पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   The official weighing scale didn't budge; the MSP remained a non-starter.

Etawah News: सरकारी कांटा हिला नहीं, एमएसपी धरा रह गया

Sun, 28 Jun 2026 10:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 10:39 PM IST
विज्ञापन
The official weighing scale didn't budge; the MSP remained a non-starter.
इटावा। जिले में मक्का की सरकारी खरीद व्यवस्था इस बार भी किसानों के लिए महज कागजी साबित हो रही है। शासन के निर्देश पर 15 जून से पांच सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू होनी थी, लेकिन 27 जून तक 13 दिन बीत जाने के बाद भी एक भी केंद्र पर एक दाना मक्का की खरीद नहीं हो सकी। दूसरी ओर, किसानों की मेहनत की फसल खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बिक रही है और इसका सबसे अधिक फायदा निजी व्यापारी उठा रहे हैं।
विज्ञापन

सरकार ने इस वर्ष मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि जिले की मंडियों में किसानों को 1800 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल का ही भाव मिल रहा है। यानी किसानों को हर क्विंटल पर 500 से 600 रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। नकदी की जरूरत और सरकारी खरीद शुरू होने की अनिश्चितता के कारण किसान मजबूरी में निजी व्यापारियों को फसल बेच रहे हैं। जिले में इस वर्ष 18,185 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की खेती हुई है। किसानों के मुताबिक प्रति हेक्टेयर 50 से 60 क्विंटल तक उत्पादन हुआ है। अनुमान के अनुसार जिले में करीब नौ से 11 लाख क्विंटल मक्का का उत्पादन हुआ है। इतनी बड़ी मात्रा में फसल तैयार होने के बावजूद सरकारी खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
विज्ञापन

जिले में कुल पांच सरकारी मक्का क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें दो केंद्र नवीन मंडी इटावा, दो जसवंतनगर और एक भरथना में संचालित किए गए हैं। इन केंद्रों पर कर्मचारी मौजूद हैं, लेकिन खरीद प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। इसके विपरीत तीनों मंडियों में निजी व्यापारियों की आढ़तों पर मक्का के ढेर लगे हैं। प्रतिदिन करीब सात से आठ हजार बोरी (प्रति बोरी 50 किलोग्राम) मक्का की आवक हो रही है। यानी रोजाना लगभग 3500 से 4000 क्विंटल मक्का निजी व्यापारियों के माध्यम से बिक रही है, जबकि सरकारी केंद्रों पर खरीद का आंकड़ा अब भी शून्य है। एक ओर किसानों का कहना है कि हर साल सरकारी खरीद में देरी का सबसे ज्यादा फायदा बिचौलियों और निजी व्यापारियों को मिलता है। जब तक सरकारी खरीद शुरू होती है, तब तक अधिकांश किसान अपनी उपज बेच चुके होते हैं। ऐसे में सरकार की ओर से घोषित एमएसपी का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता। उधर, विभागीय अधिकारी खरीद शुरू न होने के पीछे किसानों के कम पंजीकरण और नमी की समस्या को कारण बता रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

ग्राम टिपटिया निवासी किसान सुनील शाक्य ने बताया कि सरकार 2400 रुपये प्रति क्विंटल देने की बात कर रही है, लेकिन सरकारी केंद्र पर खरीद ही शुरू नहीं हुई। मजबूरी में 1850 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से फसल बेचनी पड़ रही है। अगर इंतजार करेंगे तो घर का खर्च और अगली फसल की तैयारी कैसे होगी।

ग्राम खिलचीपुर निवासी सर्वोध ने कहा कि सरकारी खरीद हर साल देर से शुरू होती है। जब तक केंद्रों पर खरीद चालू होती है, तब तक अधिकांश किसान अपनी उपज बेच चुके होते हैं। इसका फायदा सिर्फ बिचौलियों और व्यापारियों को मिलता है, किसान को नहीं।

वर्जन
अब तक केवल 40 से 50 किसानों ने मक्का बिक्री के लिए पंजीकरण कराया है, जिनका सत्यापन तहसीलों में लंबित है। साथ ही खरीद केंद्रों पर पहुंच रही मक्का में निर्धारित मानक से अधिक नमी मिलने के कारण खरीद शुरू नहीं हो सकी है।
-ज्ञानचंद्र वर्मा, प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed