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Farrukhabad News: पूर्व विधायक विजय सिंह के घर हुए विस्फोट में एक और युवक की मौत
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फर्रुखाबाद। पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक विजय सिंह के घर 17 मार्च को हुए विस्फोट में घायल एक और युवक की मौत हो गई है। इससे पहले एक अन्य घायल ने 31 मार्च को दम तोड़ दिया था। अब मरने वालों की संख्या दो हो गई है। इसके बाद भी पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर सकी है।
शहर के मोहल्ला नाला मछरट्टा स्थित सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह के तीन मंजिला मकान के बेसमेंट में 17 मार्च की शाम विस्फोट हुआ था। उसके बेटे अविनाश उर्फ विक्की, अभिषेक उर्फ सिक्की, ईशु चौरसिया, रामवीर यादव, रामू उर्फ रासू मिश्रा व भैया लाल घायल हो गए थे। धमाका इतना तेज था कि मकान की तीसरी मंजिल पर लगी रेलिंग के साथ आसपास के मकान हिल गए थे। बेसमेंट पूरी तरह तहस-नहस हो गया था।
फॉरेंसिक टीम और एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) ने मौके से नमूने लिए थे। उन्हें जांच के लिए भेजा गया था। विस्फोट की तीव्रता से कई तरह की आशंकाएं जताई गई थीं। पुलिस ने जांच के बाद मकान को सील कर दिया था। घटना वाली रात ही पुलिस ने पूर्व विधायक के बेटे अविनाश उर्फ विक्की, अभिषेक उर्फ सिक्की, ईशु चौरसिया, रामवीर यादव, रासू मिश्रा और भैया लाल पर प्राथमिकी दर्ज की थी। सभी घायलों को अलग-अलग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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नूरपुर निवासी भैयालाल ने 31 मार्च को कानपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इसके बाद भी पुलिस किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं कर सकी थी। इस बीच पूर्व विधायक के बेटे हाईकोर्ट चले गए। वहां से सात मई को गिरफ्तारी पर रोक का आदेश हो गया था। इसके बाद भी पुलिस ने जांच के नाम पर मकान को नहीं खोला और वहां दो सुरक्षा कर्मी तैनात रहे। जबकि पूर्व विधायक की पत्नी पूर्व पालिका अध्यक्ष दमयंती सिंह ने डीएम व एसपी से मकान खोलने के लिए कई बार अर्जी दीं। सुनवाई न होने पर उनके बेटे ने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसकी खबर अमर उजाला में छपने के बाद 20 जून को पुलिस ने पूर्व पालिकाध्यक्ष को बुलाकर मकान की चाबी सौंप दी थी। अब इस मामले में दूसरे घायल शहर की बटुआ वाली गली मदारवाड़ी गली निवासी ईशु चौरसिया ने अपने घर पर ही शुक्रवार देर रात दम तोड़ दिया।
शहर कोतवाल धर्मेंद्र सिंह गहलोत ने बताया कि पोस्टमार्टम कराया गया है। विवेचना चल रही है। तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
कई सवालों के पुलिस को खोजने होंगे जवाब
सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह के घर में विस्फोट के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए घायल हुए सभी छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। साथ ही घटना के बाद पुलिस अधिकारियों व अन्य लोगों ने गैस सिलिंडर सुरक्षित होने की बात कही थी। मौके पर सिलिंडर आदि फटने जैसा कोई तथ्य भी पुलिस या कोई अन्य जांच एजेंसी प्रस्तुत नहीं कर सकी थी। इसके चलते ही विस्फोट को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई थीं। पुलिस ने भी जांच के लिए तीन माह तक मकान सील रखा था। दो-तीन बार पूरे मकान को खंगाला भी गया था। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि पड़ोसी के मकान के शीशे टूट गए थे। अब लोगों का कहना है कि यदि गैस रिसाव से विस्फोट होता तो आग भी लग सकती थी पर आग नहीं लगी थी। जबकि एफएसएल की रिपोर्ट में विस्फोट किसी पदार्थ से नहीं बल्कि रसोई गैस जैसे किसी अन्य स्रोत से होने की बात कही गई थी। इसके चलते ही हाईकोर्ट से आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक का आदेश हुआ था। अब दो लोगों की मौत के बाद इस मामले को लेकर कई सवाल हैं, जिन्हें पुलिस को अपनी विवेचना में देना ही होगा।
