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Farrukhabad News: बेमौसम बारिश से आम की सत्तर फीसदी फसल बर्बाद
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फोटो-7 आम के पेड़ की डालियों पर लगे आम। संवाद
- फोटो : अग्निकांड के बाद शोकाकुल परिवार।
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कायमगंज। अप्रैल में भीषण गर्मी के बजाय ठंडी रातों, बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस बार करीब सत्तर फीसदी आम की फसल खराब हो चुकी है, जिससे किसानों को बड़ा झटका लगा है। बची हुई फसल पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
मार्च की शुरुआत में तापमान बढ़ने से आम के पेड़ों पर अच्छी मात्रा में बौर आया था। इससे बागवानों को इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी थी। हालांकि, मार्च के आखिर में मौसम ने अचानक करवट ले ली। रात में ठंड और दिन में हल्की गर्मी के उतार-चढ़ाव से बौर पर प्रतिकूल असर पड़ा। इसके बाद हुई बारिश और तेज हवा ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। कायमगंज क्षेत्र दशहरी, चौसा, फजली, मुंबई और टिकारी जैसी प्रसिद्ध आम की किस्मों के लिए जाना जाता है। यहां का आम जयपुर, दिल्ली और आगरा की मंडियों में भेजा जाता है। पिछले वर्ष भी रंगत खराब होने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ा था। कृषि वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र कुमार ने कहा कि इस समय आम में मटर साइज फल पर एनपीके व बोरॉन का स्प्रे करें। इससे फल मजबूत होगा और गिरावट कम होगी। कीट नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड उपयोगी है। फफूंद से बचाव को हेक्साकोनाजोल का छिड़काव करें। स्प्रे सुबह-शाम ही करें।
आम के पेड़ों से बौर झड़ गया
बागवान दिनेश गंगवार ने बताया कि उनके गांव बरझाला, मीरपुर, पपड़ी, रायपुर और झब्बूपुर सहित कई गांवों में आम के पेड़ों से बौर झड़ गया है। जो फल लगे भी थे, वे विकसित नहीं हो सके। अब पेड़ों पर आम ढूंढने पड़ रहे हैं। ठंडी रातों के कारण फल सिकुड़ गए हैं और हल्की हवा चलने पर ही गिर रहे हैं। कई स्थानों पर फलों में सड़न भी देखी जा रही है।
बची फसल पर भी खतरा
गांव पपड़ी निवासी बागवान अशफाक ने बताया कि बौर आने के बाद ठंडक ने आम को बढ़ने नहीं दिया। अब हालात ऐसे हैं कि पेड़ों पर बहुत कम आम नजर आ रहे हैं। यदि मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ तो बची हुई फसल को भी नुकसान हो सकता है। यह स्थिति किसानों के लिए चिंताजनक है।
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मार्च की शुरुआत में तापमान बढ़ने से आम के पेड़ों पर अच्छी मात्रा में बौर आया था। इससे बागवानों को इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी थी। हालांकि, मार्च के आखिर में मौसम ने अचानक करवट ले ली। रात में ठंड और दिन में हल्की गर्मी के उतार-चढ़ाव से बौर पर प्रतिकूल असर पड़ा। इसके बाद हुई बारिश और तेज हवा ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। कायमगंज क्षेत्र दशहरी, चौसा, फजली, मुंबई और टिकारी जैसी प्रसिद्ध आम की किस्मों के लिए जाना जाता है। यहां का आम जयपुर, दिल्ली और आगरा की मंडियों में भेजा जाता है। पिछले वर्ष भी रंगत खराब होने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ा था। कृषि वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र कुमार ने कहा कि इस समय आम में मटर साइज फल पर एनपीके व बोरॉन का स्प्रे करें। इससे फल मजबूत होगा और गिरावट कम होगी। कीट नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड उपयोगी है। फफूंद से बचाव को हेक्साकोनाजोल का छिड़काव करें। स्प्रे सुबह-शाम ही करें।
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आम के पेड़ों से बौर झड़ गया
बागवान दिनेश गंगवार ने बताया कि उनके गांव बरझाला, मीरपुर, पपड़ी, रायपुर और झब्बूपुर सहित कई गांवों में आम के पेड़ों से बौर झड़ गया है। जो फल लगे भी थे, वे विकसित नहीं हो सके। अब पेड़ों पर आम ढूंढने पड़ रहे हैं। ठंडी रातों के कारण फल सिकुड़ गए हैं और हल्की हवा चलने पर ही गिर रहे हैं। कई स्थानों पर फलों में सड़न भी देखी जा रही है।
बची फसल पर भी खतरा
गांव पपड़ी निवासी बागवान अशफाक ने बताया कि बौर आने के बाद ठंडक ने आम को बढ़ने नहीं दिया। अब हालात ऐसे हैं कि पेड़ों पर बहुत कम आम नजर आ रहे हैं। यदि मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ तो बची हुई फसल को भी नुकसान हो सकता है। यह स्थिति किसानों के लिए चिंताजनक है।

फोटो-7 आम के पेड़ की डालियों पर लगे आम। संवाद- फोटो : अग्निकांड के बाद शोकाकुल परिवार।

फोटो-7 आम के पेड़ की डालियों पर लगे आम। संवाद- फोटो : अग्निकांड के बाद शोकाकुल परिवार।