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Farrukhabad News: नहीं मिले खरीदार, 200 ट्राली आलू बैरंग वापस
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Wed, 11 Mar 2026 12:38 AM IST
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फोटो-25 सातनपुर मंडी में दूसरे दिन भी आलू न बिकने से खड़ी ट्रालियां। संवाद
- फोटो : 1
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फर्रुखाबाद। होली के बाद पारा चढ़ने से बढ़ी गर्मी आलू किसानों को बर्बादी की राह पर ढकेल रही है। खेतों में लगा आलू जब किसान मंडी में लेकर पहुंचे तो वहां रात गुजारने के बाद दिन में भी खरीदार नहीं मिले। इससे मंगलवार शाम तक आलू भरे करीब 200 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर किसान वापस चले गए। किसानों की मंडी में जेब भरने के बजाय भाड़े का दोगुना खर्च का बोझ और बढ़ गया।
होली के बाद गर्मी बढ़ने के चलते खेतों में लगा आलू सुरक्षित न देख किसान शहर की सातनपुर मंडी का रुख कर रहे हैं। जाम की झाम से बचने के लिए सोमवार रात से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली से आलू लेकर मंडी पहुंचने लगे। सुबह होते-होते मंडी सड़क तक करीब तीन किमी लंबा जाम लग गया। मंडी में करीब 250 ट्रक आलू पहुंचा। वाहनों से खचाखच भरी मंडी में आलू उतारने की भी किसानों को जगह नहीं मिली। खरीद शुरू हुई तो भाव सुनकर ही किसानों के चेहरे मुरझा गए।
कमजोर आलू 201 रुपये से लेकर 301 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य आलू 301 रुपये से लेकर 401 रुपये व छट्टा आलू 401 से 451 रुपये क्विंटल बिका। वहीं नीदरलैंड 551 से 751 रुपये प्रति क्विंटल बिक्री हुई। पिछले दो दिनों में गर्मी बढ़ने से धूप में आलू दागी हो गया। मंडी में दागी आलू की भरमार होने से व्यापारी भी खरीदने से तैयार नहीं हो रहे हैं।
इससे किसानों को औने-पौने दामों में आलू बेचने से मजदूरी भी नहीं निकल रही है। सैकड़ों क्विंटल दागी आलू मंडी में सड़ रहा। उसे आवारा जानवर भी नहीं खाते। आढ़तियों ने किसानों से अपील की कि आलू छाया में रोककर मंडी में धीरे-धीरे लाएं। जल्दबाजी में बड़ा घाटा उठाना पड़ सकता है। वहीं सेंट्रल जेल चौराहे से लेकर देवरामपुर रेलवे क्रॉसिंग तक लगा जाम खुलवाने में यातायात के सिपाहियों को दिन भर पसीना बहाना पड़ा।
तेज धूप और गर्मी से सड़ने लगा आलू
मंदी की मार झेल चुके किसान शीतगृहों में आलू भंडारण से कतरा रहे हैं। इससे किसानों ने आलू खोदकर खेतों में ढेर लगा दिया। अब दिनों-दिन गर्मी बढ़ने से ढेर में लगा आलू सड़ने लगा है। इससे आलू लेकर किसान मंडी पहुंच रहे हैं। मंडी में आलू की आवक बढ़ने और धूप से आलू की गुणवत्ता खराब होने से व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं हो रहे हैं। खरीदार न मिलने से दो-दो रातें मंडी में गुजारकर किसानों को आलू वापस लेकर जाना पड़ रहा है।
आलू न बिकने से वापस लेकर जा रहे
सातनपुर मंडी से आलू वापस लेकर जा रहे मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव तेरा निवासी किसान विमल ने बताया कि वह रविवार रात में आलू लेकर मंडी आए थे। दो रात और दो दिन मंडी में बिताए। किसी भाव आलू न बिकने से वापस लेकर जा रहे हैं। अब शीतगृह में भंडारण करना मजबूरी है। गांव गैसिंगपुर निवासी सौरभ व जितेंद्र ने बताया कि व्यापारी भी गच्चा दे रहे हैं। छट्टा आलू होने से व्यापारी ने 701 रुपये प्रति क्विंटल मांगा, बाद में बिना खरीदे छोड़ दिया। इसके बाद कोई खरीदार न आने से वह आलू वापस लेकर जा रहे हैं।
