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Farrukhabad News: आंखों में आंसू, हाथों में हथौड़ा...गंगा की धार में उजड़े जीवनभर के सपने
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फर्रुखाबाद। किसी ने वर्षों तक मजदूरी की, किसी ने खेतों में पसीना बहाकर पाई-पाई जोड़कर घर बनाया। सपना सिर्फ इतना था कि बच्चों के सिर पर अपनी छत हो। वह सपना पूरा भी हुआ लेकिन ज्यादा दिन नहीं टिक सका। गंगा की बाढ़ ने दिलीप की मड़ैया के ग्रामीणों के सामने ऐसा संकट खड़ा कर दिया है कि उन्हें अपने ही हाथों से आशियाने तोड़ने पड़ रहे हैं।
तहसील सदर क्षेत्र के गांव दिलीप की मड़ैया में गंगा की तेज धार से गांव में कटान बड़ी तेजी से हो रहा है। इसके चलते कई मकान कटान से बह गए हैं। जो मकान बचे हैं, उन पर हथौड़े चल रहे हैं। अब मकान टूटने की आवाज के साथ ग्रामीणों की सिसकियां सुनाई दे रही हैं। जिन दीवारों के बीच कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब बाढ़ के पानी और बेबसी का मंजर दिखाई दे रहा है।
फोटो-23 बेलवती। संवाद
गांव की बेलवती कहती हैं कि जिंदगी भर मजदूरी करके मकान बनाया था। बच्चों को लगा था कि अब उनका अपना घर है। लेकिन बाढ़ ने वह सपना भी छीन लिया।
फोटो-24 राजवीर। संवाद
गांव के राजवीर ने कहा कि घर बनाने में जितनी मेहनत लगी, उतना दर्द उसे तोड़ने में हो रहा है। दीवार पर हथौड़ा मारते हैं तो ऐसा लगता है जैसे अपनी जिंदगी के किसी हिस्से को तोड़ रहे हों।
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फोटो-25 तारावती। संवाद
तारावती रोते हुए कहती हैं कि बच्चे छत पर हथौड़ा चलाकर मकान तोड़ रहे हैं। हर हथौड़ा मेरे दिल पर लगता है। चिंता बच्चों को लेकर है। कैसे घर बनाया अब उजड़ रहा है। रात-दिन मेहनत कर मकान बनाया था। गंगा की मुख्यधारा होने से गांव ही उजड़ गया।
फोटो- 26 रमेश। संवाद
रमेश कहते हैं कि कई बार बाढ़ देखी है, लेकिन इस बार हालात बेहद कठिन है। लोगों ने कहा कि गंगा मईया ने उनका सब कुछ तबाह कर दिया। रात में पूरा मकान गंगा में समा गया।
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तहसील सदर क्षेत्र के गांव दिलीप की मड़ैया में गंगा की तेज धार से गांव में कटान बड़ी तेजी से हो रहा है। इसके चलते कई मकान कटान से बह गए हैं। जो मकान बचे हैं, उन पर हथौड़े चल रहे हैं। अब मकान टूटने की आवाज के साथ ग्रामीणों की सिसकियां सुनाई दे रही हैं। जिन दीवारों के बीच कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब बाढ़ के पानी और बेबसी का मंजर दिखाई दे रहा है।
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फोटो-23 बेलवती। संवाद
गांव की बेलवती कहती हैं कि जिंदगी भर मजदूरी करके मकान बनाया था। बच्चों को लगा था कि अब उनका अपना घर है। लेकिन बाढ़ ने वह सपना भी छीन लिया।
फोटो-24 राजवीर। संवाद
गांव के राजवीर ने कहा कि घर बनाने में जितनी मेहनत लगी, उतना दर्द उसे तोड़ने में हो रहा है। दीवार पर हथौड़ा मारते हैं तो ऐसा लगता है जैसे अपनी जिंदगी के किसी हिस्से को तोड़ रहे हों।
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फोटो-25 तारावती। संवाद
तारावती रोते हुए कहती हैं कि बच्चे छत पर हथौड़ा चलाकर मकान तोड़ रहे हैं। हर हथौड़ा मेरे दिल पर लगता है। चिंता बच्चों को लेकर है। कैसे घर बनाया अब उजड़ रहा है। रात-दिन मेहनत कर मकान बनाया था। गंगा की मुख्यधारा होने से गांव ही उजड़ गया।
फोटो- 26 रमेश। संवाद
रमेश कहते हैं कि कई बार बाढ़ देखी है, लेकिन इस बार हालात बेहद कठिन है। लोगों ने कहा कि गंगा मईया ने उनका सब कुछ तबाह कर दिया। रात में पूरा मकान गंगा में समा गया।