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Gonda News: अधिवक्ता हत्याकांड में तीन गिरफ्तार, एसपी कार्यालय घेरा, प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 23 Feb 2026 11:43 PM IST
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रोते-बिलखते सुभाष के परिजन, एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करते अधिवक्ता व मुस्तैद पुलिस ब
- फोटो : निशान यात्रा निकालते लोग।
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गोंडा।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में पूर्व प्रशासनिक अधिवक्ता व अवध बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री सुभाष चंद्र मिश्र की हत्या के मामले में रविवार रात पुलिस ने हरिशरण मिश्र, रामकेवल मिश्र और संतोष कुमार मिश्र को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी मृतक के भाई अरुण कुमार मिश्र की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। वहीं, हत्याकांड से गुस्साए वकीलों ने सोमवार को बार एसोसिएशन अध्यक्ष रविचंद्र त्रिपाठी, महामंत्री सुनील कुमार पांडेय व सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय प्रकाश त्रिपाठी व महामंत्री गौरी शंकर चतुर्वेदी के नेतृत्व में एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया।
हत्याकांड से नाराज अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन और कटरा बाजार के विधायक बावन सिंह के खिलाफ नारेबाजी की। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल को ज्ञापन सौंपा। चेताया कि किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए। पुलिस अगर राजनीतिक दबाव में आई तो खैर नहीं है।
भूमि विवाद में रविवार को अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्र की हत्या कर दी गई। उनके छोटे बेटे अनुराग मिश्र ने बड़े भाई व अधिवक्ता अभिषेक मिश्र को घटना की जानकारी दी। अभिषेक कुछ साथियों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में अधिवक्ता जुट गए। पोस्टमार्टम में देरी से आक्रोशित अधिवक्ता एसपी आवास पहुंच गए। वे एसपी से मुलाकात की मांग कर रहे थे।
बाद में एसपी विनीत जायसवाल पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद देर रात पोस्टमार्टम कराया गया। सोमवार दोपहर सरयू के कटरा घाट पर सुभाष मिश्र का अंतिम संस्कार किया गया। पुत्र अभिषेक मिश्र ने मुखाग्नि दी।
आरोपी को थाने से भगाने का आरोप
अवध बार एसोसिएशन लखनऊ के पूर्व संयुक्त सचिव (प्रशासन) देवकीनंदन पांडेय ने आरोप लगाया कि घटना से एक दिन पहले पुलिस को सूचना दी गई थी, लेकिन फोर्स मौके पर नहीं पहुंची। उनका आरोप है कि घटना के बाद हत्यारोपी अरुण कुमार मिश्र थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उसे भगा दिया। अधिवक्ता के सिर में गंभीर चोटें होने के बावजूद जानलेवा हमले की धारा के बजाय गंभीर मारपीट की धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आठ चोटों की पुष्टि
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सुभाष मिश्र की मौत अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज शॉक) से हुई। उनके सिर, दाहिने हाथ, दोनों पैरों व घुटनों पर चोट के आठ निशान पाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि मारपीट के दौरान लगी चोट के कारण रक्तवाहिका फटने से अधिक रक्तस्राव से मौत हुई है।
नौ बीघा जमीन का तीन साल से चल रहा था विवाद
दत्तनगर सुदई पुरवा निवासी सुभाष चंद्र मिश्र के बड़े पुत्र अभिषेक मिश्र भी अधिवक्ता हैं और लखनऊ में वकालत करते हैं। छोटे पुत्र अनुराग मिश्र खेती करते हैं।सुभाष का नौ बीघा जमीन को लेकर तीन वर्ष से अपने भाई अरुण कुमार मिश्र व गांव के पूर्व प्रधान हरिशरण मिश्र से विवाद चल रहा था। वसीयत और बैनामा को लेकर दोनों पक्षों में मुकदमेबाजी चल रही थी।
