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Farrukhabad News: छह की हत्या के आरोपी के साले सिपाही की कॉल डिटेल से पुलिस ने दबोचा था
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फोटो-30 गांव लखनपुर में घटना के बारे में जानकारी देतीं पीड़ित परिवार रमेश की पत्नी व बेटी। संवाद
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कायमगंज। प्रेम संबंधों के विरोध में गांव लखनपुर में 35 वर्ष पहले छह लोगों की हत्या के मामले में फरार चल रहा दोषी किशोरीलाल अपने साले सिपाही से बातचीत करने से पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसके साले समेत करीब 300 मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली। इसके बाद किशोरी लाल तक पहुंचने में सफलता मिली।
कोतवाली क्षेत्र के गांव लखनपुर निवासी अमर सिंह गांव के श्रीकृष्ण मास्टर की पुत्री को ले गया था। इसके बाद 10 अगस्त 1991 की रात अमर सिंह पक्ष के गुलजारीलाल, उनकी पत्नी रामवती, पुत्र राकेश, उमेश, धर्मेंद्र और बाबूराम की हत्या हुई थी। मामले में श्रीकृष्ण मास्टर, उनके भाई रामसेवक और किशोरीलाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। तीनों आरोपियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। बाद में रामसेवक और किशोरीलाल जमानत पर छूटने के बाद फरार हो गए।
पुलिस ने रामसेवक को 27 सितंबर 2022 को बदायूं से भंते के भेष में गिरफ्तार किया था। वह रक्षपाल नाम से रह रहा था। वहीं किशोरीलाल नोएडा की एक रेडीमेड फैक्टरी में सिलाई और डिजाइनिंग का काम कर रहा था। उसने दीपक पुत्र नंदराम के नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज बनवा रखे थे।
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प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला ने वारंट के आधार पर उसकी तलाश शुरू की। रिश्तेदारों की जानकारी जुटाने पर पता चला कि उसका साला जालौन में तैनात सिपाही है, जो मूल रूप से कन्नौज का निवासी है। पुलिस के संपर्क करने पर सिपाही ने बहनोई को पुलिस की तलाश की सूचना देकर फोन न करने की सलाह दी। इसके बावजूद पुलिस ने सर्विलांस के जरिये उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली। बुधवार को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
बेटा-बेटी की शादी का सपना लेकर जेल पहुंचा दोषी
किशोरीलाल फरारी के दौरान परिवार का पालन-पोषण करते हुए सामान्य जीवन बिता रहा था। उसकी पत्नी बेबी जनपद एटा के निधौली कला क्षेत्र के गांव गगनपुरी में रह रही है। उनके एक पुत्र निर्दोष और एक पुत्री कविता है, जो शादी योग्य हैं। पुलिस ने गगनपुरी पहुंचकर परिवार से भी पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय किशोरीलाल तुरंत समझ गया कि उसे 35 वर्ष पुराने लखनपुर हत्याकांड में पकड़ा गया है। उसने पुलिसकर्मियों से कहा, दो साल और मिल जाते तो बेटे और बेटी की शादी कर देता। अब यही अफसोस रहेगा कि बच्चों की शादी की खुशियां नहीं देख सका। वहीं, इसी हत्याकांड के दूसरे दोषी श्रीकृष्ण मास्टर की पत्नी और बच्चे मायके के गांव मिलकिया में रहकर जीवनयापन कर रहे हैं।
