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Gonda News: गबन के आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं
Fri, 14 Aug 2026 09:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 14 Aug 2026 09:45 PM IST
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गोंडा। बलरामपुर के उतरौला ब्लॉक में कूप निर्माण के नाम पर फर्जी अभिलेखों के जरिये सरकारी धन के गबन का करीब 24 साल पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी सिद्धार्थनगर जिले के भडरिया गांव निवासी सेवानिवृत्त अवर अभियंता भिखुल्लाह की अग्रिम जमानत अर्जी अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) नित्या पांडेय ने खारिज कर दी।
अभियोजन के अनुसार, सतर्कता अधिष्ठान फैजाबाद की जांच में बलरामपुर के उतरौला में कूप निर्माण के लिए जारी धनराशि में अनियमितता सामने आई थी। जांच में पाया गया कि 20 लाभार्थियों के नाम पर कूप निर्माण दर्शाते हुए फर्जी अभिलेख तैयार किए गए, जबकि भौतिक सत्यापन में संबंधित कूपों का निर्माण नहीं मिला। प्रत्येक कूप के लिए 18 हजार रुपये की दर से कुल 3.60 लाख रुपये सरकारी धन प्राप्त किए जाने का आरोप है। मामले में उतरौला ब्लॉक के तत्कालीन अवर अभियंता भिखुल्लाह सिद्दीकी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
आरोपी की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। इसमें उसने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह 74 वर्ष का है और लंबे समय से बीमार चल रहा है। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि मामले में विवेचना के उपरांत दो जुलाई 2007 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इसके बाद आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ। 19 जून 2008 को धारा 82 और 83 की कार्रवाई के बाद उसे फरार घोषित करते हुए साक्ष्य दर्ज करने के लिए पत्रावली अग्रसारित की गई थी। इन परिस्थितियों में आरोपी को अग्रिम जमानत पर रिहा करने का पर्याप्त आधार नहीं है। ऐसे में अदालत ने अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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अभियोजन के अनुसार, सतर्कता अधिष्ठान फैजाबाद की जांच में बलरामपुर के उतरौला में कूप निर्माण के लिए जारी धनराशि में अनियमितता सामने आई थी। जांच में पाया गया कि 20 लाभार्थियों के नाम पर कूप निर्माण दर्शाते हुए फर्जी अभिलेख तैयार किए गए, जबकि भौतिक सत्यापन में संबंधित कूपों का निर्माण नहीं मिला। प्रत्येक कूप के लिए 18 हजार रुपये की दर से कुल 3.60 लाख रुपये सरकारी धन प्राप्त किए जाने का आरोप है। मामले में उतरौला ब्लॉक के तत्कालीन अवर अभियंता भिखुल्लाह सिद्दीकी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
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आरोपी की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। इसमें उसने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह 74 वर्ष का है और लंबे समय से बीमार चल रहा है। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि मामले में विवेचना के उपरांत दो जुलाई 2007 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इसके बाद आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ। 19 जून 2008 को धारा 82 और 83 की कार्रवाई के बाद उसे फरार घोषित करते हुए साक्ष्य दर्ज करने के लिए पत्रावली अग्रसारित की गई थी। इन परिस्थितियों में आरोपी को अग्रिम जमानत पर रिहा करने का पर्याप्त आधार नहीं है। ऐसे में अदालत ने अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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