मंडी में रात-दिन गुजारने के बाद नहीं बिका आलू
शमसाबाद क्षेत्र के गांव भगवानपुर किसान अभिनंदन ने बताया कि वह सोमवार रात दो ट्रैक्टर-ट्रॉली से 200 पैकेट आलू लेकर आए थे। मंडी में रात-दिन गुजारने के बाद कोई भाव आलू नहीं बिका। अभी इंतजार कर रहे हैं कि शायद आलू बिक जाए तो खोदाई की मजदूरी और भाड़ा ही जेब से नहीं देना होगा।
अब शीतगृह में भंडारण करना मजबूरी
नवाबगंज क्षेत्र के गांव महमदपुर कामराज निवासी रामजीत यादव ने बताया कि उन्होंने दो भैंसें बेचकर 40 बीघा आलू बोया। इसके अलावा जेवर गिरवीं रखकर लागत लगाई। अब मंडी में किसी भाव आलू न बिकने से वापस लेकर जा रहे हैं। वह बर्बाद हो गए। अब शीतगृह में भंडारण करना मजबूरी है।
पल्लेदार न मिलने से नहीं हो पा रही लोडिंग, सड़ने लगा आलू
सातनपुर मंडी में दिन भर जाम लगने से व्यापारी आलू खरीदकर रात में ट्रक में लोडिंग कराते हैं। आलू आढ़ती रिंकू वर्मा व अरविंद राजपूत का कहना है कि शीतगृहों में पल्लेदारों के व्यस्त होने से मंडी में पल्लेदारों की संख्या घट गई है। आलू की आवक बढ़ने से दिन में पल्लेदार थक जाते हैं, इससे रात में पल्लेदार ढूंढे नहीं मिलते। इससे धूप में लगा आलू दागी हो रहा है। जब व्यापारी आलू लेकर पूर्वांचल या अन्य प्रांतों में पहुंचते हैं, तब तक बड़ी मात्रा में आलू ट्रक में ही सड़ जाता है। आलू की मंदी और मौसम की गर्मी से किसानों के साथ व्यापारियों को भी घाटा उठाना पड़ रहा है।
वर्जन
आलू की आवक बढ़ने के साथ भाव भी गिर गया है। मंदी का यह भी एक कारण है कि पश्चिम बंगाल में आलू का बंपर उत्पादन होने से मांग नहीं आ रही है। । गर्मी में आलू खराब होने से व्यापारी आलू की अधिक खरीद से बच रहे हैं। यदि आलू के निर्यात को प्रोत्साहन मिले तो भाव में सुधार हो सकता है। फिलहाल मंडी में जाम न लगे, इसके लिए यातायात प्रभारी को पत्र भी भेजा गया। -अनूप कुमार दीक्षित, मंडी सचिव
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होली के बाद गर्मी बढ़ने के चलते खेतों में लगा आलू सुरक्षित न देख किसान शहर की सातनपुर मंडी का रुख कर रहे हैं। जाम की झाम से बचने के लिए सोमवार रात से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली से आलू लेकर मंडी पहुंचने लगे। सुबह होते-होते मंडी सड़क तक करीब तीन किमी लंबा जाम लग गया। मंडी में करीब 250 ट्रक आलू पहुंचा। वाहनों से खचाखच भरी मंडी में आलू उतारने की भी किसानों को जगह नहीं मिली। खरीद शुरू हुई तो भाव सुनकर ही किसानों के चेहरे मुरझा गए।
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कमजोर आलू 201 रुपये से लेकर 301 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य आलू 301 रुपये से लेकर 401 रुपये व छट्टा आलू 401 से 451 रुपये क्विंटल बिका। वहीं नीदरलैंड 551 से 751 रुपये प्रति क्विंटल बिक्री हुई। पिछले दो दिनों में गर्मी बढ़ने से धूप में आलू दागी हो गया। मंडी में दागी आलू की भरमार होने से व्यापारी भी खरीदने से तैयार नहीं हो रहे हैं।
इससे किसानों को औने-पौने दामों में आलू बेचने से मजदूरी भी नहीं निकल रही है। सैकड़ों क्विंटल दागी आलू मंडी में सड़ रहा। उसे आवारा जानवर भी नहीं खाते। आढ़तियों ने किसानों से अपील की कि आलू छाया में रोककर मंडी में धीरे-धीरे लाएं। जल्दबाजी में बड़ा घाटा उठाना पड़ सकता है। वहीं सेंट्रल जेल चौराहे से लेकर देवरामपुर रेलवे क्रॉसिंग तक लगा जाम खुलवाने में यातायात के सिपाहियों को दिन भर पसीना बहाना पड़ा।
