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Farrukhabad News: जनपद के 50 में से 30 नालों का पानी गिर रहा है गंगा में
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sun, 01 Feb 2026 01:11 AM IST
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फोटो-20 पांचाल घाट पर गिरता गंगा में नाला। संवाद
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फर्रुखाबाद। जनपद में गंगा में गिरने वाले 50 नालों में से 30 अभी भी जल को प्रदूषित कर रहे हैं। इसका खुलासा केंद्र सरकार द्वारा कराए गए ड्रोन सर्वे व वन विभाग के नेतृत्व में हुए भौतिक सत्यापन में हुआ है। साथ ही नाले ऐसे हैं जिनका पानी एसटीपी या सोकपिट से शोधित होने के बाद गंगा में पहुंच रहा है। वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी है। अब बचे हुए 30 नालों के पानी को शोधित करने के लिए कार्ययोजना बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत गंगा को निर्मल बनाने की योजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। केंद्र सरकार ने गंगा में गिरने वाले नालों की हकीकत जानने के लिए पिछली साल निजी कंपनी से ड्रोन सर्वे कराया। इस सर्वे की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। कन्नौज के चियासर से कंपिल के पास अटैना घाट तक करीब 75 किमी में जनपद की सीमा में गंगा के किनारे 64 शहर, कस्बा व गांव बसे हैं। इनके 44 नाले गंगा में गिरते मिले।
जिला प्रशासन को यह रिपोर्ट मिली, तो वन विभाग की देखरेख में एक जांच टीम बनाई गई। इस टीम ने ड्रोन से मिली रिपोर्ट वाले सभी गांवों का भौतिक सत्यापन किया। इसमें 44 की बजाय छह अन्य नाले भी गंगा में जाते मिले। इसके बाद नालों की संख्या 50 पहुंच गई। टीम ने सौंपी रिपोर्ट में फर्रुखाबाद, फतेहगढ़ में बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और कुछ गांवों में सोकपिट से नालों के पानी को शोधित होने का दावा किया। टीम ने शोधित नालों की संख्या 20 बताई।
जांच टीम के दावों के बाद भी 30 नाले ऐसे हैं जो गंगा जल को प्रदूषित कर रहे हैं। इसको लेकर शासन खासा गंभीर है। इसके बाद वन विभाग जिला प्रशासन के सहयोग से नालों के शोधन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने की योजना में जुट गया है। अब देखना यह है कि नालों के पानी के शोधन की योजना को कब तक अमलीजामा पहनाया जा सके। डीएफओ राजीव कुमार ने बताया कि 30 नालों के जल के शोधन के लिए शीघ्र ही कार्ययोजना तैयार हो जाएगी। इसके लिए सभी विभागों के साथ बैठक होगी। आने वाले दिनों में बिना शोधित किसी भी नाले का जल गंगा में नहीं जा पाएगा।
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जिला प्रशासन को यह रिपोर्ट मिली, तो वन विभाग की देखरेख में एक जांच टीम बनाई गई। इस टीम ने ड्रोन से मिली रिपोर्ट वाले सभी गांवों का भौतिक सत्यापन किया। इसमें 44 की बजाय छह अन्य नाले भी गंगा में जाते मिले। इसके बाद नालों की संख्या 50 पहुंच गई। टीम ने सौंपी रिपोर्ट में फर्रुखाबाद, फतेहगढ़ में बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और कुछ गांवों में सोकपिट से नालों के पानी को शोधित होने का दावा किया। टीम ने शोधित नालों की संख्या 20 बताई।
जांच टीम के दावों के बाद भी 30 नाले ऐसे हैं जो गंगा जल को प्रदूषित कर रहे हैं। इसको लेकर शासन खासा गंभीर है। इसके बाद वन विभाग जिला प्रशासन के सहयोग से नालों के शोधन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने की योजना में जुट गया है। अब देखना यह है कि नालों के पानी के शोधन की योजना को कब तक अमलीजामा पहनाया जा सके। डीएफओ राजीव कुमार ने बताया कि 30 नालों के जल के शोधन के लिए शीघ्र ही कार्ययोजना तैयार हो जाएगी। इसके लिए सभी विभागों के साथ बैठक होगी। आने वाले दिनों में बिना शोधित किसी भी नाले का जल गंगा में नहीं जा पाएगा।