वायरल वीडियो में दिखी पूरी वारदात
सुभाष की हत्या के बाद सामने आए वीडियो में विवादित खेत की ट्रैक्टर से जोताई का दृश्य नजर आ रहा है। ट्रैक्टर पर दो लोग बैठे दिख रहे हैं और खेत के आसपास 10 से 12 लोग लाठी-डंडे और हॉकी लिए खड़े हैं। वीडियो में आवाज सुनाई दे रही है कि...देखिए, हमने इस जमीन का बैनामा कराया है, इसे दबंगई से जोता जा रहा है...। अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्र भी मौके पर नजर आ रहे हैं। कुछ ही क्षण बाद हॉकी लिए एक व्यक्ति उनके पास पहुंचता है। दोनों पक्षों में पहले तीखी बहस होती है और फिर अचानक मारपीट शुरू हो जाती है। वीडियो में अफरा-तफरी का माहौल नजर आता है। कुछ देर बाद किसी के चिल्लाने की आवाज आती है...पुलिस आ गई, भागो। इसके तुरंत बाद दृश्य धुंधला हो जाता है और अंधेरा छा जाता है। अंत में यह आवाज सुनाई देती है कि ट्रैक्टर चढ़ा दिया। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी इस वीडियो की पुष्टि नहीं करती है। वहीं, पुलिस वायरल वीडियो की जांच की बात कह रही है।
एसपी से 36 घंटे में कार्रवाई मांग
गोंडा। एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि घायल अवस्था में सुभाष चंद्र मिश्र को अस्पताल भेजने में करनैलगंज पुलिस ने जानबूझकर देरी की। मजरूबी चिट्ठी (आधिकारिक कानूनी पत्र, जो थाना प्रभारी द्वारा सरकारी डॉक्टर को लिखा जाता है, जिसमें किसी घायल व्यक्ति की मेडिकल जांच या इंजरी रिपोर्ट तैयार करने का अनुरोध किया जाता है।) समय से न भेजने के कारण इलाज में विलंब हुआ, जिससे उनकी जान चली गई। यह भी आरोप लगाया कि घटना से एक दिन पूर्व 21 फरवरी को अधिवक्ता ने जमीन कब्जे से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए अनहोनी की आशंका जताई थी, लेकिन संबंधित कोतवाल व हल्का दरोगा ने प्रभावी कदम नहीं उठाया।
नाराज अधिवक्ताओं ने जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को 36 घंटे के भीतर निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन में सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामबुझारत द्विवेदी, विवेकमणि श्रीवास्तव, श्रीकांत पांडेय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
अधिवक्ताओं ने सौंपा चार सूत्रीय ज्ञापन
करनैलगंज। अधिवक्ता हत्याकांड के बाद सोमवार को बार एसोसिएशन करनैलगंज की आपात बैठक हुई। अध्यक्ष श्यामधर शुक्ल की अध्यक्षता में हुई बैठक में आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की गई। मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम नेहा मिश्रा को सौंपा गया। ज्ञापन में मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर व रासुका के तहत कार्रवाई और अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग की गई।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। इससे पहले बार एसोसिएशन करनैलगंज में अधिवक्ताओं ने सोमवार को बैठक कर दो मिनट का मौन रखा और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लेते हुए घटना को अत्यंत दुखद और निंदनीय बताया।
आज होगी मामले की सुनवाई
