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Farrukhabad News: सभी राज्यों में और बढ़ी मक्का की मांग, 2200 रुपये क्विंटल भाव
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कमालगंज। आलू के घाटे में फंसे किसानों को सीजन जाते-जाते मक्का ने और राहत दी है। मक्का का भाव 2200 रुपये क्विंटल तक जा पहुंचा है। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश सहित इथेनॉल, मुर्गी दाना, पशु आहार व खाने के आइटम से जुड़ी फैक्ट्रियों वाले सभी राज्यों में मक्का की मांग बढ़ी है। रोजाना 10 से 15 ट्रक माल बाहर भेजा जा रहा है।
चावल और गेहूं के बाद मक्का प्रमुख अनाजों में है। इसे मोटा अनाज भी कहा जाता है। कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन-बी व अन्य खनिज प्रचुरता में होते हैं। इसकी खपत कई तरह की फैक्ट्रियों में हो रही है। इस बार शुरुआती सीजन में मक्का का भाव 1900 रुपये क्विंटल खुला था। बढ़ते-बढ़ते अब 2200 रुपये तक पहुंच गया है। मंडी व मंडी के बाहर स्थित आढ़तों पर आमद कुल मिलाकर 800 से 900 पैकेट की ही रह गई है। लेकिन, भाव लगातार बढ़ रहे हैं। पहले खरीदा गया माल भी कई आढ़तों पर भरा है। कुछ व्यापारियों के यहां मंदी में खरीदा गया माल भी है, वह अब भाव बढ़ने पर निकाल रहे हैं।
कुछ किसानों ने बोरियों में भरकर मक्के की अड़िया रख ली
- कुछ किसानों ने भाव बढ़ने के इंतजार में अपने यहां मक्के के भुट्टों (अड़िया) को बोरियों में भरकर रख लिया है। बारिश में सूखने की समस्या से बचने के लिए भी अड़िया भरकर रखी गई। इन किसानों को भी बढ़े हुए भाव का फायदा मिल सकेगा। आढ़ती संघ के अध्यक्ष सुनील गुप्ता कहते हैं कि मक्का की मांग चारों ओर से बनी हुई है, आमद बहुत कम रह गई है।
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चावल और गेहूं के बाद मक्का प्रमुख अनाजों में है। इसे मोटा अनाज भी कहा जाता है। कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन-बी व अन्य खनिज प्रचुरता में होते हैं। इसकी खपत कई तरह की फैक्ट्रियों में हो रही है। इस बार शुरुआती सीजन में मक्का का भाव 1900 रुपये क्विंटल खुला था। बढ़ते-बढ़ते अब 2200 रुपये तक पहुंच गया है। मंडी व मंडी के बाहर स्थित आढ़तों पर आमद कुल मिलाकर 800 से 900 पैकेट की ही रह गई है। लेकिन, भाव लगातार बढ़ रहे हैं। पहले खरीदा गया माल भी कई आढ़तों पर भरा है। कुछ व्यापारियों के यहां मंदी में खरीदा गया माल भी है, वह अब भाव बढ़ने पर निकाल रहे हैं।
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कुछ किसानों ने बोरियों में भरकर मक्के की अड़िया रख ली
- कुछ किसानों ने भाव बढ़ने के इंतजार में अपने यहां मक्के के भुट्टों (अड़िया) को बोरियों में भरकर रख लिया है। बारिश में सूखने की समस्या से बचने के लिए भी अड़िया भरकर रखी गई। इन किसानों को भी बढ़े हुए भाव का फायदा मिल सकेगा। आढ़ती संघ के अध्यक्ष सुनील गुप्ता कहते हैं कि मक्का की मांग चारों ओर से बनी हुई है, आमद बहुत कम रह गई है।
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