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Fatehpur News: कई धंधे छोड़कर कर्ज से बना था किराने का थोक कारोबारी
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फतेहपुर। जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने वाला वर्तमान में किराना सामान का थोक सप्लायर था। उसका रहन-सहन और घर के हालात देखकर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि अमर श्रीवास्तव थोक कारोबारी होगा।
जीवन यापन के लिए अमर श्रीवास्तव ने कई धंधे किए थे। नुकसान होने पर उसने कई व्यापार बदले। परिवार की जिंदगी में कोई सुधार नहीं आ सका और वह कर्ज में डूबता चला गया। करीब एक साल से किराना सामान का थोक कारोबार शुरू किया था। इस कारोबार के लिए भी कई लोगों से कर्ज लिया था।
लखनऊ बाईपास रोड पर चौफेरवा में हाईवे पर जगत नारायण राशन विक्रेता का घर है। इसके बाद अमर का घर पीछे की ओर है। घर के लिए कच्चा रास्ता, गंदगी से भरा है। घर में एक कमरा बना है। कमरे के बाहर छप्पर पड़ा है। छत पर जाने के लिए अस्थायी सीढ़ी लगी है।
मौके पर पहुंचने वाले हर व्यक्ति परिवार की आर्थिक हालत को लेकर सोचने के लिए मजबूर दिखा। बेटी दीपिका जगतनारायण के दरवाजे पर चारपाई पर बदहवास हालत में लेटी दिखी। उसके पास ही नाते-रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहा। सुशीला की बहनों ने कहा कि कई बार होली मिलन के लिए बुलाया था लेकिन वह नहीं आई थीं।
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जीवन यापन के लिए अमर श्रीवास्तव ने कई धंधे किए थे। नुकसान होने पर उसने कई व्यापार बदले। परिवार की जिंदगी में कोई सुधार नहीं आ सका और वह कर्ज में डूबता चला गया। करीब एक साल से किराना सामान का थोक कारोबार शुरू किया था। इस कारोबार के लिए भी कई लोगों से कर्ज लिया था।
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लखनऊ बाईपास रोड पर चौफेरवा में हाईवे पर जगत नारायण राशन विक्रेता का घर है। इसके बाद अमर का घर पीछे की ओर है। घर के लिए कच्चा रास्ता, गंदगी से भरा है। घर में एक कमरा बना है। कमरे के बाहर छप्पर पड़ा है। छत पर जाने के लिए अस्थायी सीढ़ी लगी है।
मौके पर पहुंचने वाले हर व्यक्ति परिवार की आर्थिक हालत को लेकर सोचने के लिए मजबूर दिखा। बेटी दीपिका जगतनारायण के दरवाजे पर चारपाई पर बदहवास हालत में लेटी दिखी। उसके पास ही नाते-रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहा। सुशीला की बहनों ने कहा कि कई बार होली मिलन के लिए बुलाया था लेकिन वह नहीं आई थीं।