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Gonda News: मुफ्त एआरवी के लिए खरीदनी पड़ रही सिरिंज
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 13 May 2026 12:04 AM IST
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गोंडा। मेडिकल कॉलेज में इन दिनों संसाधनों की कमी से इलाज पर संकट आने लगा है। कुत्ता, बंदर और बिल्ली के काटने पर लगाई जाने वाली मुफ्त एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) तो उपलब्ध है, लेकिन उसे लगाने के लिए जरूरी इंसुलिन सिरिंज खत्म हो गई है। ऐसे में मरीजों और तीमारदारों को मेडिकल स्टोर से 10 रुपये की सिरिंज खरीदकर लानी पड़ रही है। इसी वजह से मंगलवार को अस्पताल परिसर में तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बहस भी हुई।
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 200 मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचते हैं। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में लोग एआरवी लगवाने के लिए पहुंचे, लेकिन काउंटर पर उन्हें बाहर से सिरिंज खरीदने के लिए कहा गया। इससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली।
मालवीय नगर निवासी राजू अपने भाई को एआरवी लगवाने मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि परचा बनवाने के बाद जब वैक्सीन काउंटर पर पहुंचे तो स्वास्थ्य कर्मियों ने इंसुलिन सिरिंज लाने को कहा। मजबूरी में उन्हें बाहर मेडिकल स्टोर से सिरिंज खरीदनी पड़ी।
इसी तरह सरोज नामक महिला ने बताया कि वह अपनी बेटी को एआरवी लगवाने आई थीं, लेकिन उन्हें भी बाहर से सिरिंज खरीदने के लिए कहा गया। इसे लेकर कई तीमारदारों ने नाराजगी जताई। कुछ लोगों की स्वास्थ्य कर्मियों से कहासुनी भी हो गई। बाद में वरिष्ठ कर्मचारियों ने पहुंचकर लोगों को समझाकर मामला शांत कराया।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीएन सिंह ने बताया कि इंसुलिन सिरिंज की कमी का मामला संज्ञान में है। सीएमएस और मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को स्थिति से अवगत करा दिया गया है। नई सिरिंज खरीदने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 200 मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचते हैं। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में लोग एआरवी लगवाने के लिए पहुंचे, लेकिन काउंटर पर उन्हें बाहर से सिरिंज खरीदने के लिए कहा गया। इससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली।
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मालवीय नगर निवासी राजू अपने भाई को एआरवी लगवाने मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि परचा बनवाने के बाद जब वैक्सीन काउंटर पर पहुंचे तो स्वास्थ्य कर्मियों ने इंसुलिन सिरिंज लाने को कहा। मजबूरी में उन्हें बाहर मेडिकल स्टोर से सिरिंज खरीदनी पड़ी।
इसी तरह सरोज नामक महिला ने बताया कि वह अपनी बेटी को एआरवी लगवाने आई थीं, लेकिन उन्हें भी बाहर से सिरिंज खरीदने के लिए कहा गया। इसे लेकर कई तीमारदारों ने नाराजगी जताई। कुछ लोगों की स्वास्थ्य कर्मियों से कहासुनी भी हो गई। बाद में वरिष्ठ कर्मचारियों ने पहुंचकर लोगों को समझाकर मामला शांत कराया।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीएन सिंह ने बताया कि इंसुलिन सिरिंज की कमी का मामला संज्ञान में है। सीएमएस और मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को स्थिति से अवगत करा दिया गया है। नई सिरिंज खरीदने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।