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Gonda News: मैदान व संसाधन मिलें तभी निखरेंगी खेल प्रतिभाएं
Thu, 23 Jul 2026 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:31 PM IST
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अभ्यास करते खिलाड़ी।
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गोंडा। जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ खेल मैदान, प्रशिक्षकों और आवश्यक संसाधनों की। जिन विद्यालयों में बड़े मैदान और नियमित अभ्यास की सुविधा उपलब्ध है, वहां के छात्र-छात्राएं रणजी ट्रॉफी से लेकर राष्ट्रीय स्कूली प्रतियोगिताओं तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।
जिले के अधिकांश माध्यमिक विद्यालयों में खेल गतिविधियां सीमित जगह और संसाधनों के अभाव में कैरम, शतरंज, बैडमिंटन या कबड्डी जैसे खेलों तक सिमट कर रह गई हैं। जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त 515 विद्यालय हैं, लेकिन इनमें अधिकांश के पास बड़े खेल मैदान नहीं बचे हैं। मैदान व संसाधन के अभाव में जिले की खेल प्रतिभाओं को निखरने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
हर साल मिल सकते 10 राष्ट्रीय खिलाड़ी :
यदि जिले के सभी 515 माध्यमिक विद्यालयों में पर्याप्त खेल मैदान और संसाधन उपलब्ध हों तथा प्रत्येक विद्यालय से हर वर्ष केवल दो खिलाड़ी जिला स्तर तक पहुंचें, तो 1,030 खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
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इनमें से यदि 10 प्रतिशत खिलाड़ी राज्य स्तर तक पहुंचें तो करीब 103 खिलाड़ी तैयार होंगे और उनमें से 10 प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचें तो हर वर्ष लगभग 10 राष्ट्रीय खिलाड़ी जिले को मिल सकते हैं। लेकिन वर्तमान में मैदान, प्रशिक्षकों और खेल सुविधाओं के अभाव में अनेक प्रतिभाएं शुरुआती दौर में ही दम तोड़ रही हैं।
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जिले के अधिकांश माध्यमिक विद्यालयों में खेल गतिविधियां सीमित जगह और संसाधनों के अभाव में कैरम, शतरंज, बैडमिंटन या कबड्डी जैसे खेलों तक सिमट कर रह गई हैं। जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त 515 विद्यालय हैं, लेकिन इनमें अधिकांश के पास बड़े खेल मैदान नहीं बचे हैं। मैदान व संसाधन के अभाव में जिले की खेल प्रतिभाओं को निखरने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
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हर साल मिल सकते 10 राष्ट्रीय खिलाड़ी :
यदि जिले के सभी 515 माध्यमिक विद्यालयों में पर्याप्त खेल मैदान और संसाधन उपलब्ध हों तथा प्रत्येक विद्यालय से हर वर्ष केवल दो खिलाड़ी जिला स्तर तक पहुंचें, तो 1,030 खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
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इनमें से यदि 10 प्रतिशत खिलाड़ी राज्य स्तर तक पहुंचें तो करीब 103 खिलाड़ी तैयार होंगे और उनमें से 10 प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचें तो हर वर्ष लगभग 10 राष्ट्रीय खिलाड़ी जिले को मिल सकते हैं। लेकिन वर्तमान में मैदान, प्रशिक्षकों और खेल सुविधाओं के अभाव में अनेक प्रतिभाएं शुरुआती दौर में ही दम तोड़ रही हैं।