35 साल पुराने हत्याकांड की गांव में फिर होने लगी चर्चा
किशोरीलाल की गिरफ्तारी के बाद गांव में एक बार फिर 35 साल पुराने नरसंहार की चर्चा तेज हो गई है। गांव के बुजुर्ग सार्वजनिक स्थानों पर बैठकर उस भयावह घटना को याद कर रहे हैं। लोग बताते हैं कि प्रेम संबंधों के विरोध में एक ही परिवार के छह लोगों की हत्या कर दी गई थी।
बच्चों के दस्तावेजों में नहीं बदला पिता का नाम
किशोरीलाल ने पुलिस से बचने के लिए खुद नाम बदल लिया था लेकिन बच्चों के शैक्षिक दस्तावेज में पिता के रूप में उसका वास्तविक नाम ही दर्ज रहा। पुलिस की जांच में यही तथ्य उसके बारे में अहम सुराग साबित हुआ। फरारी के दौरान किशोरीलाल ने वर्ष 1995 में ही गांव का अपना मकान स्वामी प्रसाद को बेच दिया था। इसके बाद वह नोएडा में जाकर बस गया। वर्तमान में दोषी परिवार के नाम गांव में न मकान है और न ही कृषि भूमि। लखनपुर हत्याकांड से पहले ही अमर सिंह और युवती गांव छोड़कर चले गए थे। वर्तमान में अमर सिंह पत्नी और बच्चों के साथ एटा जिले के जसरथपुर थाना क्षेत्र के सरौठ नगरिया गांव में रह रहा है।
इज्जत की खातिर किया गया था सामूहिक हत्याकांड
कायमगंज। लखनपुर निवासी श्रीकृष्ण सरकारी शिक्षक थे और समाज में उनकी अच्छी प्रतिष्ठा थी। उनकी बेटी के गांव के ही अमर सिंह के साथ चले जाने से परिवार आहत हो गया। इसी रंजिश और तथाकथित पारिवारिक सम्मान की भावना में अमर सिंह के परिवार के छह लोगों की हत्या कर दी गई थी।
दोषी की गिरफ्तारी से संतुष्ट है पीड़ित परिवार
कायमगंज। किशोरीलाल की गिरफ्तारी से पीड़ित परिवार में संतोष है। मृतक पक्ष के रमेश और मनीष गांव में रहकर मजदूरी करते हैं। गुरुवार दोपहर दोनों काम पर गए थे। रमेश की पत्नी शीला देवी ने बताया कि उनकी शादी घटना के दो वर्ष बाद हुई थी। रमेश के दो बेटे और दो बेटियां हैं, जबकि मनीष के दो बच्चे हैं। उनकी पत्नी का निधन हो चुका है।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव लखनपुर निवासी अमर सिंह गांव के श्रीकृष्ण मास्टर की पुत्री को ले गया था। इसके बाद 10 अगस्त 1991 की रात अमर सिंह पक्ष के गुलजारीलाल, उनकी पत्नी रामवती, पुत्र राकेश, उमेश, धर्मेंद्र और बाबूराम की हत्या हुई थी। मामले में श्रीकृष्ण मास्टर, उनके भाई रामसेवक और किशोरीलाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। तीनों आरोपियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। बाद में रामसेवक और किशोरीलाल जमानत पर छूटने के बाद फरार हो गए।
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पुलिस ने रामसेवक को 27 सितंबर 2022 को बदायूं से भंते के भेष में गिरफ्तार किया था। वह रक्षपाल नाम से रह रहा था। वहीं किशोरीलाल नोएडा की एक रेडीमेड फैक्टरी में सिलाई और डिजाइनिंग का काम कर रहा था। उसने दीपक पुत्र नंदराम के नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज बनवा रखे थे।