गोंडा। अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्र की हत्या के मामले में जमीन विवाद को लेकर ग्राम न्यायालय में चल रहे मामले की सुनवाई 24 फरवरी को होनी है। ग्राम न्यायालय में चल रहे अभय कुमार बनाम रामकेवल मामले में वादी ने आरोप लगाया था कि दूसरे पक्ष के लोग जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। इस पर दूसरे पक्ष के लाेगों को जमीन पर हस्तक्षेप करने से राेका गया था। बताया जाता है कि इसी प्रकरण को लेकर एक अन्य मुकदमा एसडीएम न्यायालय पर चल रहा है।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में पूर्व प्रशासनिक अधिवक्ता व अवध बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री सुभाष चंद्र मिश्र की हत्या के मामले में रविवार रात पुलिस ने हरिशरण मिश्र, रामकेवल मिश्र और संतोष कुमार मिश्र को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी मृतक के भाई अरुण कुमार मिश्र की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। वहीं, हत्याकांड से गुस्साए वकीलों ने सोमवार को बार एसोसिएशन अध्यक्ष रविचंद्र त्रिपाठी, महामंत्री सुनील कुमार पांडेय व सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय प्रकाश त्रिपाठी व महामंत्री गौरी शंकर चतुर्वेदी के नेतृत्व में एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया।
हत्याकांड से नाराज अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन और कटरा बाजार के विधायक बावन सिंह के खिलाफ नारेबाजी की। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल को ज्ञापन सौंपा। चेताया कि किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए। पुलिस अगर राजनीतिक दबाव में आई तो खैर नहीं है।
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भूमि विवाद में रविवार को अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्र की हत्या कर दी गई। उनके छोटे बेटे अनुराग मिश्र ने बड़े भाई व अधिवक्ता अभिषेक मिश्र को घटना की जानकारी दी। अभिषेक कुछ साथियों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में अधिवक्ता जुट गए। पोस्टमार्टम में देरी से आक्रोशित अधिवक्ता एसपी आवास पहुंच गए। वे एसपी से मुलाकात की मांग कर रहे थे।
बाद में एसपी विनीत जायसवाल पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद देर रात पोस्टमार्टम कराया गया। सोमवार दोपहर सरयू के कटरा घाट पर सुभाष मिश्र का अंतिम संस्कार किया गया। पुत्र अभिषेक मिश्र ने मुखाग्नि दी।
आरोपी को थाने से भगाने का आरोप
अवध बार एसोसिएशन लखनऊ के पूर्व संयुक्त सचिव (प्रशासन) देवकीनंदन पांडेय ने आरोप लगाया कि घटना से एक दिन पहले पुलिस को सूचना दी गई थी, लेकिन फोर्स मौके पर नहीं पहुंची। उनका आरोप है कि घटना के बाद हत्यारोपी अरुण कुमार मिश्र थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उसे भगा दिया। अधिवक्ता के सिर में गंभीर चोटें होने के बावजूद जानलेवा हमले की धारा के बजाय गंभीर मारपीट की धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आठ चोटों की पुष्टि
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सुभाष मिश्र की मौत अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज शॉक) से हुई। उनके सिर, दाहिने हाथ, दोनों पैरों व घुटनों पर चोट के आठ निशान पाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि मारपीट के दौरान लगी चोट के कारण रक्तवाहिका फटने से अधिक रक्तस्राव से मौत हुई है।
नौ बीघा जमीन का तीन साल से चल रहा था विवाद
दत्तनगर सुदई पुरवा निवासी सुभाष चंद्र मिश्र के बड़े पुत्र अभिषेक मिश्र भी अधिवक्ता हैं और लखनऊ में वकालत करते हैं। छोटे पुत्र अनुराग मिश्र खेती करते हैं।सुभाष का नौ बीघा जमीन को लेकर तीन वर्ष से अपने भाई अरुण कुमार मिश्र व गांव के पूर्व प्रधान हरिशरण मिश्र से विवाद चल रहा था। वसीयत और बैनामा को लेकर दोनों पक्षों में मुकदमेबाजी चल रही थी।
वायरल वीडियो में दिखी पूरी वारदात