तेज धूप और गर्मी से सड़ने लगा आलू
मंदी की मार झेल चुके किसान शीतगृहों में आलू भंडारण से कतरा रहे हैं। इससे किसानों ने आलू खोदकर खेतों में ढेर लगा दिया। अब दिनों-दिन गर्मी बढ़ने से ढेर में लगा आलू सड़ने लगा है। इससे आलू लेकर किसान मंडी पहुंच रहे हैं। मंडी में आलू की आवक बढ़ने और धूप से आलू की गुणवत्ता खराब होने से व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं हो रहे हैं। खरीदार न मिलने से दो-दो रातें मंडी में गुजारकर किसानों को आलू वापस लेकर जाना पड़ रहा है।
आलू न बिकने से वापस लेकर जा रहे
सातनपुर मंडी से आलू वापस लेकर जा रहे मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव तेरा निवासी किसान विमल ने बताया कि वह रविवार रात में आलू लेकर मंडी आए थे। दो रात और दो दिन मंडी में बिताए। किसी भाव आलू न बिकने से वापस लेकर जा रहे हैं। अब शीतगृह में भंडारण करना मजबूरी है। गांव गैसिंगपुर निवासी सौरभ व जितेंद्र ने बताया कि व्यापारी भी गच्चा दे रहे हैं। छट्टा आलू होने से व्यापारी ने 701 रुपये प्रति क्विंटल मांगा, बाद में बिना खरीदे छोड़ दिया। इसके बाद कोई खरीदार न आने से वह आलू वापस लेकर जा रहे हैं।
मंडी में रात-दिन गुजारने के बाद नहीं बिका आलू
शमसाबाद क्षेत्र के गांव भगवानपुर किसान अभिनंदन ने बताया कि वह सोमवार रात दो ट्रैक्टर-ट्रॉली से 200 पैकेट आलू लेकर आए थे। मंडी में रात-दिन गुजारने के बाद कोई भाव आलू नहीं बिका। अभी इंतजार कर रहे हैं कि शायद आलू बिक जाए तो खोदाई की मजदूरी और भाड़ा ही जेब से नहीं देना होगा।
अब शीतगृह में भंडारण करना मजबूरी
नवाबगंज क्षेत्र के गांव महमदपुर कामराज निवासी रामजीत यादव ने बताया कि उन्होंने दो भैंसें बेचकर 40 बीघा आलू बोया। इसके अलावा जेवर गिरवीं रखकर लागत लगाई। अब मंडी में किसी भाव आलू न बिकने से वापस लेकर जा रहे हैं। वह बर्बाद हो गए। अब शीतगृह में भंडारण करना मजबूरी है।
पल्लेदार न मिलने से नहीं हो पा रही लोडिंग, सड़ने लगा आलू
सातनपुर मंडी में दिन भर जाम लगने से व्यापारी आलू खरीदकर रात में ट्रक में लोडिंग कराते हैं। आलू आढ़ती रिंकू वर्मा व अरविंद राजपूत का कहना है कि शीतगृहों में पल्लेदारों के व्यस्त होने से मंडी में पल्लेदारों की संख्या घट गई है। आलू की आवक बढ़ने से दिन में पल्लेदार थक जाते हैं, इससे रात में पल्लेदार ढूंढे नहीं मिलते। इससे धूप में लगा आलू दागी हो रहा है। जब व्यापारी आलू लेकर पूर्वांचल या अन्य प्रांतों में पहुंचते हैं, तब तक बड़ी मात्रा में आलू ट्रक में ही सड़ जाता है। आलू की मंदी और मौसम की गर्मी से किसानों के साथ व्यापारियों को भी घाटा उठाना पड़ रहा है।
वर्जन
आलू की आवक बढ़ने के साथ भाव भी गिर गया है। मंदी का यह भी एक कारण है कि पश्चिम बंगाल में आलू का बंपर उत्पादन होने से मांग नहीं आ रही है। । गर्मी में आलू खराब होने से व्यापारी आलू की अधिक खरीद से बच रहे हैं। यदि आलू के निर्यात को प्रोत्साहन मिले तो भाव में सुधार हो सकता है। फिलहाल मंडी में जाम न लगे, इसके लिए यातायात प्रभारी को पत्र भी भेजा गया। -अनूप कुमार दीक्षित, मंडी सचिव

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