एक घंटे में हुआ पोस्टमार्टम : ईशु चौरसिया का डॉक्टर ने करीब एक घंटे में पोस्टमार्टम किया। सूत्रों के मुताबिक पेट व छोटी आंत में गंभीर संक्रमण और फेफड़ों में पस जमा होने से मौत की पुष्टि की गई है। हाथ-पैर व चेहरे पर जले के निशान थे। बाएं पैर व कूल्हे में तीन पुराने घाव के निशान मिले।
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शहर के मोहल्ला नाला मछरट्टा स्थित सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह के तीन मंजिला मकान के बेसमेंट में 17 मार्च की शाम विस्फोट हुआ था। उसके बेटे अविनाश उर्फ विक्की, अभिषेक उर्फ सिक्की, ईशु चौरसिया, रामवीर यादव, रामू उर्फ रासू मिश्रा व भैया लाल घायल हो गए थे। धमाका इतना तेज था कि मकान की तीसरी मंजिल पर लगी रेलिंग के साथ आसपास के मकान हिल गए थे। बेसमेंट पूरी तरह तहस-नहस हो गया था।
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फॉरेंसिक टीम और एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) ने मौके से नमूने लिए थे। उन्हें जांच के लिए भेजा गया था। विस्फोट की तीव्रता से कई तरह की आशंकाएं जताई गई थीं। पुलिस ने जांच के बाद मकान को सील कर दिया था। घटना वाली रात ही पुलिस ने पूर्व विधायक के बेटे अविनाश उर्फ विक्की, अभिषेक उर्फ सिक्की, ईशु चौरसिया, रामवीर यादव, रासू मिश्रा और भैया लाल पर प्राथमिकी दर्ज की थी। सभी घायलों को अलग-अलग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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नूरपुर निवासी भैयालाल ने 31 मार्च को कानपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इसके बाद भी पुलिस किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं कर सकी थी। इस बीच पूर्व विधायक के बेटे हाईकोर्ट चले गए। वहां से सात मई को गिरफ्तारी पर रोक का आदेश हो गया था। इसके बाद भी पुलिस ने जांच के नाम पर मकान को नहीं खोला और वहां दो सुरक्षा कर्मी तैनात रहे। जबकि पूर्व विधायक की पत्नी पूर्व पालिका अध्यक्ष दमयंती सिंह ने डीएम व एसपी से मकान खोलने के लिए कई बार अर्जी दीं। सुनवाई न होने पर उनके बेटे ने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसकी खबर अमर उजाला में छपने के बाद 20 जून को पुलिस ने पूर्व पालिकाध्यक्ष को बुलाकर मकान की चाबी सौंप दी थी। अब इस मामले में दूसरे घायल शहर की बटुआ वाली गली मदारवाड़ी गली निवासी ईशु चौरसिया ने अपने घर पर ही शुक्रवार देर रात दम तोड़ दिया।
शहर कोतवाल धर्मेंद्र सिंह गहलोत ने बताया कि पोस्टमार्टम कराया गया है। विवेचना चल रही है। तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
कई सवालों के पुलिस को खोजने होंगे जवाब
सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह के घर में विस्फोट के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए घायल हुए सभी छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। साथ ही घटना के बाद पुलिस अधिकारियों व अन्य लोगों ने गैस सिलिंडर सुरक्षित होने की बात कही थी। मौके पर सिलिंडर आदि फटने जैसा कोई तथ्य भी पुलिस या कोई अन्य जांच एजेंसी प्रस्तुत नहीं कर सकी थी। इसके चलते ही विस्फोट को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई थीं। पुलिस ने भी जांच के लिए तीन माह तक मकान सील रखा था। दो-तीन बार पूरे मकान को खंगाला भी गया था। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि पड़ोसी के मकान के शीशे टूट गए थे। अब लोगों का कहना है कि यदि गैस रिसाव से विस्फोट होता तो आग भी लग सकती थी पर आग नहीं लगी थी। जबकि एफएसएल की रिपोर्ट में विस्फोट किसी पदार्थ से नहीं बल्कि रसोई गैस जैसे किसी अन्य स्रोत से होने की बात कही गई थी। इसके चलते ही हाईकोर्ट से आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक का आदेश हुआ था। अब दो लोगों की मौत के बाद इस मामले को लेकर कई सवाल हैं, जिन्हें पुलिस को अपनी विवेचना में देना ही होगा।
एक घंटे में हुआ पोस्टमार्टम : ईशु चौरसिया का डॉक्टर ने करीब एक घंटे में पोस्टमार्टम किया। सूत्रों के मुताबिक पेट व छोटी आंत में गंभीर संक्रमण और फेफड़ों में पस जमा होने से मौत की पुष्टि की गई है। हाथ-पैर व चेहरे पर जले के निशान थे। बाएं पैर व कूल्हे में तीन पुराने घाव के निशान मिले।