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Hamirpur News: पूर्व सांसद समेत हटे 70 नाम, फिर भी विसंगति बरकरार

संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Updated Thu, 22 Jan 2026 12:17 AM IST
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70 names, including those of a former MP, were removed, but the discrepancy persisted.
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हमीरपुर। जेल में रहते हुए लोक सभा का चुनाव जीतने वाले अशोक सिंह चंदेल अब शहर के विवेक नगर स्थित अपने मकान से मतदाता नहीं है। एसआईआर सर्वे में उनका नाम गणना प्रपत्र जमा न होने की वजह से हटाया गया है। यही नहीं उनके मकान नंबर 62 से वर्ष 2025 की सूची में दर्ज 90 मतदाताओं में से 70 के नाम अलग किए गए, इसके बावजूद विसंगति बरकरार है। कच्ची मतदाता सूची में परिवार के साथ अन्य जातियों के परिवारों के नाम दर्ज है।
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विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के पहले वर्ष 2025 की मतदाता सूची में पूर्व सांसद अशोक सिंह चंदेल के विवेक नगर स्थित मकान नंबर 62 में 90 मतदाता दर्ज थे। अमर उजाला ने 11 दिसंबर 2025 के अंक में खबर प्रकाशित की थी। खबर को संज्ञान लेते हुए वहां के बीएलओ सागर साहू ने पुराने बीएलओ की खामियों को सुधारने का प्रयास किया। उन्होंने सर्वे के बाद मकान नंबर 62 से 70 नाम हटाए है। पूर्व सांसद अशोक सिंह चंदेल तो चूंकि जेल में है लेकिन उनके परिजनों ने यह कहते हुए गणना प्रपत्र नहीं भरा था कि अब वह यहांं से मतदाता नहीं रहना चाहते है। खाली गणना प्रपत्र वापस कर दिया था, यही वजह है कि कच्ची मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है। मौजूदा समय में उनकी पत्नी राजकुमारी सिंह का नाम है, इसके अलावा उनके बेटे अभय राज सिंह, बेटी आरजू सिंह चंदेल समेत परिवार के 20 नाम दर्ज है। खास बात तो यह है कि अभी भी उनके मकान से सुखलाल प्रजापति, पारस कुमार त्रिपाठी, सफरुद्दीन के वोट भी बने हुए है।
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कच्ची मतदाता सूची से हटाए गए 342 नाम
पूर्व सांसद अशोक सिंह चंदेल का मकान विवेक नगर में स्थित है। वर्ष 2025 में यह क्षेत्र भाग संख्या 103 में था। एसआईआर के बाद यह इलाका भाग संख्या 119 में आ गया है। मकान नंबर वही है। भाग संख्या 103 में 998 मतदाता थे, सर्वे के बाद अब 656 रह गए है। इसमें भी नोटिस के बाद दस्तावेज पूरे न करने वालों के नाम हटाए जाएंगे।

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नोटिस पर सुनवाई में नियमों की बाध्यता ने बढ़ाई परेशानी
हमीरपुर। शहर के तहसील भवन के सभागार में बुधवार को गणना प्रपत्र में जरूरी दस्तावेज शामिल न करने वाले मतदाताओं के यहां भेजे गए नोटिस की सुनवाई हुई। सदर एसडीएम केडी शर्मा ने दस्तावेज लेकर आए मतदाताओं के दस्तावेजों को चेक किया। आवश्यक दो प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर उन्होंने फार्म को ओके किया। बीएलओ ने दस्तावेजों की फीडिंग कराई। नोटिस सुनवाई में नियमों की बाध्यता के चलते मतदाताओं को परेशान होना पड़ा। वर्ष 2003 की सूची का साक्ष्य न दे पाने वाले सबसे अधिक परेशान रहे। निर्वाचन आयोग ने दो प्रमाण पत्रों को अनिवार्य किया है।
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मां व उसके तीन बेटों को देना होना दूसरा प्रमाण
शहर के भाग संख्या 119 के मकान नंबर 87 में नीलम का नाम दर्ज है। उनके बेटे मनोज कुमार, विनोद कुमार व प्रमोद कुमार का भी नाम दर्ज है। नीलम और उनके बेटों ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची के जरूरी दस्तावेज नहीं दिए थे, इस वजह से उन्हें नोटिस भेजा गया। बुधवार को नोटिस की सुनवाई के लिए उन्हें बुलाया गया। मां अपने बेटों के साथ तहलील पहुंची। यहां पर एसडीएम के समक्ष कागजात पेश किए, जो पहली नजर में खारिज कर दिए गए। आज की नीलम वर्ष 2003 की सूची में मौदहा में रानी के नाम से मतदाता थी। रानी नाम से ही उनका आधार कार्ड था। हमीरपुर में आने पर उनके पति सीताराम ने मकान खरीदा और यहीं के निवासी हो गए। वर्ष 2022 में उनकी मौत हो गई। मां के नाम की विसंगति के चलते बेटों के नाम में अड़चन आई है। हालांकि उन्हें एक मौका और दिया गया और दूसरा कोई प्रमाण देने को कहा गया।
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ससुर के कागज भी नहीं आए बहू के काम
एसआईआर में ससुर के कागजात बहू के काम नहीं आ पाए। नोटिस मिलने के बाद बुधवार को सुनवाई के लिए तहसील पहुंचे। बताया कि भाग संख्या 119 के मकान नंबर 259 क्रम संख्या 573 पर पिंकी पिता थाणेश्वर के नाम से दर्ज है। नोटिस में माता-पिता का वर्ष 2003 का रिकार्ड मांगा गया। पिंकी ने बताया कि वह पढी-लिखी नहीं है और भट्टा पर मजदूरी करती है इस वजह से उनका रिकार्ड नहीं है। यहां पर पति और ससुर के नाम तो मतदाता सूची में है, नाम मेरा भी था लेकिन अब नोटिस ने परेशानी बढ़ा दी है। एसडीएम साहब ने कहा कि दो प्रमाण आवश्यक है, नहीं होंगे तो नाम कट जाएगा।
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