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Gonda News: मसालों ने बिखेरी आत्मनिर्भरता की खुशबू
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 12 Apr 2026 09:03 PM IST
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सरिता पांडेय।
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गोंडा। मनकापुर विकासखंड के बक्सरा आज्ञाराम गांव की सरिता पांडेय ने मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई मिसाल पेश की है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली सरिता आज अपने मसाला व्यवसाय के जरिये न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि गांव की 12 अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का जरिया बन गई हैं। डबल एमए तक पढ़ाई करने के बावजूद नौकरी न मिलने पर उन्होंने हार नहीं मानी। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा दी।
उन्होंने ‘इंद्रावती महिला स्वयं सहायता समूह’ बनाकर बैंक से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और मसाला बनाने का काम शुरू किया। सरिता ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने घर पर ही हल्दी, मिर्च व धनिया को पीसकर आसपास के गांवों में खुद जाकर बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके मसालों की शुद्धता और स्वाद ने ग्राहकों का भरोसा जीत लिया। उन्होंने बताया कि हमारे यहां पिसी हल्दी, मिर्चा, धनिया, साबुत गरम मसाला, सब्जी मसाला, छोले मसाला, पनीर मसाला, चिकन मसाला, मटन मसाला, किचन किंग के साथ-साथ लगभग 52 प्रकार के मसाले तैयार किए जाते हैं।
यहां मसाले पूरी तरह पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे पर पीसे जाते हैं, जिससे स्वाद और गुणवत्ता बनी रहती है। बेहतर पैकेजिंग और गुणवत्ता के कारण कारोबार लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान समय में प्रति वर्ष करीब तीन लाख रुपये की कमाई हो जाती है। मंडल सहित अयोध्या व बस्ती तक उनके उत्पाद बिक रहे हैं।
नौकरी नहीं मिलने पर भी अटूट रहा हौसला
सरिता ने पोस्ट ग्रेजुएशन (डबल एमए) तक पढ़ाई की, लेकिन नौकरी नहीं मिलने पर निराश नहीं हुईं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू किया और आज एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना ली है। सरिता ने बताया कि उनके साथ नीलम यादव, सोनी मौर्या, सरोज निषाद, दुलारी देवी, सुनीता देवी, मीना कुमार सहित 12 महिलाएं कमाई कर रही हैं।
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उन्होंने ‘इंद्रावती महिला स्वयं सहायता समूह’ बनाकर बैंक से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और मसाला बनाने का काम शुरू किया। सरिता ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने घर पर ही हल्दी, मिर्च व धनिया को पीसकर आसपास के गांवों में खुद जाकर बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके मसालों की शुद्धता और स्वाद ने ग्राहकों का भरोसा जीत लिया। उन्होंने बताया कि हमारे यहां पिसी हल्दी, मिर्चा, धनिया, साबुत गरम मसाला, सब्जी मसाला, छोले मसाला, पनीर मसाला, चिकन मसाला, मटन मसाला, किचन किंग के साथ-साथ लगभग 52 प्रकार के मसाले तैयार किए जाते हैं।
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यहां मसाले पूरी तरह पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे पर पीसे जाते हैं, जिससे स्वाद और गुणवत्ता बनी रहती है। बेहतर पैकेजिंग और गुणवत्ता के कारण कारोबार लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान समय में प्रति वर्ष करीब तीन लाख रुपये की कमाई हो जाती है। मंडल सहित अयोध्या व बस्ती तक उनके उत्पाद बिक रहे हैं।
नौकरी नहीं मिलने पर भी अटूट रहा हौसला
सरिता ने पोस्ट ग्रेजुएशन (डबल एमए) तक पढ़ाई की, लेकिन नौकरी नहीं मिलने पर निराश नहीं हुईं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू किया और आज एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना ली है। सरिता ने बताया कि उनके साथ नीलम यादव, सोनी मौर्या, सरोज निषाद, दुलारी देवी, सुनीता देवी, मीना कुमार सहित 12 महिलाएं कमाई कर रही हैं।