सुभाष की हत्या के बाद सामने आए वीडियो में विवादित खेत की ट्रैक्टर से जोताई का दृश्य नजर आ रहा है। ट्रैक्टर पर दो लोग बैठे दिख रहे हैं और खेत के आसपास 10 से 12 लोग लाठी-डंडे और हॉकी लिए खड़े हैं। वीडियो में आवाज सुनाई दे रही है कि...देखिए, हमने इस जमीन का बैनामा कराया है, इसे दबंगई से जोता जा रहा है...। अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्र भी मौके पर नजर आ रहे हैं। कुछ ही क्षण बाद हॉकी लिए एक व्यक्ति उनके पास पहुंचता है। दोनों पक्षों में पहले तीखी बहस होती है और फिर अचानक मारपीट शुरू हो जाती है। वीडियो में अफरा-तफरी का माहौल नजर आता है। कुछ देर बाद किसी के चिल्लाने की आवाज आती है...पुलिस आ गई, भागो। इसके तुरंत बाद दृश्य धुंधला हो जाता है और अंधेरा छा जाता है। अंत में यह आवाज सुनाई देती है कि ट्रैक्टर चढ़ा दिया। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी इस वीडियो की पुष्टि नहीं करती है। वहीं, पुलिस वायरल वीडियो की जांच की बात कह रही है।
एसपी से 36 घंटे में कार्रवाई मांग
गोंडा। एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि घायल अवस्था में सुभाष चंद्र मिश्र को अस्पताल भेजने में करनैलगंज पुलिस ने जानबूझकर देरी की। मजरूबी चिट्ठी (आधिकारिक कानूनी पत्र, जो थाना प्रभारी द्वारा सरकारी डॉक्टर को लिखा जाता है, जिसमें किसी घायल व्यक्ति की मेडिकल जांच या इंजरी रिपोर्ट तैयार करने का अनुरोध किया जाता है।) समय से न भेजने के कारण इलाज में विलंब हुआ, जिससे उनकी जान चली गई। यह भी आरोप लगाया कि घटना से एक दिन पूर्व 21 फरवरी को अधिवक्ता ने जमीन कब्जे से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए अनहोनी की आशंका जताई थी, लेकिन संबंधित कोतवाल व हल्का दरोगा ने प्रभावी कदम नहीं उठाया।
नाराज अधिवक्ताओं ने जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को 36 घंटे के भीतर निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन में सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामबुझारत द्विवेदी, विवेकमणि श्रीवास्तव, श्रीकांत पांडेय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
अधिवक्ताओं ने सौंपा चार सूत्रीय ज्ञापन
करनैलगंज। अधिवक्ता हत्याकांड के बाद सोमवार को बार एसोसिएशन करनैलगंज की आपात बैठक हुई। अध्यक्ष श्यामधर शुक्ल की अध्यक्षता में हुई बैठक में आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की गई। मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम नेहा मिश्रा को सौंपा गया। ज्ञापन में मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर व रासुका के तहत कार्रवाई और अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग की गई।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। इससे पहले बार एसोसिएशन करनैलगंज में अधिवक्ताओं ने सोमवार को बैठक कर दो मिनट का मौन रखा और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लेते हुए घटना को अत्यंत दुखद और निंदनीय बताया।
आज होगी मामले की सुनवाई
गोंडा। अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्र की हत्या के मामले में जमीन विवाद को लेकर ग्राम न्यायालय में चल रहे मामले की सुनवाई 24 फरवरी को होनी है। ग्राम न्यायालय में चल रहे अभय कुमार बनाम रामकेवल मामले में वादी ने आरोप लगाया था कि दूसरे पक्ष के लोग जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। इस पर दूसरे पक्ष के लाेगों को जमीन पर हस्तक्षेप करने से राेका गया था। बताया जाता है कि इसी प्रकरण को लेकर एक अन्य मुकदमा एसडीएम न्यायालय पर चल रहा है।

रोते-बिलखते सुभाष के परिजन, एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करते अधिवक्ता व मुस्तैद पुलिस ब- फोटो : निशान यात्रा निकालते लोग।

रोते-बिलखते सुभाष के परिजन, एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करते अधिवक्ता व मुस्तैद पुलिस ब- फोटो : निशान यात्रा निकालते लोग।
