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Farrukhabad News: सुनवाई में मायके के प्रमाण न मिलने से महिलाएं परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Fri, 30 Jan 2026 01:16 AM IST
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फोटो-19 गांव कुबेरपुर में नोटिस पर सुनवाई करते एडीओ सुखदेव सिंह। संवाद
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कायमगंज। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग न होने वाले मतदाताओं को जारी नोटिसों पर गांव कुबेरपुर में सुनवाई की गई। 286 से 304 तक के बूथों की सुनवाई एडीओ सुखदेव सिंह ने की। सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता अपने अभिलेख लेकर पहुंचे पर मायके से जुड़े प्रमाण न मिलने से महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एआरओ ने मतदाताओं की ओर से प्रस्तुत किए गए अभिलेखों की जांच कर उनकी समस्याएं सुनीं। जिन मतदाताओं ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए, उनकी शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। वहीं, कुछ मतदाता 2003 की सूची में अपने माता-पिता का नाम और पहचान प्रमाणित करने में सफल रहे, जबकि अभिलेखों के अभाव में कई लोग मायूस होकर लौट गए।
सबसे अधिक दिक्कत उन महिलाओं को हुई, जिनका विवाह होने के बाद वोट ससुराल में दर्ज है। ऐसे मामलों में उनसे मायके का विवरण और अभिलेख मांगे जा रहे हैं। मायके से संबंधित प्रमाण उपलब्ध न होने पर उनका आवेदन अटक गया। इसके अलावा दो अलग-अलग जिलों में वोट दर्ज होने या गणना प्रपत्र अधूरे भरने वाले लोग भी जवाब देने पहुंचे, लेकिन अभिलेख न होने पर अधिकारी भी असहाय नजर आए।
गांव कुबेरपुर की शकीला बेगम पत्नी राजिद का नाम बूथ संख्या 280 पर 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है, लेकिन उनका वोट कौशांबी जिले के धनगौर में सरिता देवी के नाम से भी दर्ज मिला। वहां की बीएलओ से वार्ता के बाद नाम कटवा दिया गया। बृहस्पतिवार को शकीला बेगम परिवार रजिस्टर की नकल लेकर बूथ पर पहुंचीं लेकिन तकनीकी कारणों से उनका वोट अपलोड नहीं हो सका। इससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
इसी गांव की 85 वर्षीय मेहरुन्निशा और 82 वर्षीय कामिनी बेगम का मायका कुबेरपुर में ही है लेकिन माता-पिता के प्रमाण न मिलने से उनका वोट नहीं बन पा रहा है। भाई-बहनों के प्रमाण उपलब्ध होने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। नाजिमा (42) का मायका मेरापुर में है। वह भाई का प्रमाण लेकर पहुंचीं लेकिन पिता का प्रमाण न मिलने से उनका आवेदन भी लंबित रह गया। वहीं, शबनम (50) का मायका कानपुर में है, जहां से माता-पिता का कोई प्रमाण न मिलने पर उन्हें भी मायूसी झेलनी पड़ी।
कैंप में बीएलओ अमित भारती, विनीता कुमारी और श्रद्धा गंगवार मौजूद रहीं। एआरओ ने बताया कि कुल 19 बूथों पर 493 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से अब तक जरूरी कागजात प्रस्तुत करने वाले 16 मतदाताओं के फार्म अपलोड किए जा चुके हैं।
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एआरओ ने मतदाताओं की ओर से प्रस्तुत किए गए अभिलेखों की जांच कर उनकी समस्याएं सुनीं। जिन मतदाताओं ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए, उनकी शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। वहीं, कुछ मतदाता 2003 की सूची में अपने माता-पिता का नाम और पहचान प्रमाणित करने में सफल रहे, जबकि अभिलेखों के अभाव में कई लोग मायूस होकर लौट गए।
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सबसे अधिक दिक्कत उन महिलाओं को हुई, जिनका विवाह होने के बाद वोट ससुराल में दर्ज है। ऐसे मामलों में उनसे मायके का विवरण और अभिलेख मांगे जा रहे हैं। मायके से संबंधित प्रमाण उपलब्ध न होने पर उनका आवेदन अटक गया। इसके अलावा दो अलग-अलग जिलों में वोट दर्ज होने या गणना प्रपत्र अधूरे भरने वाले लोग भी जवाब देने पहुंचे, लेकिन अभिलेख न होने पर अधिकारी भी असहाय नजर आए।
गांव कुबेरपुर की शकीला बेगम पत्नी राजिद का नाम बूथ संख्या 280 पर 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है, लेकिन उनका वोट कौशांबी जिले के धनगौर में सरिता देवी के नाम से भी दर्ज मिला। वहां की बीएलओ से वार्ता के बाद नाम कटवा दिया गया। बृहस्पतिवार को शकीला बेगम परिवार रजिस्टर की नकल लेकर बूथ पर पहुंचीं लेकिन तकनीकी कारणों से उनका वोट अपलोड नहीं हो सका। इससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
इसी गांव की 85 वर्षीय मेहरुन्निशा और 82 वर्षीय कामिनी बेगम का मायका कुबेरपुर में ही है लेकिन माता-पिता के प्रमाण न मिलने से उनका वोट नहीं बन पा रहा है। भाई-बहनों के प्रमाण उपलब्ध होने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। नाजिमा (42) का मायका मेरापुर में है। वह भाई का प्रमाण लेकर पहुंचीं लेकिन पिता का प्रमाण न मिलने से उनका आवेदन भी लंबित रह गया। वहीं, शबनम (50) का मायका कानपुर में है, जहां से माता-पिता का कोई प्रमाण न मिलने पर उन्हें भी मायूसी झेलनी पड़ी।
कैंप में बीएलओ अमित भारती, विनीता कुमारी और श्रद्धा गंगवार मौजूद रहीं। एआरओ ने बताया कि कुल 19 बूथों पर 493 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से अब तक जरूरी कागजात प्रस्तुत करने वाले 16 मतदाताओं के फार्म अपलोड किए जा चुके हैं।