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प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला ने वारंट के आधार पर उसकी तलाश शुरू की। रिश्तेदारों की जानकारी जुटाने पर पता चला कि उसका साला जालौन में तैनात सिपाही है, जो मूल रूप से कन्नौज का निवासी है। पुलिस के संपर्क करने पर सिपाही ने बहनोई को पुलिस की तलाश की सूचना देकर फोन न करने की सलाह दी। इसके बावजूद पुलिस ने सर्विलांस के जरिये उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली। बुधवार को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
बेटा-बेटी की शादी का सपना लेकर जेल पहुंचा दोषी
किशोरीलाल फरारी के दौरान परिवार का पालन-पोषण करते हुए सामान्य जीवन बिता रहा था। उसकी पत्नी बेबी जनपद एटा के निधौली कला क्षेत्र के गांव गगनपुरी में रह रही है। उनके एक पुत्र निर्दोष और एक पुत्री कविता है, जो शादी योग्य हैं। पुलिस ने गगनपुरी पहुंचकर परिवार से भी पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय किशोरीलाल तुरंत समझ गया कि उसे 35 वर्ष पुराने लखनपुर हत्याकांड में पकड़ा गया है। उसने पुलिसकर्मियों से कहा, दो साल और मिल जाते तो बेटे और बेटी की शादी कर देता। अब यही अफसोस रहेगा कि बच्चों की शादी की खुशियां नहीं देख सका। वहीं, इसी हत्याकांड के दूसरे दोषी श्रीकृष्ण मास्टर की पत्नी और बच्चे मायके के गांव मिलकिया में रहकर जीवनयापन कर रहे हैं।
35 साल पुराने हत्याकांड की गांव में फिर होने लगी चर्चा
किशोरीलाल की गिरफ्तारी के बाद गांव में एक बार फिर 35 साल पुराने नरसंहार की चर्चा तेज हो गई है। गांव के बुजुर्ग सार्वजनिक स्थानों पर बैठकर उस भयावह घटना को याद कर रहे हैं। लोग बताते हैं कि प्रेम संबंधों के विरोध में एक ही परिवार के छह लोगों की हत्या कर दी गई थी।
बच्चों के दस्तावेजों में नहीं बदला पिता का नाम
किशोरीलाल ने पुलिस से बचने के लिए खुद नाम बदल लिया था लेकिन बच्चों के शैक्षिक दस्तावेज में पिता के रूप में उसका वास्तविक नाम ही दर्ज रहा। पुलिस की जांच में यही तथ्य उसके बारे में अहम सुराग साबित हुआ। फरारी के दौरान किशोरीलाल ने वर्ष 1995 में ही गांव का अपना मकान स्वामी प्रसाद को बेच दिया था। इसके बाद वह नोएडा में जाकर बस गया। वर्तमान में दोषी परिवार के नाम गांव में न मकान है और न ही कृषि भूमि। लखनपुर हत्याकांड से पहले ही अमर सिंह और युवती गांव छोड़कर चले गए थे। वर्तमान में अमर सिंह पत्नी और बच्चों के साथ एटा जिले के जसरथपुर थाना क्षेत्र के सरौठ नगरिया गांव में रह रहा है।
इज्जत की खातिर किया गया था सामूहिक हत्याकांड
कायमगंज। लखनपुर निवासी श्रीकृष्ण सरकारी शिक्षक थे और समाज में उनकी अच्छी प्रतिष्ठा थी। उनकी बेटी के गांव के ही अमर सिंह के साथ चले जाने से परिवार आहत हो गया। इसी रंजिश और तथाकथित पारिवारिक सम्मान की भावना में अमर सिंह के परिवार के छह लोगों की हत्या कर दी गई थी।
दोषी की गिरफ्तारी से संतुष्ट है पीड़ित परिवार
कायमगंज। किशोरीलाल की गिरफ्तारी से पीड़ित परिवार में संतोष है। मृतक पक्ष के रमेश और मनीष गांव में रहकर मजदूरी करते हैं। गुरुवार दोपहर दोनों काम पर गए थे। रमेश की पत्नी शीला देवी ने बताया कि उनकी शादी घटना के दो वर्ष बाद हुई थी। रमेश के दो बेटे और दो बेटियां हैं, जबकि मनीष के दो बच्चे हैं। उनकी पत्नी का निधन हो चुका है।

फोटो-30 गांव लखनपुर में घटना के बारे में जानकारी देतीं पीड़ित परिवार रमेश की पत्नी व बेटी। संवाद