक पर आधारित यह मशीन स्टैटिक फोटो के बजाय डायनामिक इमेज देती है। निचले हिस्से से एक्सरे किरणें निकलती हैं, जो मरीज के शरीर से होकर गुजरती हैं।



ऊपरी हिस्से में ये किरणें डिजिटल सिग्नल में बदल जाती हैं। ये सिग्नल तुरंत पास रखे मॉनिटर पर दिखाई देते हैं, जिससे सर्जन को शरीर के भीतर की लाइव स्थिति का पता चलता रहता है।



-दुर्घटना के कई मामले अस्पताल आते हैं। जरूरत को देखते हुए सी-आर्म मशीन की मांग की गई थी। उम्मीद है कि अप्रैल या मई तक यह मशीन उपलब्ध हो जाएगी।



डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस जिला अस्पताल
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