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फर्जीवाड़ा : भूमिहीन 4363 किसानों का कर दिया बीमा
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फर्रुखाबाद। फसल बीमा योजना के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है। पहले भूमिहीन किसानों को लाखों का क्लेम दे दिया गया। अब भूमिहीन किसानों के आवेदन के सहारे फिर घोटाले की तैयारी थी। हालांकि 4363 फर्जी किसानों का फसल बीमा करने का मामला पकड़ में आया तो उनके आवेदन निरस्त कर दिए गए।
किसानों को आपदा से उबारने के लिए फसल बीमा योजना चल रही है। वहीं बीमा व बैंक कर्मियों की मिलीभगत से आपदा को अवसर मानकर खेल किया जा रहा है। 1.30 करोड़ का गोलमाल का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि भूमिहीन किसानों का फसल बीमा करने का मामला फिर सामने आ गया। जिन किसानों का फसल बीमा किया गया, उस गाटा संख्या की जमीन उस किसान के नाम पर ही नहीं निकली। बैंक कर्मियों के खेल के चलते भूमि का बिना सत्यापन किए ही उनके केसीसी खाते से किस्त की धनराशि भी कट गई। कृषि विभाग व बीमा कंपनी ने जब किसान का विवरण जमीन के गाटा संख्या से मिलाया तब पता चला कि वह गाटा संख्या उस किसान के नाम पर है ही नहीं।
चकबंदी प्रक्रिया वाले अधिकांश गांवों के किसान शामिल
जिन किसानों के आवेदन निरस्त किए गए हैं, उनमें से अधिकांश चकबंदी प्रक्रिया वाले गांवों के हैं। ये किसान आठ से दस गांवों के हैं। खरीफ 2025-26 सीजन में कुल 21452 किसानों का बीमा किया गया। 48 किसानों ने स्वयं बीमा कराया था, जबकि शेष किसानों का बैंकों से ही केसीसी खाते से किस्त काटकर फसल बीमा कर दिया गया। कुल एक करोड़ 90 लाख 56 हजार रुपये प्रीमियम जमा हुई। बीमा कंपनी ने दो करोड़ 72 लाख 77 हजार रुपये मुआवजा दिया। फर्जी पाए गए 3,895 किसानों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। वहीं, रबी 2025-26 में 8,986 किसानों का फसल बीमा किया गया। 94 लाख 24 हजार रुपये किसानों से प्रीमियम जमा कराई गई, इसमें 468 किसान फर्जी पाए गए।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
उपकृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि चकबंदी वाले बंथलशाहपुर, बलीपट्टी रानीगांव, सबासी, गुडेरा आदि गांव के 4363 किसानों के नाम का संबंधित गाटा संख्या से मिलान नहीं हुआ। उन्होंने कृषि निदेशक सांख्यिकी को रिपोर्ट भेज दी थी। किसान का भूमि के विवरण से मिलान न होने पर एचडीएफसी एरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की फसल बीमा का आवेदन निरस्त कर दिया गया। बैंक से किसानों की भूमि का सत्यापन किए बिना ही फसल बीमा कर दिया गया था। निदेशालय के निर्देशानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। एचडीएफसी एरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के स्टेट हेड आकाश गुप्ता ने बताया कि किसान का भूमि के विवरण से मिलान न होने पर बीमा आवेदन निरस्त किए गए हैं।
किसानों को लाखों का हो चुका फर्जी भुगतान
फसल बीमा योजना में चकबंदी वाले गांव के किसानों का जमीन से विवरण का मिलान न होने पर आवेदन निरस्त किए गए हैं। इन्हीं गांवों के किसानों को पूर्व में चार-चार लाख रुपये फर्जी भुगतान किया जा चुका है। मिलीभगत के खेल में 1.30 करोड़ रुपये के हुए घोटाले में प्राथमिकी दर्ज है। हालांकि, पुलिस ने कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी है।
किसानों को आपदा से उबारने के लिए फसल बीमा योजना चल रही है। वहीं बीमा व बैंक कर्मियों की मिलीभगत से आपदा को अवसर मानकर खेल किया जा रहा है। 1.30 करोड़ का गोलमाल का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि भूमिहीन किसानों का फसल बीमा करने का मामला फिर सामने आ गया। जिन किसानों का फसल बीमा किया गया, उस गाटा संख्या की जमीन उस किसान के नाम पर ही नहीं निकली। बैंक कर्मियों के खेल के चलते भूमि का बिना सत्यापन किए ही उनके केसीसी खाते से किस्त की धनराशि भी कट गई। कृषि विभाग व बीमा कंपनी ने जब किसान का विवरण जमीन के गाटा संख्या से मिलाया तब पता चला कि वह गाटा संख्या उस किसान के नाम पर है ही नहीं।
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चकबंदी प्रक्रिया वाले अधिकांश गांवों के किसान शामिल
जिन किसानों के आवेदन निरस्त किए गए हैं, उनमें से अधिकांश चकबंदी प्रक्रिया वाले गांवों के हैं। ये किसान आठ से दस गांवों के हैं। खरीफ 2025-26 सीजन में कुल 21452 किसानों का बीमा किया गया। 48 किसानों ने स्वयं बीमा कराया था, जबकि शेष किसानों का बैंकों से ही केसीसी खाते से किस्त काटकर फसल बीमा कर दिया गया। कुल एक करोड़ 90 लाख 56 हजार रुपये प्रीमियम जमा हुई। बीमा कंपनी ने दो करोड़ 72 लाख 77 हजार रुपये मुआवजा दिया। फर्जी पाए गए 3,895 किसानों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। वहीं, रबी 2025-26 में 8,986 किसानों का फसल बीमा किया गया। 94 लाख 24 हजार रुपये किसानों से प्रीमियम जमा कराई गई, इसमें 468 किसान फर्जी पाए गए।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
उपकृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि चकबंदी वाले बंथलशाहपुर, बलीपट्टी रानीगांव, सबासी, गुडेरा आदि गांव के 4363 किसानों के नाम का संबंधित गाटा संख्या से मिलान नहीं हुआ। उन्होंने कृषि निदेशक सांख्यिकी को रिपोर्ट भेज दी थी। किसान का भूमि के विवरण से मिलान न होने पर एचडीएफसी एरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की फसल बीमा का आवेदन निरस्त कर दिया गया। बैंक से किसानों की भूमि का सत्यापन किए बिना ही फसल बीमा कर दिया गया था। निदेशालय के निर्देशानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। एचडीएफसी एरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के स्टेट हेड आकाश गुप्ता ने बताया कि किसान का भूमि के विवरण से मिलान न होने पर बीमा आवेदन निरस्त किए गए हैं।
किसानों को लाखों का हो चुका फर्जी भुगतान
फसल बीमा योजना में चकबंदी वाले गांव के किसानों का जमीन से विवरण का मिलान न होने पर आवेदन निरस्त किए गए हैं। इन्हीं गांवों के किसानों को पूर्व में चार-चार लाख रुपये फर्जी भुगतान किया जा चुका है। मिलीभगत के खेल में 1.30 करोड़ रुपये के हुए घोटाले में प्राथमिकी दर्ज है। हालांकि, पुलिस ने कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी है।